दतिया म्यूजियम में मिली रानी लक्ष्मीबाई की सबसे पुरानी पेंटिंग, देखें
5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला
- मध्यप्रदेश के दतिया म्यूजियम में एक बहुत पुरानी पेंटिंग सामने आई है।
- दावा है कि यह रानी लक्ष्मीबाई की सबसे पुरानी समकालीन तस्वीर है।
- यह पेंटिंग प्राचीन कागज और सोने की असली धूल से बनी हुई है।
- तस्वीर में रानी लक्ष्मीबाई के बेटे के गोद लेने का उत्सव दिख रहा है।
- ज्ञान भारतम अभियान के तहत इस अनमोल ऐतिहासिक धरोहर की खोज हुई है।
दतिया म्यूजियम में हुई एक अनोखी खोज
इतिहास प्रेमियों के लिए मध्यप्रदेश के दतिया से एक शानदार खबर है। दरअसल दतिया के स्थानीय म्यूजियम में सालों से रखी एक पेंटिंग मिली है। इस पेंटिंग को लेकर जानकारों ने बहुत बड़ा दावा किया है।
इसे झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की सबसे पुरानी तस्वीर माना जा रहा है। समकालीन का मतलब है कि यह रानी लक्ष्मी के दौर में बनाई गई थी। इस खोज से इतिहास के पन्नों को नया रूप मिलेगा।
सोने की धूल से सजी पेंटिंग
यह प्राचीन कलाकृति बेहद खास तरीके से तैयार की गई है। इसे एक बहुत ही पुराने और विशेष कागज पर बनाया गया था। पेंटिंग को खूबसूरत बनाने के लिए सोने की धूल का इस्तेमाल हुआ था।
हैरानी की बात यह है कि सदियां बीतने के बाद भी क्या हुआ? आज भी रोशनी पड़ने पर यह सोने की धूल चमक उठती है। कला का ऐसा बेजोड़ नमूना आज के समय में मिलना बहुत मुश्किल है।
ज्ञान भारतम अभियान के तहत सामने आई धरोहर
इस अनमोल पेंटिंग को खोजने का श्रेय एक विशेष टीम को जाता है। 'ज्ञान भारतम अभियान' के तहत दतिया में पुराना रिकॉर्ड खंगाला जा रहा था। इसी दौरान टीम की नजर इस दुर्लभ कलाकृति पर जाकर पड़ी।
इस काम में पुरातत्व आयुक्त मदनकुमार नागरगोजे ने दतिया के मौजूदा कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े के साथ इस पर चर्चा की थी। इसके बाद विशेषज्ञों ने इसकी बारीकी से जांच शुरू की।
1986 में दान की गई थी पेंटिंग
इस पेंटिंग का इतिहास दतिया के राजपरिवार से जुड़ा हुआ है। साल 1986 में दतिया राज्य म्यूजियम का शानदार उद्घाटन हुआ था। उस समय वहां के पूर्व सांसद महाराजा किशन सिंह जू देव मौजूद थे।
उन्होंने इस अवसर पर कई शाही दस्तावेज और प्राचीन चित्र दान किए थे। यह दुर्लभ पेंटिंग भी उन्हें दान की गई थी। तब से यह म्यूजियम के रिकॉर्ड में सुरक्षित रखी हुई थी।
क्या है तस्वीर की खासियत
पुरातत्व विभाग के वरिष्ठ सलाहकारों के अनुसार किसी ऐतिहासिक महानायक की असली और पुरानी तस्वीर मिलना बहुत बड़ी बात है। यह पेंटिंग रानी लक्ष्मीबाई के जीवन का एक जीवंत प्रमाण है।
इस पेंटिंग में एक खास ऐतिहासिक घटना को बखूबी दिखाया गया है। इसमें रानी लक्ष्मीबाई के बेटे के दत्तक ग्रहण का उत्सव नजर आ रहा है।
मणिकर्णिका से झांसी की रानी बनने का सफर
रानी लक्ष्मीबाई का जन्म 19 नवंबर 1828 को वाराणसी में हुआ था। बचपन में उन्हें सब प्यार से मनु और मणिकर्णिका तांबे बुलाते थे। मनु बचपन से ही शस्त्र कला और घुड़सवारी में बहुत माहिर थीं।
साल 1842 में उनका विवाह झांसी के महाराजा गंगाधर राव से हुआ। इसके बाद उनका नाम लक्ष्मीबाई पड़ा और वे झांसी की रानी बनीं। पति और पुत्र के निधन के बाद उन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था।
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