मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
राशन विक्रेता संघ (Madhya Pradesh Ration Dealers Association ) ने पांच मांगों पर आंदोलन का ऐलान किया है। संघ की मांगें कमीशन, मानदेय, छूट और समय पर भुगतान से संबंधित हैं। आज प्रदेशभर के जिला मुख्यालयों पर विक्रेताओं ने प्रदर्शन किया। भोपाल में विक्रेताओं ने कलेक्ट्रेट का मुख्य गेट बंद कर दिया। 30 सितंबर तक मांगें न मानीं तो 28 हजार दुकानें बंद रहेंगी।
भोपाल कलेक्ट्रेट पर हंगामा
आज यानी 28 सितंबर को भोपाल में भारी संख्या में राशन विक्रेता कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे। उन्होंने जमकर नारेबाजी की। आक्रोशित विक्रेताओं ने कलेक्टर कार्यालय का मुख्य गेट बंद कर दिया। कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
यह प्रदर्शन सिर्फ भोपाल तक सीमित नहीं रहा। प्रदेशभर के जिला मुख्यालयों पर विक्रेताओं ने आवाज उठाई। यह राशन दुकान बंदी (ration shop strike) की चेतावनी का हिस्सा है। यह टकराव अब राजधानी से जिलों तक पहुंच चुका है।
कमीशन 200 रुपए प्रति क्विंटल क्यों?
राशन विक्रेता कमीशन यानी अनाज बांटने पर मिलने वाली रकम। संघ इसे कम से कम 200 रुपए प्रति क्विंटल करना चाहता है। एक क्विंटल में 100 किलो अनाज होता है। इस हिसाब से मांग 2 रुपए प्रति किलो बैठती है।
मान लीजिए दुकान 100 क्विंटल अनाज बांटती है। 200 रुपए के हिसाब से उसे 20,000 रुपए मिलेंगे। संघ का दावा है कि मध्य प्रदेश में कमीशन देश में सबसे कम है। (यह दावा अभी confirm नहीं हुआ है)
40 हजार रुपए मानदेय की मांग क्यों?
दूसरी मांग शहरी और ग्रामीण, सभी विक्रेताओं के लिए है। संघ 40 हजार रुपए महीने का मानदेय या आर्थिक सुरक्षा चाहता है। मानदेय यानी हर महीने मिलने वाली तय रकम।
महीने में 30 दिन गिनें तो यह करीब 1,333 रुपए रोज बैठता है। साल भर में यह 4.8 लाख रुपए होता है।पदाधिकारियों के मुताबिक ग्रामीण दुकानों की हालत सबसे खराब है। वहां वितरण कम होने से आमदनी न के बराबर है। महंगाई के दौर में इतने कम कमीशन से परिवार चलाना मुश्किल हो गया है।सोचिए एक बार। जिस दुकान पर वितरण कम हो, वहां घर कैसे चलेगा?
1 किलो छूट और 5 तारीख का भुगतान
तीसरी मांग नुकसान की भरपाई की है। परिवहन (ढुलाई) और तौल के दौरान नुकसान होता है। संघ चाहता है कि हर क्विंटल पर एक किलो की छूट मिले। यानी 100 किलो पर 1 किलो की राहत।
चौथी मांग भुगतान की तारीख पर है। हर महीने का कमीशन 5 तारीख तक जरूर मिलना चाहिए।
समितियों से समय पर भुगतान क्यों?
पांचवीं मांग सेवा सहकारी समितियों और वन समितियों को लेकर है। ये समितियां (सहकारी संस्थाएं) अपने अधीन विक्रेताओं से काम लेती हैं। संघ चाहता है कि सरकार साफ निर्देश जारी करे। समितियां विक्रेताओं का भुगतान समय पर करें।
30 सितंबर की डेडलाइन का मतलब?
संघ ने सरकार को 30 सितंबर तक का समय दिया है। यानी सरकार के पास सिर्फ दो दिन बचे हैं। मांगें न मानी गईं तो 1 अक्टूबर से वितरण पूरी तरह बंद रहेगा। संघ ने साफ कहा है कि इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी। इसके बाद पूरे प्रदेश में एक साथ ताले लग सकते हैं।
राशन बंद हुआ तो क्या होगा?
उचित मूल्य की दुकान यानी सरकारी राशन दुकान। प्रदेश में ऐसी 28 हजार दुकानें हैं। इन्हीं के जरिए सस्ता अनाज परिवारों तक पहुंचता है। अनिश्चितकाल का मतलब है कि बंदी की आखिरी तारीख तय नहीं है।
कल्पना कीजिए, आप राशन लेने पहुंचे और दुकान पर ताला लटका है। अगर वितरण रुका तो राशन कार्डधारी परिवारों को दिक्कत हो सकती है। सरकार क्या रास्ता निकालेगी? यह आने वाले दो दिन तय करेंगे। सरकार का पक्ष अभी सामने नहीं आया है। जैसे ही सरकार का जवाब आएगा, खबर अपडेट की जाएगी।