रतलाम में ग्रामीणों ने किया पथराव: महिला पुलिसकर्मी घायल, 20 हिरासत में
ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...
- निवेश क्षेत्र के विरोध में पुलिस पर हुआ पथराव।
- पथराव में तीन पुलिसकर्मी घायल, महिला का सिर फूटा।
- पुलिस ने आंसू गैस छोड़कर भीड़ को खदेड़ा।
- सरपंच सहित 20 से ज्यादा ग्रामीण हिरासत में।
- 1700 हेक्टेयर भूमि को लेकर लंबे समय से विरोध।
आमीन हुसैन@RATLAM. मध्य प्रदेश के रतलाम जिले का पलसोड़ी क्षेत्र शुक्रवार को फिर सुर्खियों में आया। रतलाम निवेश क्षेत्र विरोध (Ratlam investment area protest) के बीच भारी बवाल हुआ।
अतिक्रमण हटाने पहुंची प्रशासन और पुलिस टीम पर ग्रामीणों ने पथराव कर दिया। इसमें तीन पुलिसकर्मी घायल हुए, एक महिला पुलिसकर्मी का सिर फूट गया। पुलिस ने आंसू गैस छोड़कर भीड़ खदेड़ी और 20 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया।
पलसोड़ी में भारी बवाल
रतलाम जिले के पलसोड़ी क्षेत्र में शुक्रवार को तनाव फैल गया। रतलाम निवेश क्षेत्र (Ratlam investment area) को लेकर विवाद फिर गहरा गया। अतिक्रमण हटाने प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची थी।
कार्रवाई शुरू होते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण जुट गए। विरोध करते-करते देखते ही देखते माहौल बिगड़ गया। ग्रामीणों और पुलिस के बीच सीधा आमना-सामना हो गया।
पुलिस पर पथराव, 3 घायल
विरोध के बीच कुछ लोगों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। पुलिस पर पथराव (stone pelting on police) में तीन पुलिसकर्मी घायल हो गए। इनमें एक महिला पुलिसकर्मी के सिर में गंभीर चोट आई। घायलों को तुरंत अस्पताल भेजा गया। पत्थरबाजी से मौके पर अफरा-तफरी मच गई। हालात बिगड़ते देख प्रशासन ने सख्ती बरती।
आंसू गैस से खदेड़ा
स्थिति को संभालने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए कदम उठाए। आंसू गैस के गोले (tear gas shells) भी छोड़े गए।
इसके बाद पथराव में शामिल 20 से ज्यादा ग्रामीण हिरासत में लिए गए। घटना के बाद पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया। एसडीएम, तहसीलदार और थाना प्रभारी हालात पर नजर रखते रहे।
1700 हेक्टेयर भूमि विवाद
पलसोड़ी सहित चार-पांच गांवों की जमीन इसमें शामिल है। करीब 1700 हेक्टेयर भूमि (1700 hectare land) प्रस्तावित निवेश क्षेत्र में ली गई है। यह क्षेत्र दिल्ली-मुंबई आठ लेन एक्सप्रेस-वे के पास है।
यहां कई कंपनियां काम शुरू भी कर चुकी हैं। ग्रामीण लंबे समय से इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं। उनका आरोप है कि कृषि और आवासीय जमीन प्रभावित होगी। ग्रामीणों को विस्थापन का डर भी सता रहा है।
100 पुलिसकर्मी रहे तैनात
कार्रवाई के लिए प्रशासन ने पूरी तैयारी की थी। शहर एसडीएम आर्ची हरित और तहसीलदार ऋषभ ठाकुर मौजूद रहे। आरआई विक्की ठाकुर और दस पटवारी भी साथ थे।
पुलिस व्यवस्था की कमान सीएसपी सत्येंद्र घनघोरिया के पास थी। करीब 100 पुलिसकर्मी वज्र वाहन के साथ तैनात थे। मौके पर फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस भी रखी गई थीं। प्रशासन दो पोकलेन, दो जेसीबी और डंपर लेकर पहुंचा था।
अप्रैल में भी हुआ विरोध
रतलाम निवेश क्षेत्र विरोध (Ratlam investment area protest) कोई नया नहीं है। अप्रैल में भी बड़ा प्रदर्शन हो चुका है। आंदोलन को बीएपी, जयस और आदिवासी संगठनों का समर्थन मिला। उस समय सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार भी धरने पर बैठे थे। धरने में कई जनप्रतिनिधि और स्थानीय नेता शामिल हुए थे।
विधायक डोडियार का आरोप
धरने के दौरान बाप विधायक डोडियार ने योजना पर सवाल उठाए थे। उन्होंने इसे आदिवासी परिवारों के विस्थापन की साजिश बताया था। उनका आरोप था कि आदिवासियों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने जरूरत पड़ने पर न्यायालय जाने की बात कही थी। साथ ही यह मुद्दा मुख्यमंत्री के सामने उठाने को कहा था।
प्रशासन और ग्रामीणों का पक्ष
प्रशासन का कहना है कि यह क्षेत्र औद्योगिक विकास के लिए ज़रूरी है। इससे क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। दूसरी ओर ग्रामीणों का दावा है कि उनके घर और खेत छिन जाएंगे।
पहले ग्राम सभा में आपत्ति भी दर्ज कराई गई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी चिंताओं पर कार्रवाई नहीं हुई। इसी टकराव में शुक्रवार की कार्रवाई हिंसक झड़प में बदल गई।
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