कहीं नोटों की माला तो कहीं सोने-चांदी के गहने, रतलाम के महालक्ष्मी मंदिर में ऐसे होता है मां लक्ष्मी का अनोखा श्रृंगार

Arohi Raj | Sootr Creatives | Nov 02, 2026, 17:12 IST
रतलाम का महालक्ष्मी मंदिर दिवाली पर नोटों और सोने-चांदी के गहनों से सजता है।
The Shri Mahalakshmi Temple is located in the Manak Chowk area of Ratlam district in Madhya Pradesh. During the occasions of Diwali and Bhai Dooj, the temple is decorated in a special way.
मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के माणक चौक इलाके में श्री महालक्ष्मी मंदिर है। यहां दिवाली और भैया दूज के मौके पर मंदिर को खास तरीके से सजाया जाता है। इस दौरान मां लक्ष्मी का विशेष श्रृंगार होता है। मंदिर को नोटों, सोने-चांदी और गहनों से सजाया जाता है। इस दौरान दूर-दूर से भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं। बताया जाता है कि भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार धन चढ़ाते हैं।

प्रसाद में मिलते हैं रुपये-पैसे

इस मंदिर की सबसे खास बात इसका प्रसाद है। यहां भक्तों को मिठाई या लड्डू नहीं बांटे जाते। उन्हें प्रसाद के रूप में रुपए-पैसे दिए जाते हैं। भैया दूज के दिन मंदिर में भक्तों की लंबी कतार लगती है। लोग प्रसाद के रूप में रुपए-पैसे लेने पहुंचते हैं। मान्यता है कि भक्त जो धन मां को चढ़ाते हैं, वही उन्हें प्रसाद के रूप में वापस मिलता है। कई भक्त इस पैसे को अपने घर की तिजोरी में रखते हैं, क्योंकि उनका विश्वास है कि इससे घर में बरकत बनी रहती है।



मां लक्ष्मी के साथ विराजमान हैं भगवान कुबेर

महालक्ष्मी मंदिर में मां लक्ष्मी के साथ भगवान कुबेर भी विराजमान हैं। दिवाली के मौके पर दोनों की पूजा की जाती है। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु की भीड़ उमड़ती है। भक्तों का मानना है कि मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा से घर में सुख-समृद्धि आती है। मंदिर से मिला प्रसाद भी वे अपने लिए शुभ मानते हैं।



करीब 300 साल पुरानी है यह परंपरा

खबरों के मुताबिक, मंदिर में धन चढ़ाने और बांटने की परंपरा करीब 300 साल पुरानी बताई जाती है। कहा जाता है कि यह मंदिर रियासत काल से स्थापित है। रतलाम शहर को महाराजा रतन सिंह राठौर ने बसाया था। मान्यता के अनुसार, वे दिवाली और धनतेरस पर मां के दरबार में विशेष श्रृंगार करवाते थे। इसके लिए शाही खजाने से सोने-चांदी और आभूषण चढ़ाए जाते थे। धीरे-धीरे यह परंपरा आगे बढ़ी। बाद में भक्त भी मां के दरबार में धन और गहने चढ़ाने लगे, और चढ़ाए गए रुपए-पैसे भक्तों में प्रसाद के रूप में बांटे जाने लगे। आज भी यह परंपरा जारी है।



ऐसे जा सकते हैं महालक्ष्मी मंदिर

श्री महालक्ष्मी मंदिर मध्य प्रदेश के रतलाम शहर में माणक चौक इलाके में बना है। यहां सड़क, रेल और हवाई मार्ग से पहुंचा जा सकता है।



  • रेल मार्ग: रतलाम जंक्शन मंदिर का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन है। स्टेशन से ऑटो लेकर मंदिर पहुंच सकते हैं।
  • हवाई मार्ग: सबसे नजदीकी एयरपोर्ट इंदौर का देवी अहिल्याबाई होलकर एयरपोर्ट है। इंदौर से रतलाम की दूरी करीब 130 किलोमीटर है।
  • सड़क मार्ग: इंदौर, उज्जैन और भोपाल से बस के जरिए रतलाम पहुंच सकते हैं। शहर पहुंचने के बाद कैब या टैक्सी ली जा सकती है।

यह खबर क्यों जरूरी है

बता दें रतलाम का महालक्ष्मी मंदिर अपनी अनोखी परंपरा के लिए जाना जाता है। यहां दिवाली के बाद रुपये-पैसे प्रसाद के रूप में बांटे जाते हैं, और यही परंपरा हर साल बड़ी संख्या में भक्तों को आकर्षित करती है। धार्मिक परंपराओं की ऐसी जानकारी पाठकों को अपने आसपास की आस्था और परंपरा को समझने में मदद करती है।



FAQs



  1. रतलाम के महालक्ष्मी मंदिर में प्रसाद के रूप में क्या मिलता है?
    यहां भक्तों को मिठाई या लड्डू नहीं, बल्कि प्रसाद के रूप में रुपये-पैसे दिए जाते हैं।
  2. महालक्ष्मी मंदिर की स्थापना का इतिहास क्या है?
    यह मंदिर लगभग 300 साल पुराना है और इसकी परंपरा रियासत काल से चली आ रही है, जब महाराजा रतन सिंह राठौर ने दिवाली और धनतेरस पर मां के दरबार में धन चढ़ाने की परंपरा शुरू की थी।
  3. श्री महालक्ष्मी मंदिर में कैसे पहुंचा जा सकता है?
    मंदिर मध्य प्रदेश के रतलाम शहर में माणक चौक इलाके में स्थित है, और रतलाम जंक्शन रेलवे स्टेशन या इंदौर के देवी अहिल्याबाई होलकर एयरपोर्ट से सड़क, रेल या हवाई मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है।
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