एमपी में बच्चों को बेहतर शिक्षा देना पड़ा भारी, स्कूल किया अच्छा तो थमा दिया नोटिस

Manya Jain | Sootr Creatives | Oct 09, 2026, 12:13 IST
एमपी के रतलाम में शिक्षक को स्कूल सुधार के लिए मिला नोटिस, सवाल- किसकी अनुमति से किया सुधार
एक तरफ जहां देश भर में शिक्षा और सरकारी स्कूलों की खस्ता हालत से जुडी खबरें आती रहती हैं। वहीं दूसरी और एमपी के रतलाम में सरकारी स्कूल के शिक्षक को बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए सजा मिली। दरअसल रतलाम के ज्वारा ब्लॉक में रूपनगर स्कूल को अच्छा बनाने के लिए शिक्षक बद्रीलाल राठौड़ को नोटिस मिला है।

इस नोटिस स्कूल में अच्छा निर्माण, फर्नीचर और फ्री में पढ़ाने की अनुमति पर सवाल किया गया है।



समझें क्या है पूरा मामला

  • रतलाम के जावरा ब्लॉक का रूपनगर स्कूल आदर्श स्कूल माना गया।
  • जन भागीदारी से स्कूल संवारने वाले शिक्षक का ट्रांसफर हो गया।
  • रिपोर्ट के मुताबिक उन्हें निर्माण और सुविधाओं पर कारण बताओ नोटिस मिला।
  • जिला शिक्षा अधिकारी ने रिनोवेशन के लिए नोटिस जारी होने से इनकार किया।
  • स्कूल में अब बच्चों की संख्या घट गई है।

जावरा आदर्श स्कूल कैसे बना रूपनगर?

रिपोर्ट के मुताबिक, रूपनगर स्कूल जावरा मीडिया में खबरें आने के बाद चर्चा में आया। बद्रीलाल राठौड़ और शिक्षक-पालक संघ ने मिलकर लोगों की मदद से स्कूल को आदर्श स्कूल बनाया।



रतलाम के ज्वारा का आदर्श मॉडल स्कूल

स्कूल की सुविधाओं का असर ऐसा हुआ कि गांव के सभी बच्चे प्राइवेट स्कूलों में नहीं जाते थे। स्कूल में हरियाली, साफ-सफाई और पढ़ाई के लिए अच्छा माहौल था। यहां अच्छे फर्नीचर, पानी का फिल्टर और कूलर जैसी सुविधाएं भी थीं। इन सुविधाओं का इंतजाम जन भागीदारी और शिक्षक ने अपने खर्च से किया था।



मध्य प्रदेश में शिक्षक का ट्रांसफर और विरोध

रिपोर्ट के मुताबिक, दो महीने पहले शिक्षक का ट्रांसफर सेमलिया के सरकारी प्राथमिक स्कूल में हुआ था। अपने पसंदीदा शिक्षक का ट्रांसफर रुकवाने के लिए बच्चे और गांव के लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे और विरोध किया। लेकिन शिक्षक का ट्रांसफर नहीं रुका। इसके बाद धीरे-धीरे स्कूल में बच्चों की संख्या कम होने लगी।



रतलाम के ज्वारा का आदर्श मॉडल स्कूल

नोटिस में क्या पूछा गया?

रिपोर्ट के मुताबिक जिला शिक्षा अधिकारी के नोटिस में निर्माण कार्य पर सवाल है। रंग रोगन, फर्नीचर, वाटर कूलर और अन्य कामों के बारे में पूछा गया है। नोटिस में जानना चाहा गया कि ये काम किसकी स्वीकृति से हुए।



बाउंड्री वॉल, चित्रकारी और अन्य सामग्री की व्यवस्था पर भी सवाल है। यह भी पूछा गया कि किस प्रशासनिक आदेश से ये हुए। निशुल्क सेवा देने वाले तीन शिक्षकों की अनुमति पर भी कारण पूछा गया है।



रिटायर्ड नारकोटिक्स इंस्पेक्टर को भी रोका

रिटायर्ड नारकोटिक्स इंस्पेक्टर जगदीश यादव स्कूल में बच्चों को मुफ्त पढ़ा रहे थे, लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने उन्हें भी पढ़ाने से रोक दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, अब स्कूल में केवल दो ही शिक्षक पदस्थ हैं।



शिक्षक बद्रीलाल राठौर ने बताया कि उन्होंने नोटिस का जवाब समय पर दे दिया था। फिलहाल वे सेमलिया के प्राथमिक विद्यालय में पदस्थ हैं। उनका कहना है कि रूपनगर स्कूल में हुए सभी काम ग्रामीणों और शिक्षक पालक संघ की मदद से किए गए।



राठौर के मुताबिक, शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत शिक्षक पालक संघ को कई अधिकार मिले हैं। संघ स्कूल में नए प्रयोग कर सकता है, विकास की योजना बना सकता है और लोगों की मदद से फर्नीचर, खेल सामग्री और पढ़ाई से जुड़ी दूसरी चीजें जुटा सकता है।



रिवॉर्ड की जगह नोटिस, उठा सवाल

यादव रूपनगर स्कूल में निशुल्क सेवा देते रहे हैं। उनका कहना है कि शिक्षक का सम्मान होना चाहिए था। रिपोर्ट के मुताबिक रिवॉर्ड देने की बजाय नोटिस मिला।



शिक्षा विभाग का पक्ष क्या है?

रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारी ने फोन पर यही बात कही। उन्होंने कार्यालय से जानकारी लेकर वास्तविक स्थिति बताने की बात भी कही। इसके बाद उन्होंने दोबारा फोन नहीं उठाया।



स्कूल का हाल अब कैसा है?

बताया जा रहा है कि महज तीन महीने में जावरा मॉडल स्कूल की व्यवस्था बिगड़ने लगी है। अब यह स्कूल भी आम सरकारी स्कूलों जैसा हो गया है। यहां बच्चों की संख्या भी कम होने लगी है। ऐसे में शिक्षा विभाग और जिला शिक्षा अधिकारी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।



जिस स्कूल से पूरा गांव जुड़ा हुआ था, आज उसकी हालत बदल गई है। मध्यप्रदेश में शिक्षकों के तबादलों से जुड़े ऐसे मामले क्या संकेत देते हैं? रतलाम के इस शिक्षक और स्कूल की कहानी पर अब शिक्षा विभाग के जवाब का इंतजार है।



यह खबर क्यों जरूरी है

सरकारी स्कूलों की खराब हालत की खबरें लगातार सामने आती हैं। रूपनगर का उदाहरण अलग था, जहां गांव के बच्चे सरकारी स्कूल में ही पढ़ते थे। जन भागीदारी और शिक्षक के खर्च से स्कूल बेहतर बना। अब वहां बच्चों की संख्या घट गई है। ऐसे मामलों में पारदर्शी नियम और संवाद जरूरी हैं। अच्छे काम के लिए भी स्पष्ट प्रक्रिया होनी चाहिए। शिक्षक और विभाग, दोनों का पक्ष सामने आना जरूरी है।



FAQ

  1. रूपनगर स्कूल में शिक्षक बद्रीलाल राठौड़ को ट्रांसफर करने का कारण क्या है?
    शिक्षक बद्रीलाल राठौड़ का ट्रांसफर सिमलिया के सरकारी प्राथमिक स्कूल में किया गया, जिसके बाद उन्हें स्कूल में अच्छे निर्माण और सुविधाओं के लिए कारण बताओ नोटिस मिला है।
  2. रूपनगर स्कूल को आदर्श स्कूल बनाने में किसका योगदान रहा?
    रूपनगर स्कूल को आदर्श स्कूल बनाने में शिक्षक बद्रीलाल राठौड़ और शिक्षक-पालक संघ ने मिलकर ग्रामीणों से मदद लेकर महत्वपूर्ण योगदान दिया।
  3. क्या जिला शिक्षा अधिकारी ने ट्रांसफर और नोटिस के संबंध में कोई आधिकारिक बयान दिया है?
    जिला शिक्षा अधिकारी सिमरन सूर्यवंशी ने यह स्पष्ट किया है कि शिक्षक को रिनोवेशन कार्य करवाने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया गया है, और उन्होंने वास्तविक स्थिति बताने का आश्वासन भी दिया।
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