रिटायर्ड खनिज अधिकारी संजय लुणावत, पीएस पोरवाल, डायरेक्टर नोबल, कलेक्टर के खिलाफ पहुंचे कोर्ट
इसके साथ ही, इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा और स्थापना शाखा के डिप्टी कलेक्टर को भी पक्षकार बनाया है।
लुणावत ने इनके खिलाफ लगाई याचिका
लुणावत ने अपनी अवमानना याचिका में चार अधिकारियों को पक्षकार बनाया है। इनमें खनिज विभाग के प्रमुख सचिव आईएएस विवेक पोरवाल शामिल हैं। विभाग के डायरेक्टर आईएएस फ्रैंक नोबल का नाम भी है। इंदौर कलेक्टर आईएएस शिवम वर्मा को भी पक्षकार बनाया गया है। इनके अलावा डिप्टी कलेक्टर अलका वामनकर का नाम भी शामिल है। अलका इंदौर कलेक्टोरेट में पदस्थ हैं। हाईकोर्ट ने चारों अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने सभी से चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।
क्यों लगाई याचिका
लुणावत ने इस बार अपनी पेंशन को लेकर हाईकोर्ट में याचिका लगाई है। इससे पहले भी वे इसी मामले में कोर्ट जा चुके हैं। अक्टूबर 2025 में हाईकोर्ट ने उनकी याचिका पर आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि लुणावत की पेंशन नहीं रोकी जा सकती। उन्हें जल्द से जल्द अस्थायी पेंशन दी जाए।
उस समय लुणावत के वकील ने कोर्ट को बताया था कि वे 20 दिसंबर 2024 को वीआरएस ले चुके हैं। तब वे इंदौर कलेक्टोरेट में सहायक खनिज अधिकारी के पद पर थे। इसके बावजूद उन्हें मध्यप्रदेश सिविल सेवा पेंशन नियम 1976 के तहत अस्थायी पेंशन नहीं दी गई।
इस पर हाईकोर्ट ने साफ कहा था कि सिर्फ आपराधिक मामला लंबित होने से पेंशन नहीं रोकी जा सकती। कोर्ट ने अधिकारियों को पेंशन से जुड़ी प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश दिए थे। यह आदेश जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की बेंच ने दिया था।
लेकिन पेंशन का निराकरण नहीं हुआ
वहीं, हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी लुणावत की पेंशन का मामला नहीं सुलझा है। इससे परेशान होकर वे एक बार फिर हाईकोर्ट पहुंच गए हैं। उन्होंने कोर्ट के आदेश का पालन नहीं होने पर अवमानना याचिका दायर की है। इसमें संबंधित सभी अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है।
रतलाम में दर्ज केस के चलते अटका मामला
दरअसल लुणावत के खिलाफ रतलाम में एक महिला से जुड़ा आपराधिक मामला दर्ज है। इसी आधार पर मध्यप्रदेश सरकार ने उनकी पेंशन रोक दी थी। इस पर हाईकोर्ट ने साफ कहा था कि सिर्फ आपराधिक मामला दर्ज होने से पेंशन नहीं रोकी जा सकती। कोर्ट ने बकाया पेंशन के मामले में भी जल्द फैसला लेने के निर्देश दिए थे।