रीवा में पुजारी ने भाजपा विधायक नरेंद्र प्रजापति पर लगाए आरोप, कहा- 11 हजार रुपए दक्षिणा तय थी, मिले सिर्फ 500 रुपए
भाजपा विधायक का दक्षिणा विवाद
दरअसल मुंबा देवी मंदिर रीवा में पूजा कराने वाले पुजारी अखिलेश पांडे का एक वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में पुजारी ने अपना दर्द बयां किया है। उन्होंने कहा कि नवरात्रि में मंदिर में पूजा संपन्न कराने के लिए 11 हजार रुपए की दक्षिणा तय की गई थी।
पुजारी अखिलेश पांडे का आरोप है कि पूरी पूजा खत्म होने के बाद उन्हें हाथ में केवल 500 रुपए थमा दिए गए। उन्होंने यह भी दावा किया कि पूजा में शामिल दूसरे पुजारी को पूरी राशि दी गई, लेकिन उनके साथ भेदभाव किया गया। इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग अपनी अलग-अलग राय रख रहे हैं।
मुख्य आचार्य बोले- 9 दिनों तक रोज दिए गए 500
इस पूरे मामले के तूल पकड़ने के बाद मंदिर प्रबंधन और मुख्य आचार्य ने सामने आकर स्थिति साफ की है। मुंबा देवी मंदिर के मुख्य आचार्य पंडित संजीव उर्मालिया ने बताया कि पुजारी के आरोप सही नहीं हैं।
मुख्य आचार्य के अनुसार...
- विधायक नरेंद्र प्रजापति की तरफ से संबंधित पुजारी को हर दिन पूजा के बाद 500 रुपए दिए गए थे।
- इस तरह 9 दिनों के दौरान पुजारी को कुल 4 हजार 500 रुपए की राशि दी गई थी।
- उन्होंने यह भी कहा कि नवरात्रि का पूरा धार्मिक कार्यक्रम बेहद धूमधाम और पूरी आस्था के साथ पूरा हुआ था।
विधायक की छवि खराब करने की साजिश
मामले पर विष्णु देव कुशवाहा ने भी विधायक नरेंद्र प्रजापति का मजबूती से पक्ष रखा है। उन्होंने कहा कि यह सब विधायक की छवि को समाज में धूमिल करने का एक षड्यंत्र है। उनका कहना है कि नवरात्रि के दौरान विधायक रोज ब्राह्मण पूजन करते थे। साथ ही रीति-रिवाज के मुताबिक सम्मान के साथ प्रतिदिन 500 रुपए की भेंट देते थे।
वहीं बीजेपी विधायक नरेंद्र प्रजापति (BJP MLA Narendra Prajapati) की ओर से इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए निराधार बताया है। अब इस मामले में दो अलग-अलग बातें सामने आ रही हैं। एक तरफ पुजारी का 11 हजार तय होने और 500 रुपए मिलने का दावा है। दूसरी तरफ रोज 500 देकर कुल 4 हजार 500 रुपए देने की बात कही जा रही है।
FAQ
1. बीजेपी विधायक नरेंद्र प्रजापति पर पुजारी ने क्या आरोप लगाया है?
पुजारी अखिलेश पांडे का आरोप है कि नवरात्रि पूजा के लिए 11 हजार रुपए की दक्षिणा तय हुई थी, लेकिन पूजा खत्म होने के बाद उन्हें केवल 500 रुपए दिए गए और दूसरे पुजारी के मुकाबले उनके साथ भेदभाव किया गया।