रीवा में परमाणु बिजलीघर का विरोध, जल सत्याग्रह कर रही आदिवासी महिला विमला कोल की मौत, पति ने पूछा-क्या प्रशासन मेरी पत्नी लौटा सकता है?
उन्हें मनगवां के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। गुरुवार को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
परमाणु बिजलीघर का विरोध क्यों?
परमाणु बिजलीघर में परमाणु ऊर्जा से बिजली बनाई जाती है। रीवा के सरई कला और रोझौही गांवों के लोग इसका विरोध कर रहे हैं। ग्रामीणों को डर है कि इससे जमीन, पानी और स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है।
उनका कहना है कि परियोजना का असर आसपास के इलाकों पर भी पड़ सकता है। हालांकि, परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव का कोई तकनीकी आकलन उपलब्ध जानकारी में नहीं है। इसलिए फिलहाल इन बातों को ग्रामीणों की आशंका के तौर पर देखना जरूरी है।
ग्रामीणों को सबसे ज्यादा चिंता जमीन और पानी को लेकर है। उन्हें स्वास्थ्य पर पड़ने वाले संभावित असर की भी चिंता है। इन्हीं चिंताओं के चलते ग्रामीण इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं। विमला कोल भी शुरुआत से इस आंदोलन में शामिल थीं।
अक्टूबर में रोकी गईं बोरिंग मशीनें
अक्टूबर में जमीन की जांच के लिए बोरिंग मशीनें पहुंची थीं। बोरिंग में जमीन के अंदर खुदाई करके जांच की जाती है। ग्रामीणों ने इन मशीनों को रोक दिया था। इसके बाद जल सत्याग्रह शुरू किया गया।
इसमें प्रदर्शनकारी पानी में उतरकर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताते हैं।
रीवा जल सत्याग्रह में क्या हुआ?
रीवा में ग्रामीण तालाब में उतरकर परमाणु बिजलीघर का विरोध कर रहे थे। विमला कोल भी चार दिन से इस प्रदर्शन में शामिल थीं। बुधवार रात अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें मनगवां के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां गुरुवार को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। उसी दिन दोपहर में उनका अंतिम संस्कार किया गया। हालांकि, उनकी तबीयत किस वजह से बिगड़ी, यह साफ नहीं है।
पति ने पूछा: क्या पत्नी लौटेगी?
"मेरा सब कुछ बर्बाद हो गया। क्या प्रशासन मेरी पत्नी लौटा सकता है? क्या उसे जिंदा कर सकता है?"
— जमुना कोल, विमला कोल के पति
गुरुवार दोपहर जमुना कोल ने अपनी पत्नी को मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार के बाद उन्होंने प्रशासन से सवाल किया। जमुना कोल ने बताया कि विमला शुरुआत से परियोजना का विरोध कर रही थीं।
रीवा कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी का जवाब
रीवा कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने मामले में जांच की बात कही है। उनके मुताबिक जांच के बाद ही मौत के कारणों पर कुछ कहा जा सकेगा।
यानी प्रशासन ने अभी विमला की मौत का कोई निश्चित कारण नहीं बताया है। विधायक नरेंद्र प्रजापति और कलेक्टर ने ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की है। इसके बावजूद ग्रामीणों का विरोध जारी है।
जमीन अभी आवंटित नहीं हुई
प्रशासन के मुताबिक, परमाणु बिजलीघर के लिए अभी जमीन आवंटित नहीं हुई है। फिलहाल, प्रस्तावित जगह की उपयुक्तता की जांच की जा रही है।
इसमें जमीन और तकनीकी पहलुओं को परखा जा रहा है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 28 हजार करोड़ रुपए बताई गई है।
यानी इसकी लागत 280 अरब रुपए होने का अनुमान है। फिलहाल, परियोजना प्रस्तावित है और जगह की जांच जारी है।
घटनाक्रम एक नजर में
अक्टूबर में ग्रामीणों ने जांच के लिए आई बोरिंग मशीनें रोक दी थीं। इसके बाद तालाब में जल सत्याग्रह शुरू हो गया। विमला कोल पिछले चार दिनों से इस प्रदर्शन में शामिल थीं। बुधवार रात अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई।
इसके बाद उन्हें मनगवां के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। गुरुवार को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। उसी दिन दोपहर में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
विमला की मौत के बाद भी विरोध जारी रहने की जानकारी है। हालांकि, उनकी मौत की असली वजह जांच के बाद ही पता चलेगी। उपलब्ध जानकारी में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का जिक्र नहीं है। इसलिए फिलहाल उनकी मौत को आंदोलन से जोड़ना सही नहीं होगा।
FAQ
- रीवा में परमाणु बिजलीघर का विरोध क्यों हो रहा है?
सरई कला और रोझौही के ग्रामीण प्रस्तावित परमाणु बिजलीघर का विरोध कर रहे हैं। उन्हें जमीन, पानी और स्वास्थ्य पर असर पड़ने की आशंका है। प्रशासन के मुताबिक अभी परियोजना के लिए जमीन आवंटित नहीं हुई है। - जल सत्याग्रह में शामिल विमला कोल की मौत कैसे हुई?
विमला कोल पिछले चार दिन से जल सत्याग्रह में शामिल थीं। बुधवार रात उनकी तबीयत बिगड़ गई, और गुरुवार को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। मौत का वास्तविक कारण अभी स्पष्ट नहीं है। - रीवा कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने क्या कहा?
कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने मामले की जांच के बाद स्थिति स्पष्ट करने की बात कही है। प्रशासन के मुताबिक परियोजना के लिए फिलहाल जमीन आवंटित नहीं हुई है।