रीवा परमाणु प्रोजेक्ट का विरोध: ग्रामीण बोले-लाड़ली बहना और फ्री राशन योजना बंद कर दो, लेकिन जमीन नहीं देंगे

Sanjay Dhiman | Sootr Creatives | Oct 07, 2026, 19:24 IST
रीवा टाटा परमाणु एनर्जी प्रोजेक्ट का विरोध: ग्रामीण ने कहा सरकारी योजनाएं बंद कर दो, लेकिन जमीन नहीं देंगे
मध्य प्रदेश के रीवा जिले में प्रस्तावित टाटा पावर परमाणु ऊर्जा परियोजना को लेकर विरोध बढ़ रहा है। सिरमौर क्षेत्र के रोझौही और सरई कलां गांवों में ग्रामीण जमीन सर्वेक्षण से नाराज हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजनाएं बंद होना उन्हें मंजूर है। मगर खेती, घर और पुश्तैनी जमीन छोड़ना उनके लिए संभव नहीं है। परियोजना की लागत करीब 28 हजार करोड़ बताई गई है।

रीवा के सिरमौर इलाके में एक नया विवाद लगातार गहराता दिखाई देता है। मामला प्रस्तावित टाटा परमाणु ऊर्जा परियोजना और उससे जुड़ी जमीन का है। रोझौही और सरई कलां के ग्रामीण इसका खुलकर विरोध कर रहे हैं। ग्रामीणों को अपनी खेती, मकान और भविष्य खत्म होने की चिंता है। उनका कहना है कि पहले सरकार परियोजना की पूरी तस्वीर सामने रखे।



रोझौही के ग्रामीणों ने लाड़ली बहना और मुफ्त राशन का जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि सुविधाएं चली जाएं, मगर उनकी जमीन सुरक्षित रहनी चाहिए।



28 हजार करोड़ की परियोजना को लेकर आखिर दावा क्या है?

स्थानीय जानकारी में परियोजना की लागत 28 हजार करोड़ से अधिक बताई गई। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने भी परियोजना को अभी विचाराधीन बताया है। उन्होंने कहा कि परियोजना रीवा के औद्योगिक विकास के लिए प्रस्तावित है। उनके मुताबिक स्वीकृति से पहले सभी निर्धारित नियमों का पालन होगा।



हालांकि परियोजना की अंतिम मंजूरी और तकनीकी स्वरूप स्पष्ट होना बाकी है। इसीलिए इसे स्वीकृत निर्माणाधीन परमाणु बिजलीघर कहना अभी सही नहीं होगा। निर्माण से पहले कई केंद्रीय स्तर की मंजूरियां जरूरी होती हैं। इनमें पर्यावरण, जमीन और परमाणु सुरक्षा से संबंधित प्रक्रियाएं शामिल हैं।




करीब 200 एकड़ जमीन की चर्चा से क्यों बढ़ी बेचैनी?

ग्रामीणों के बीच करीब 200 एकड़ जमीन की चर्चा चल रही है। हालांकि अंतिम भूमि जरूरत का स्पष्ट सरकारी दस्तावेज सामने आना जरूरी है। ग्रामीण चाहते हैं कि सरकार गांववार जमीन की जानकारी सार्वजनिक करे। साथ ही प्रभावित परिवारों की संख्या भी पहले स्पष्ट की जानी चाहिए।



इस बीच इलाके में जमीन जांचने के लिए ड्रिलिंग मशीनें पहुंची थीं। ग्रामीणों के विरोध के बाद मशीनों को वापस लौटाने की जानकारी है। स्थानीय लोगों के अनुसार आठ स्थानों पर जांच की तैयारी थी। कुछ स्थानों पर गहरी ड्रिलिंग करके मिट्टी जांचने की योजना थी।



ग्रामसभा में विरोध हुआ तो फिर सर्वे क्यों, ग्रामीणों का सवाल

रोझौही के सरपंच कोमल सिंह ने ग्रामसभा की आपत्ति का जिक्र किया। उनके मुताबिक ग्रामसभा में प्रस्तावित परियोजना का विरोध दर्ज किया गया। इसी वजह से बाद की गतिविधियों पर ग्रामीण ज्यादा नाराज हुए हैं।



ग्रामीण अमित वैश्य ने सहमति नहीं लेने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जमीन जांचने से पहले मालिकों को बताया जाए। किस जमीन पर क्या गतिविधि होगी, इसकी जानकारी पहले मिलनी चाहिए।




ग्रामीणों के प्रशासन से कई सवाल

  1. कितनी जमीन ली जाएगी और किन गांवों से जमीन आएगी?
  2. कितने मकान हटेंगे और कितने परिवार सीधे प्रभावित हो सकते हैं?
  3. किसानों को मुआवजा मिलेगा या दूसरी जगह जमीन उपलब्ध कराई जाएगी?
  4. पुनर्वास होगा तो उसका पूरा मॉडल आखिर किस तरह लागू होगा?

इन सवालों के स्पष्ट जवाब मिलने तक विरोध जारी रहने की संभावना है।



छह साल मेहनत करके बनाया मकान, अब उजड़ने का डर

विरोध के पीछे केवल खेत और जमीन का मुद्दा नहीं है। कई परिवार अपने छोटे मकानों को लेकर भी परेशान दिखाई देते हैं। कुछ मकान प्रधानमंत्री आवास योजना की मदद से तैयार हुए हैं। कई लोगों ने मजदूरी की कमाई जोड़कर अपने घर बनाए हैं।



ग्रामीण ममता प्रजापति ने भी अपनी परेशानी सामने रखी है। उनके मुताबिक परिवार पहले कच्चे मकान में मुश्किल से रहता था। परिवार रोजाना मजदूरी करके थोड़ी रकम बचाने की कोशिश करता था।



उन्होंने करीब छह साल में अपना पक्का घर तैयार किया है। अब परियोजना की चर्चा ने उनके परिवार की चिंता बढ़ाई है। उन्हें डर है कि जमीन अधिग्रहण हुआ तो मकान प्रभावित होगा।




जमीन के साथ पानी को लेकर भी ग्रामीणों की चिंता

रीवा परमाणु परियोजना विवाद में पानी भी महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। इलाके में तमसा और महाना सहित कई स्थानीय जलस्रोत मौजूद हैं। खेती और घरेलू जरूरतों के लिए ग्रामीण इन्हीं स्रोतों पर निर्भर हैं।



परमाणु बिजली परियोजनाओं में पानी की जरूरत महत्वपूर्ण विषय रहती है। कितना पानी लगेगा, इसका फैसला परियोजना डिजाइन पर निर्भर करेगा। इसलिए प्रस्तावित रीवा परियोजना की तकनीकी रिपोर्ट बेहद महत्वपूर्ण होगी।



ग्रामीण चाहते हैं कि पानी से संबंधित अध्ययन भी सार्वजनिक किया जाए। उनकी मांग है कि पर्यावरण प्रभाव की जानकारी आसान भाषा में मिले। पानी, खेती और स्थानीय पर्यावरण पर असर स्पष्ट बताया जाना चाहिए।



राजेंद्र शुक्ल बोले, परियोजना अभी विचाराधीन है

उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने परियोजना पर सरकार का पक्ष रखा है। उन्होंने साफ कहा कि परियोजना फिलहाल विचाराधीन स्थिति में ही है। उनके मुताबिक यह रीवा के औद्योगिक विकास से जुड़ा प्रस्ताव है। उन्होंने इसकी लागत 28 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा बताई है।



उन्होंने यह भी कहा कि सभी जरूरी नियमों का पालन होगा। परियोजना को मंजूरी मिलने से पहले निर्धारित प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी।




हाईकोर्ट जाने की तैयारी, कानूनी लड़ाई का भी संकेत

सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी कानूनी विकल्प पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल करने की बात कही है। जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट जाने की बात भी कही गई।



उनके अनुसार रेडिएशन और पर्यावरण संबंधी सवालों की जांच जरूरी है। वे पानी और भविष्य की पीढ़ियों से जुड़े सवाल उठा रहे हैं। हालांकि अदालत जाने की तैयारी और याचिका दाखिल होना अलग बातें हैं। याचिका दाखिल होने पर ही न्यायिक कार्यवाही की स्थिति स्पष्ट होगी।



परमाणु परियोजना को किन मंजूरियों की जरूरत पड़ सकती है?

  1. भारत में परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं की प्रक्रिया सामान्य उद्योगों जैसी नहीं होती।
  2. इन परियोजनाओं पर कई स्तर की सुरक्षा और पर्यावरण जांच होती है।
  3. परमाणु सुरक्षा के लिए AERB(Atomic Energy Regulatory Board) की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रहती है।
  4. पर्यावरणीय मंजूरी में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की प्रक्रिया लागू होती है।
  5. परियोजना स्थल की तकनीकी जांच भी विस्तार से जांची जाती है।
  6. भूकंपीय जोखिम, पानी और जनसंख्या जैसे पहलू देखे जा सकते हैं।

ग्रामीणों को भी इन्हीं प्रक्रियाओं की स्पष्ट जानकारी मिलनी जरूरी है।



मध्य प्रदेश में चुटका परमाणु परियोजना भी लंबे समय से प्रस्तावित

मध्य प्रदेश में फिलहाल चालू परमाणु बिजलीघर होने की पुष्टि जरूरी है। राज्य में चुटका परमाणु परियोजना पहले से प्रस्तावित परियोजनाओं में शामिल है। यह मंडला जिले में स्थापित किए जाने की योजना से जुड़ी है।



चुटका परियोजना में 700 मेगावॉट क्षमता की दो इकाइयां प्रस्तावित रही हैं। इसका कुल प्रस्तावित उत्पादन करीब 1400 मेगावॉट बताया जाता रहा है। यह परियोजना भी लंबे समय से विभिन्न प्रक्रियाओं से गुजरती रही है।



Rewa Tata Nuclear Power Project पर अब आगे क्या?

रीवा में अगला सबसे महत्वपूर्ण कदम आधिकारिक दस्तावेजों का सामने आना होगा। सरकार को प्रस्तावित जमीन और प्रभावित गांवों की स्थिति स्पष्ट करनी होगी। परियोजना की एजेंसी और कंपनी की भूमिका भी साफ होनी चाहिए।



Rewa Nuclear Plant Protest फिलहाल ग्रामीणों की आशंकाओं पर केंद्रित है। Madhya Pradesh Nuclear Project को लेकर तकनीकी जानकारी अभी महत्वपूर्ण होगी। ग्रामीणों को भी आधिकारिक रिपोर्ट के आधार पर सवाल रखने का मौका मिलेगा। अभी सबसे जरूरी बात दावों और स्वीकृत तथ्यों को अलग रखना है।



  1. रीवा में प्रस्तावित टाटा परमाणु ऊर्जा परियोजना का मुख्य विवाद क्या है?
    रीवा के सिरमौर इलाके में प्रस्तावित टाटा परमाणु ऊर्जा परियोजना का मुख्य विवाद किसानों और स्थानीय ग्रामीणों द्वारा जमीन के अधिग्रहण का विरोध है। उन्हें अपनी खेती, मकान और भविष्य को लेकर चिंताएँ हैं।
  2. ग्रामीणों की मांगें क्या हैं इस परियोजना को लेकर?
    ग्रामीणों की प्रमुख मांग है कि सरकार गांववार जमीन और प्रभावित परिवारों की संख्या की जानकारी सार्वजनिक करे। वे यह भी चाहते हैं कि उन्हें मुआवजा और पुनर्वास के मॉडल के बारे में स्पष्ट जानकारी दी जाए।
  3. क्या इस परियोजना की औपचारिक मंजूरी मिल चुकी है?
    उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के अनुसार, यह परियोजना फिलहाल विचाराधीन है और इसकी मंजूरी के लिए कई प्रक्रियाएँ पूरी की जानी हैं। इसकी अंतिम मंजूरी अभी बाकी है।
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