पाठ्य पुस्तक निगम गोदाम से करोड़ों की किताबें गायब, शिक्षा विभाग में हड़कंप

Sanjay Dhiman | Jul 20, 2026, 16:29 IST
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रीवा के पाठ्य पुस्तक निगम गोदाम से 1 करोड़ रुपए से अधिक कीमत की 35-36 लाख सरकारी किताबें गायब हो गई हैं। ब्लैक मार्केटिंग के इस मामले में चोरहटा थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है। भोपाल से आई विशेष टीम और पुलिस कर्मचारियों से पूछताछ कर जांच में जुटी है।

रीवा के पाठ्य पुस्तक निगम गोदाम से बड़ी तादाद में किताबें गायब हैं। करीब 450 बंडल किताबें नहीं मिल रही हैं। इनमें लगभग 35 से 36 लाख किताबें बताई जा रही हैं। इनकी कीमत एक करोड़ रुपए से ज्यादा आंकी गई है। मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई गई है।



गोदाम से गायब हुई किताबें

रीवा जिले में पाठ्य पुस्तक निगम का गोदाम है। यहां सरकारी स्कूलों के लिए किताबें रखी जाती हैं। हाल ही में पता चला कि यहां से भारी मात्रा में किताबें गायब हो गई हैं। अधिकारियों के मुताबिक करीब 450 बंडल किताबें मौजूद नहीं हैं। एक अनुमान के अनुसार इनमें 35 से 36 लाख किताबें शामिल हैं।



इतनी बड़ी संख्या में किताबों को ले जाने के लिए कम से कम दो ट्रक चाहिए होंगे। विभाग का मानना है कि इनकी कीमत एक करोड़ रुपए से ज्यादा है। यह खबर सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है।



पुलिस में शिकायत दर्ज

विभाग ने इस मामले में चोरहटा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि किताबें कब और कैसे गोदाम से बाहर गईं। इसके साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि इसमें कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।



भोपाल से पहुंची जांच टीम

रीवा पाठ्यपुस्तक निगम के संचालक भोपाल में रहते हैं। उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन सदस्यों की एक टीम रीवा भेजी है। यह टीम गोदाम पहुंच गई है और जांच में जुट गई है। टीम गोदाम में रखी किताबों को व्यवस्थित तरीके से मिलान कर रही है।



टीम का मुख्य काम यह पता लगाना है कि असल में कितनी किताबें गायब हुई हैं। इसके साथ ही यह भी आंका जाएगा कि इनकी कुल कीमत कितनी बनती है। रिपोर्ट आने के बाद ही पूरी तस्वीर साफ होगी।



कर्मचारियों पर शक, बच्चों तक नहीं पहुंचीं किताबें

पाठ्य पुस्तक निगम का काम बच्चों के लिए किताबें छापना और उन्हें स्कूलों तक पहुंचाना है। लेकिन इस मामले में यह किताबें बच्चों तक पहुंचने के बजाय बाजार में बिकने के लिए चली गईं। विभाग को शक है कि गोदाम में काम करने वाले कुछ कर्मचारी इसमें शामिल हो सकते हैं। पुलिस ने इन कर्मचारियों से पूछताछ शुरू कर दी है।



ऐसे हुई ब्लैक मार्केटिंग की पहचान

अधिकारियों के मुताबिक सरकारी किताबों को बाजार में बेचने का यह तरीका ब्लैक मार्केटिंग है। गोदाम में काम करने वाले कुछ लोग छोटी रकम के बदले किताबों के बंडल दुकानदारों को बेच देते हैं। इसके बाद दुकानदार इन किताबों को बेचकर अच्छा मुनाफा कमाते हैं।



विभाग को इस गड़बड़ी की जानकारी तब मिली, जब पता चला कि गोदाम में रखे जाने वाले किताबों के बंडल दुकानों पर पहुंच गए हैं। इन बंडलों पर एक क्यूआर कोड (QR Code – Quick Response Code) लगा होता है। यह कोड प्रशासन की ओर से ही जारी किया जाता है। इसी कोड की मदद से अधिकारियों को असली गड़बड़ी का पता चला।



अब पुलिस और शिक्षा विभाग दोनों मिलकर यह पता लगाने में जुटे हैं कि यह खेल कब से चल रहा था। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि इसमें कितने लोग शामिल हैं। जांच पूरी होने के बाद दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।



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