रीवा में रिश्वत लेते पकड़ा गया प्रभारी मुख्य अभियंता, कैमरे में कैद हुआ पूरा खेल
रीवा में लोकायुक्त पुलिस ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। लोक निर्माण विभाग संभाग रीवा के प्रभारी मुख्य अभियंता कैलाश कुमार लच्छे को 50 हजार रुपए रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया। उनके साथ बाहरी सहयोगी धर्मवीर भारती को भी गिरफ्तार किया गया।
यह कार्रवाई मंगलवार को हुई। ट्रैप सिविल लाइन स्थित अटल पार्क के सामने किया गया। यह जगह आरोपी के शासकीय आवास के पास है। कार्रवाई पूरी होने के बाद दोनों आरोपियों को जमानत पर रिहा कर दिया गया।
हर महीने मांगा जा रहा था लाखों रुपया
शिकायतकर्ता का नाम सोनू सिंह है। वे सतना जिले की टेस्टिंग लैब प्राइवेट लिमिटेड में मैनेजर हैं। उनकी फर्म पीडब्ल्यूडी (PWD – Public Works Department) के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता जांचती है। आरोप है कि मुख्य अभियंता काम के बदले हर महीने एक लाख रुपए मांग रहे थे।
लगातार मांग से परेशान होकर सोनू सिंह ने शिकायत करने का फैसला किया। उन्होंने 4 अगस्त 2026 को लोकायुक्त कार्यालय रीवा में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद जांच टीम ने पूरा मामला सत्यापित किया।
शिकायत के सत्यापन के दौरान ही ली गई पहली किश्त
शिकायत सत्यापन के दौरान ही आरोपी ने पहला खेल कर दिया। उसने साथी धर्मवीर भारती के जरिए शिकायतकर्ता से 50 हजार रुपए पहले ही ले लिए थे। इससे लोकायुक्त टीम को मामले की पुष्टि मिल गई।
पुष्टि होने के बाद टीम ने पूरा जाल बिछाया। दूसरी किश्त की तैयारी की गई। इसी किश्त के दौरान दोनों आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ने की योजना बनाई गई।
दूसरी किश्त लेते ही दबोचे गए दोनों आरोपी
उप पुलिस अधीक्षक (DSP – Deputy Superintendent of Police) प्रवीण सिंह परिहार और निरीक्षक संदीप सिंह भदौरिया के नेतृत्व में टीम बनाई गई। जैसे ही शिकायतकर्ता से दूसरी किश्त के 50 हजार रुपए लिए गए, टीम ने तुरंत कार्रवाई कर दी। दोनों आरोपी मौके पर ही पकड़े गए।
गिरफ्तार मुख्य अभियंता का पूरा नाम कैलाश कुमार लच्छे है। उनके पिता का नाम हरिचरण लच्छे है। उनकी उम्र 59 वर्ष है। वे भोपाल के न्यू मिनाल रेजिडेंसी में रहते हैं।
उनका मूल पद कार्यपालन यंत्री, पीडब्ल्यूडी जिला रीवा है। फिलहाल वे प्रभारी मुख्य अभियंता के तौर पर काम कर रहे थे। दूसरे आरोपी धर्मवीर भारती के पिता स्वर्गीय टीपी भारती हैं। उनकी उम्र भी 59 वर्ष है। वे विदिशा के रामायणी सिटी में रहते हैं।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज
दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया गया है। मौके से जब्त की गई 50 हजार रुपए की रकम को सबूत के तौर पर रखा गया है।
लोकायुक्त टीम अब इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है। यह देखना अहम होगा कि जांच में और कौन से नाम सामने आते हैं। सरकारी विभागों में इस तरह की शिकायतें अक्सर सामने आती रहती हैं।
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि सरकारी ठेकों में भ्रष्टाचार कितना गहरा है। एक छोटी सी फर्म के मैनेजर की हिम्मत ने बड़े अफसर की पोल खोल दी। लोकायुक्त की कार्रवाई आम लोगों के लिए उम्मीद जगाती है।
यह खबरें भी पढ़ें...
आईपीएस राहुल बंसल पर 1 करोड़ रिश्वत लेने का आरोप, CBI कोर्ट ने DGP को दिया नोटिस
आंगनबाड़ी भर्ती में रिश्वतखोरी! छतरपुर के महिला बाल विकास अधिकारी सस्पेंड
रतलाम में पदोन्नति के नाम पर रिश्वत का आरोप, BJP सांसद प्रतिनिधि के खिलाफ शिकायत
रिटायरमेंट से एक दिन पहले AE रिश्वत लेते गिरफ्तार, ग्वालियर लोकायुक्त की कार्रवाई