भोपाल, जबलपुर और उज्जैन को मिलेगी टेक्निकल यूनिवर्सिटी, मोहन कैबिनेट में लग सकती है मुहर

Amresh Kushwaha | Sept 01, 2026, 10:12 IST
मोहन कैबिनेट बैठक आज
मध्यप्रदेश के RGPV को तीन हिस्सों में बांटा जाएगा। भोपाल, जबलपुर और उज्जैन में अलग तकनीकी यूनिवर्सिटी बनेंगी। इसका प्रस्ताव आज मोहन कैबिनेट बैठक में रखा जाएगा। बैठक में डेयरी विकास योजना और सड़क चौड़ीकरण जैसे प्रस्तावों पर भी चर्चा होगी।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मध्यप्रदेश में RGPV को तीन हिस्सों में बांटा जाएगा।
  • भोपाल, जबलपुर और उज्जैन में अलग यूनिवर्सिटी बनेंगी।
  • यह प्रस्ताव आज मोहन कैबिनेट बैठक में रखा जाएगा।
  • मेडिकल यूनिवर्सिटी का बंटवारा पहले ही मंजूर हो चुका है।
  • बैठक में डेयरी विकास योजना पर भी फैसला संभव है।

आज दोपहर होगी अहम बैठक

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आज दोपहर 12:15 बजे मंत्रालय में कैबिनेट की बैठक होगी। इस बैठक में प्रदेश के विकास से जुड़े कई बड़े फैसलों पर चर्चा हो सकती है। राजधानी के शहरी यातायात का दबाव कम करने वाले एक प्रस्ताव की पुनरीक्षित लागत पर भी मुहर लग सकती है।



इसके अलावा एक अहम नियुक्ति पर भी फैसला संभव है। सेवानिवृत्त IPS अधिकारी ए. साईं मनोहर को मुख्यमंत्री का सलाहकार नियुक्त करने का प्रस्ताव भी बैठक में रखा जा सकता है। इस पर अंतिम निर्णय होने की उम्मीद है।



RGPV का होगा तीन हिस्सों में बंटवारा

मध्यप्रदेश की तकनीकी शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। प्रदेश का राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय यानी RGPV (Rajiv Gandhi Proudyogiki Vishwavidyalaya) अब तीन भागों में बांटा जाएगा। मोहन यादव सरकार मध्य भारत, महाकौशल और मालवा रीजन के लिए अलग अलग प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय बनाने जा रही है।



इसका प्रस्ताव आज यानी मंगलवार, 01 सितंबर को होने वाली कैबिनेट बैठक में रखा जाएगा। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है तो प्रदेश में कुल तीन प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय हो जाएंगे। यह फैसला तकनीकी शिक्षा को और बेहतर बनाने के मकसद से लिया जा रहा है।



किस शहर में बनेगी कौन सी यूनिवर्सिटी

तकनीकी शिक्षा विभाग ने इस प्रस्ताव का पूरा खाका तैयार कर लिया है। भोपाल का मौजूदा RGPV अब मध्य भारत प्रांत का विश्वविद्यालय बन जाएगा। इसमें भोपाल, नर्मदापुरम, ग्वालियर और चंबल संभाग शामिल होंगे। जबलपुर में महाकौशल विश्वविद्यालय का मुख्यालय बनाया जाएगा। इसमें रीवा, शहडोल, जबलपुर और सागर संभाग को जोड़ा जाएगा।



वहीं उज्जैन में मालवा क्षेत्र के लिए यूनिवर्सिटी बनेगी। इसमें इंदौर और उज्जैन संभाग शामिल होंगे। इस तरह पूरे प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेज तीन अलग अलग यूनिवर्सिटी के अंतर्गत आ जाएंगे। इससे हर क्षेत्र के छात्रों को अपने नजदीकी विश्वविद्यालय से जुड़ने का मौका मिलेगा।



45 सूत्रीय एजेंडे से निकला था फैसला

यह फैसला अचानक नहीं लिया गया है। सरकार ने अपने दो साल का कार्यकाल पूरा होने पर एक खास बैठक की थी। इस बैठक में 45 सूत्रीय विशेष एजेंडे पर चर्चा हुई थी। उसी बैठक में प्रदेश की मेडिकल और इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी को तीन भागों में बांटने का निर्णय लिया गया था।



इसके बाद पिछली कैबिनेट बैठक में जबलपुर स्थित मेडिकल यूनिवर्सिटी को विभाजित करने का फैसला हो चुका है। अब इसी कड़ी में इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी के विभाजन का प्रस्ताव लाया जा रहा है। सरकार का मानना है कि इससे तकनीकी शिक्षा का प्रबंधन आसान होगा।



डेयरी विकास योजना पर भी होगी चर्चा

आज की कैबिनेट बैठक में सिर्फ शिक्षा से जुड़ा मामला ही नहीं आएगा। पशुपालन विभाग की डेयरी विकास योजना से जुड़ा प्रस्ताव भी बैठक में रखा जाएगा। इसमें नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड यानी NDDB (National Dairy Development Board) का जिक्र होगा।



सरकार के स्टेट कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन के साथ NDDB का एक एमओयू हो चुका है। इस एमओयू को आगे बढ़ाने के लिए योजना को मंजूरी दी जाएगी। इस योजना का मकसद प्रदेश में डेयरी क्षेत्र का विकास करना है। साथ ही दुग्ध उत्पादन से जुड़ी व्यवस्थाओं को भी मजबूत किया जाएगा। इससे प्रदेश के किसानों और पशुपालकों को सीधा फायदा मिल सकता है।



सड़क परियोजना पर भी चर्चा संभव

बैठक में एक अहम सड़क परियोजना पर भी बात हो सकती है। मालथोन-बीना मार्ग के चौड़ीकरण और विकास से जुड़ा प्रस्ताव भी एजेंडे में शामिल है। इस पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। सरकार का फोकस प्रदेश के अलग अलग हिस्सों में सड़क कनेक्टिविटी बेहतर करने पर भी है।



कुल मिलाकर आज की कैबिनेट बैठक प्रदेश के लिए कई मायनों में अहम मानी जा रही है। शिक्षा, डेयरी विकास और सड़क जैसे अलग अलग क्षेत्रों से जुड़े फैसले एक साथ लिए जा सकते हैं।



यह खबर क्यों जरूरी है

यह खबर जनता के लिए जरूरी है क्योंकि इसका सीधा असर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के भविष्य पर पड़ता है। तकनीकी शिक्षा का विकेंद्रीकरण होने से हर क्षेत्र के छात्रों को बराबर मौका मिलेगा, जो संविधान के समानता के सिद्धांत के अनुरूप है।



सरकारी फैसलों की जानकारी जनता तक पहुंचना पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए जरूरी है। डेयरी विकास योजना जैसे फैसले सीधे किसानों और पशुपालकों के आर्थिक हितों से जुड़े हैं। इसलिए कैबिनेट के हर फैसले पर नजर रखना नागरिकों के हित में है।



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