RGPV का कुलगुरु बनने 70 से ज्यादा कतार में, प्रबंधन ने अबतक नहीं बना पाया सर्च कमेटी
News in Short :
- 70 आवेदन आए, कुलगुरु की नियुक्ति के लिए प्रक्रिया रुकी हुई है।
- सर्च कमेटी के गठन में देरी, यूजीसी और लोकभवन से मंजूरी का इंतजार।
- प्रोफेसर त्रिपाठी ने नवंबर में इस्तीफा दिया था, तब से कुलगुरु पद खाली।
- गुजरात विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति नवीन सेठ का नाम भेजा गया है।
- आवेदकों ने देरी पर सवाल उठाए, राजधानी भोपाल से दिल्ली तक लॉबिंग जारी है।
Intro
BHOPAL.राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) में कुलगुरु की नियुक्ति के लिए 70 आवेदन प्राप्त हुए हैं। हालांकि, सर्च कमेटी का गठन नहीं हो सका है, जिसके कारण आवेदनों की स्क्रूटनी प्रक्रिया अटकी हुई है। इस देरी के कारण आवेदक सवाल उठा रहे हैं। यूजीसी और लोकभवन से सदस्यों के मनोनयन में देरी हो रही है, जिससे प्रक्रिया में और समय लग सकता है। प्रो.राजीव त्रिपाठी के इस्तीफे के बाद विश्वविद्यालय कुलगुरु के बिना ही चल रहा है। अब, सर्च कमेटी का गठन होते ही स्क्रूटनी प्रक्रिया शुरू होगी।
News in Detail :
राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) में कुलगुरु की नियुक्ति के लिए आवेदन किए गए हैं, लेकिन अब तक सर्च कमेटी का गठन नहीं हो सका है। सर्च कमेटी के गठन की प्रक्रिया में देरी के कारण विश्वविद्यालय में कुलगुरु के पद पर नियुक्ति में अड़चनें आ रही हैं। यूजीसी और लोकभवन से सदस्यों की मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है। इस देरी के कारण विश्वविद्यालय प्रशासन और आवेदकों के बीच असंतोष और सवाल उठने लगे हैं। प्रोफेसर राजीव त्रिपाठी ने नवंबर 2025 में इस्तीफा दिया था, तब से विश्वविद्यालय बिना कुलगुरु के चल रहा है।
सर्च कमेटी का गठन में हो रही देरी :
सर्च कमेटी का गठन अभी तक नहीं हो पाया है, जबकि 70 आवेदन विश्वविद्यालय प्रशासन में पहुंच चुके हैं। इसके गठन के लिए यूजीसी से सदस्य की मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है। एक बार सदस्य भेजे जाने के बाद, लोकभवन सर्च कमेटी का गठन करेगा और फिर आवेदनों की स्क्रूटनी शुरू की जाएगी।
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कुलगुरु पद के उम्मीदवार उठा रहे सवाल :
राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलगुरु पद के लिए देशभर से 70 उम्मीदवारों ने आवेदन किया है। इनमें प्रोफेसर, नॉन-टेक्निकल कोर्स के शिक्षक और कुलगुरु तक के उम्मीदवार शामिल हैं। इन आवेदनकर्ताओं में भोपाल के अलावा अन्य प्रदेशों के भी उम्मीदवार हैं, जो इस प्रतिष्ठित पद की ओर देख रहे हैं।
एसएसआर विवाद पर दिया था इस्तीफा :
पूर्व कुलगुरु प्रोफेसर राजीव त्रिपाठी ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए नवंबर 2025 में इस्तीफा दे दिया था। उनका इस्तीफा एनएएसी की सेल्फ स्टडी रिपोर्ट को लेकर विवादों से जुड़ा था। उनके इस्तीफे के बाद से विश्वविद्यालय बिना कुलगुरु के कार्य कर रहा है, जो इसकी प्रबंधन प्रणाली पर असर डाल रहा है।
आवेदनों को है स्क्रूटनी का इंतजार :
सर्च कमेटी का गठन नहीं हो पाने के कारण नियुक्ति की प्रक्रिया लंबी हो गई है। यूजीसी और लोकभवन से सदस्य की मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है। जैसे ही सदस्य का नाम यूजीसी से प्राप्त होगा, सर्च कमेटी का गठन होगा और फिर आवेदनों की जांच प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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