फर्जी बीमा–रजिस्ट्रेशन केस में रोहित खटवानी की अग्रिम जमानत खारिज, अब EOW की कार्रवाई पर निगाहें

Neel Tiwari | Apr 24, 2026, 16:57 IST
Photograph: (THESOOTR)
JABALPUR. रोहित खटवानी की अग्रिम जमानत हाईकोर्ट से खारिज हो गई है। वहीं, EOW की कार्रवाई पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। फर्जी बीमा-रजिस्ट्रेशन घोटाले में अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई।

News in short

  • हाईकोर्ट ने रोहित खटवानी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की।
  • EOW जांच में फर्जी दस्तावेज और धोखाधड़ी के आरोप सिद्ध।
  • जिला अदालत पहले ही जमानत खारिज कर चुकी थी।
  • बार-बार सुनवाई टालने पर हाईकोर्ट ने जताई थी नाराजगी।
  • अब भी गिरफ्तारी नहीं होने पर EOW की भूमिका पर सवाल।

News in detail

फर्जी बीमा और वाहन रजिस्ट्रेशन घोटाले में आरोपी रोहित खटवानी को हाईकोर्ट से भी झटका लगा है। निचली अदालत के बाद अब हाईकोर्ट ने भी उसकी अग्रिम जमानत खारिज कर दी है। EOW की जांच में आरोप सिद्ध होने के बावजूद गिरफ्तारी न होने पर एजेंसी की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।



हाईकोर्ट से भी अग्रिम जमानत खारिज

फर्जी बीमा और वाहन रजिस्ट्रेशन घोटाले में आरोपी रोहित खटवानी को आखिरकार हाईकोर्ट से भी राहत नहीं मिली। पहले जिला अदालत से अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद उसने हाईकोर्ट का रुख किया था, लेकिन यहां भी उसकी याचिका खारिज कर दी गई।



सुनवाई के दौरान बार-बार समय मांगकर मामले को टालने की कोशिश की गई, जिस पर कोर्ट पहले ही नाराजगी जता चुका था। आखिरकार जब कोई ठोस आधार प्रस्तुत नहीं किया जा सका तो अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया, लेकिन आरोप सिद्ध होने के बाद और जमानत खारिज होने के बाद भी उसकी गिरफ्तारी न होना पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर रहा है।



rohit khatwani


मौत के बाद खुला फर्जी बीमा का खेल

यह मामला तब सामने आया जब एक दुर्घटना में मृत व्यक्ति के वाहन के बीमा दस्तावेज फर्जी पाए गए। जांच में सामने आया कि वाहन की वास्तविक बिक्री 23 अक्टूबर 2019 को हुई थी, लेकिन बाद में 4 नवंबर 2019 की कूटरचित इनवॉइस तैयार कर रजिस्ट्रेशन कराया गया। इस हेराफेरी के कारण मृतक के परिवार को बीमा का लाभ नहीं मिल सका, जबकि पूरी राशि पहले ही जमा कर दी गई थी।



EOW की जांच में बड़ा खुलासा

आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की विस्तृत जांच में यह साबित हुआ कि फर्जी इनवॉइस, बीमा और रजिस्ट्रेशन दस्तावेज खटवानी के शोरूम के कंप्यूटर और प्रिंटर से ही तैयार किए गए थे।



CFSL की फॉरेंसिक रिपोर्ट में एक्सेल और वर्ड फाइलों के जरिए डेटा में बदलाव और एडिटिंग के प्रमाण मिले। जांच में यह भी सामने आया कि कर्मचारियों के फर्जी हस्ताक्षर कर दस्तावेज तैयार किए गए और कई ग्राहकों के साथ इसी तरह की धोखाधड़ी की गई।



सरकारी राजस्व की चोरी

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि वाहन बिक्री की तारीखों में हेराफेरी कर RTO में टैक्स जमा करने में देरी दिखाई गई, जिससे 10% अधिभार से बचा जा सके।



यह केवल एक मामला नहीं था, बल्कि अन्य ग्राहकों के मामलों में भी इसी तरह का पैटर्न पाया गया। इससे यह स्पष्ट हो गया कि यह कोई साधारण गलती नहीं, बल्कि सुनियोजित और संगठित फर्जीवाड़ा था।



गिरफ्तारी नहीं होने से एजेंसी पर सवाल

EOW ने जांच पूरी कर चार्जशीट कोर्ट में पेश कर दी और आरोपी को दोषी भी पाया, लेकिन इसके बावजूद उसकी गिरफ्तारी नहीं की गई। जबकि कानूनी रूप से संज्ञेय अपराध में FIR के बाद ही गिरफ्तारी की जा सकती थी। अब हाईकोर्ट से भी जमानत खारिज होने के बाद सवाल और गहरा गया है कि आखिर EOW किस बात का इंतजार कर रही है।



राजनीतिक संरक्षण और सिस्टम पर सवाल

इस मामले में आरोपी की सार्वजनिक मंचों पर जनप्रतिनिधियों के साथ मौजूदगी पहले ही विवाद का कारण बन चुकी है। इससे यह चर्चा और तेज हो गई है कि कहीं न कहीं आरोपी को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है।



अब जब हाईकोर्ट से भी राहत नहीं मिली है, तो यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या EOW कार्रवाई करते हुए गिरफ्तारी करेगी या फिर आरोपी को दोबारा कानूनी रास्ते तलाशने की खुली छूट मिलती रहेगी।



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