EOW जांच में दोषी पाए गए रोहित खटवानी के शोरूम के ई व्हीकल की लॉन्चिंग में केक काटते नजर आए महापौर, गरमाया मामला
News in short
- EOW जांच में रोहित खटवानी पर फर्जी दस्तावेज बनाने के आरोप सिद्ध हुए।
- जिला अदालत से अग्रिम जमानत पहले ही खारिज, हाईकोर्ट में मामला लंबित है।
- सुनवाई में बार-बार आरोपी पक्ष द्वारा समय मांगा जा रहा है।
- शोरूम के कार्यक्रम में महापौर की मौजूदगी से चर्चाएं बढ़ गई है।
- कोर्ट ने भी सुनवाई टालने पर नाराजगी जताई, अगली तारीख 27 अप्रैल तय की गई है।
News in detail
फर्जी बीमा और रजिस्ट्रेशन घोटाले में EOW की जांच में दोषी पाए गए रोहित खटवानी की हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत लंबित है, लेकिन गिरफ्तारी अब तक नहीं हुई।
इसी बीच खटवानी के शोरूम में एक कार्यक्रम आयोजित हुआ।इसमें जबलपुर के महापौर जगत बहादुर अन्नू की मौजूदगी ने पूरे मामले को नया राजनीतिक रंग दे दिया है। अब सवाल सिर्फ धोखाधड़ी का नहीं, बल्कि सिस्टम, रसूख और संरक्षण का भी बन गया है।
EOW की जांच में दोषी, फिर भी गिरफ्तारी से दूर
जबलपुर के चर्चित फर्जी बीमा और वाहन रजिस्ट्रेशन मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की जांच में रोहित खटवानी को दोषी पाया जा चुका है। फॉरेंसिक जांच में एक और बात स्पष्ट हुई। फर्जी इनवॉइस, बीमा और रजिस्ट्रेशन दस्तावेज उसी की कंपनी के कंप्यूटर और प्रिंटर से तैयार किए गए थे।
इसके बावजूद न तो आरोपी की गिरफ्तारी हुई और न ही उसके खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई दिखाई दे रही है। इससे EOW की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
हाईकोर्ट में तारीख पर तारीख, खुद आरोपी ले रहा समय
रोहित खटवानी की अग्रिम जमानत याचिका हाईकोर्ट में लंबित है। यह लंबित कोर्ट की व्यस्तता के कारण नहीं, बल्कि बार-बार आरोपी पक्ष द्वारा समय मांगे जाने के कारण है। 25 मार्च 2026 को जब मामला जस्टिस संदीप एन. भट्ट की अदालत में सूची के शीर्ष पर लगा, तब भी आरोपी के अधिवक्ता ने समय मांग लिया।
इस पर कोर्ट ने अपने आदेश में टिप्पणी की। कहा कि बार-बार सुनवाई टालने से यह प्रतीत होता है कि आवेदक स्वयं मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहता। इसके बाद अदालत ने अगली सुनवाई 27 अप्रैल 2026 तय कर दी।
लॉन्चिंग सेरिमनी में महापौर की मौजूदगी ने बढ़ाई चर्चाएं
इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक सबसे चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। आरोपी रोहित खटवानी के शोरूम में लॉन्चिंग सेरिमनी आयोजित हुई। इसमें जबलपुर के महापौर जगत बहादुर अन्नू केक काटते और इलेक्ट्रिक व्हीकल का उद्घाटन करते नजर आए।
एक ओर जहां आरोपी की जमानत याचिका कोर्ट में लंबित है। वहीं दूसरी ओर जनप्रतिनिधि के साथ उसकी नजदीकियां अब चर्चा का विषय बन गई हैं।
रसूख और संरक्षण की चर्चाएं तेज
राजनीतिक मंच पर दिखाई गई इस नजदीकी ने यह संकेत भी दिया है कि आरोपी के प्रभाव और संपर्क मजबूत हैं। जानकारों का मानना है कि यही कारण है कि EOW की जांच में दोषी पाए जाने और जिला अदालत से जमानत खारिज होने के बावजूद आरोपी को गिरफ्तारी का कोई भय नहीं दिख रहा। विभाग के भीतर भी यह चर्चा तेज है कि आखिर ऐसा कौन सा दबाव है, जिसके चलते कार्रवाई आगे नहीं बढ़ रही।
सवालों के घेरे में जांच एजेंसी की भूमिका
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा हो रहा है कि जब जांच एजेंसी खुद आरोपी को दोषी सिद्ध कर चुकी है, तो फिर कार्रवाई में इतनी ढिलाई क्यों। आमतौर पर अग्रिम जमानत मामलों में आरोपी जल्द सुनवाई चाहता है। देखा जाए तो यहां उल्टा हो रहा है।
आरोपी खुद समय ले रहा है और जांच एजेंसी भी सख्ती नहीं दिखा रही। ऐसे में यह मामला अब केवल एक आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि सिस्टम की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर भी बड़ा सवाल बनता जा रहा है।
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