सत्ता के संरक्षण में आरोपी! फर्जी बीमा घोटाले में घिरे रोहित खटवानी के साथ मंच साझा करते दिखे मंत्री
News In Short
- EOW जांच में रोहित खटवानी और उसके सहयोगियों पर आरोप सिद्ध हुए।
- लोअर कोर्ट से खटवानी की अग्रिम जमानत खारिज दी है।
- आरोपी मंत्री और महापौर के साथ सार्वजनिक कार्यक्रमों में दिखा है।
- चार्जशीट के बाद भी गिरफ्तारी नहीं हुई। एजेंसी पर भी मिलीभगत के आरोप लगे हैं।
- रोहित खटवानी बाहर रहकर गवाहों और साक्ष्यों को प्रभावित कर सकता है।
News In Detail
रोहित खटवानी फर्जी बीमा और वाहन रजिस्ट्रेशन घोटाले में EOW की जांच में दोषी पाए गए थे। खटवानी को लेकर अब मामला और ज्यादा गंभीर हो गया है। जिला अदालत से उसकी अग्रिम जमानत खारिज होने के बावजूद गिरफ्तारी नहीं हुई है।
इस बीच मंत्री के साथ मंच साझा करने की तस्वीरें सामने आई हैं। अब सवाल उठ रहा है कि क्या राजनीतिक संरक्षण के चलते कार्रवाई ठंडी पड़ गई है?
मंत्री के साथ मंच पर आरोपी, तस्वीरों ने खड़े किए सवाल
जबलपुर में फर्जी बीमा और वाहन रजिस्ट्रेशन घोटाले के रोहित खटवानी आरोपी साबित हुए हैं। हैरानी की बात है कि आरोप सिद्ध होने के बाद भी ईओडब्ल्यू खटवानी को गिरफ्तार नहीं कर रही है।
आरोपी खुलेआम सोशल मीडिया पर अपने राजनीतिक रसूख का दिखावा कर रहा है। एक ई-स्कूटर शोरूम के उद्घाटन कार्यक्रम में मध्य प्रदेश सरकार के पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह उसके साथ दीप प्रज्वलन करते नजर आए।
यह महज औपचारिक उपस्थिति नहीं थी, बल्कि कार्यक्रम के दौरान खटवानी लगातार मंत्री के साथ मौजूद रहा था। इससे पहले भी शहर के महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू उसके शोरूम के कार्यक्रम में शामिल हो चुके हैं। ऐसे में अब आरोपी के राजनीतिक संबंधों और रसूख को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
क्या था मामला: मौत के बाद खुला फर्जी बीमा का खेल
यह पूरा मामला तब सामने आया जब किशोर नायडू नामक व्यक्ति की सड़क दुर्घटना में मौत के बाद उसके वाहन के बीमा दस्तावेज फर्जी पाए गए। जांच में सामने आया कि वाहन की वास्तविक बिक्री 23 अक्टूबर 2019 को हुई थी। बाद में रजिस्ट्रेशन के लिए 4 नवंबर 2019 की कूटरचित इनवॉइस तैयार की गई थी।
इससे मृतक के परिवार को बीमा लाभ नहीं मिल सका था। यही नहीं जांच में यह भी पाया गया कि एक ही वाहन के लिए अलग-अलग दस्तावेज तैयार किए गए और तारीखों में जानबूझकर हेराफेरी की गई थी।
फर्जीवाड़े का पूरा सिस्टम उजागर
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की जांच में रोहित खटवानी और उसके मैनेजर अनिरुद्ध प्रताप सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी और कूटरचना के पुख्ता सबूत मिले हैं।
फॉरेंसिक जांच के लिए जब्त की गई हार्ड डिस्क को CFSL भेजा गया था। इससे यह सामने आया कि ‘Madan Mahal Invoice 19-20.xlsx’ जैसी फाइलों के जरिए वाहन की जानकारी और तारीखों को बदला जा सकता था।
इसके अलावा इंश्योरेंस के एडिटेबल वर्ड फॉर्मेट भी मिले जिनका उपयोग फर्जी बीमा दस्तावेज बनाने में किया जाता था। जांच में यह भी सामने आया कि कर्मचारियों के फर्जी हस्ताक्षर कर दस्तावेज तैयार किए गए थे।
सरकारी राजस्व की भी चोरी
EOW ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया कि, बिक्री की तारीख बदलकर RTO में टैक्स जमा करने में देरी दिखाई गई जिससे 10% अधिभार से बचा जा सके।
यह केवल एक केस नहीं था बल्कि रानी मिश्रा समेत अन्य ग्राहकों के मामलों में भी इसी तरह की गड़बड़ी पाई गई थी। इससे यह साफ हो गया कि यह एक संगठित और सुनियोजित धोखाधड़ी थी।
चार्जशीट के बाद भी नहीं हुई गिरफ्तारी
EOW ने जांच पूरी कर चार्जशीट कोर्ट में पेश कर दी और आरोपियों को उपस्थित होने का नोटिस भी दिया गया। हैरत की बात है कि रोहित खटवानी कोर्ट में पेश ही नहीं हुआ। इसके बावजूद उसकी गिरफ्तारी नहीं की गई।
जबकि कानूनी रूप से संज्ञेय अपराध में FIR के बाद ही गिरफ्तारी की जा सकती थी। लोअर कोर्ट ने अग्रिम जमानत खारिज कर दी, फिर भी आरोपी खुलेआम घूम रहा है और हाईकोर्ट में तारीख पर तारीख ले रहा है।
हाईकोर्ट में तारीखों का खेल
हाईकोर्ट में दायर अग्रिम जमानत याचिका में बार-बार समय मांगा जा रहा है। 25 मार्च 2026 को जब मामला सूची में सबसे ऊपर लगा, तब भी आरोपी के अधिवक्ता ने समय मांग लिया था।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि इससे यह प्रतीत होता है कि, आवेदक खुद मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहता। इसके बाद अगली सुनवाई 27 अप्रैल 2026 तय की गई है। इस दौरान EOW ने आरोपी को खुली छूट दे रखी है कि वह बाहर रहकर साक्ष्यों और गवाहों को प्रभावित कर सकता है।
EOW द्वारा तुरंत की जानी चाहिए आरोपी की गिरफ्तारी
इस मामले में द सूत्र ने कानूनी राय लेने के लिए अधिवक्ता मोहित वर्मा से बात की। उन्होंने बताया कि FIR दर्ज होने के बाद ही रोहित खटवानी की तुरंत गिरफ्तारी की जानी थी। हालांकि जांच में आरोप सिद्ध होने के बाद और चार्ज शीट पेश किए जाने के बाद भी गिरफ्तारी न करने का तो कोई कारण ही नहीं बनता।
उन्होंने बताया कि EOW को आरोपी को तुरंत गिरफ्तार करना चाहिए। जब हमने उनसे पूछा कि EOW की ओर से या बहाना बनाया जाता है कि उनके पास लॉकअप नहीं है।
इस पर अधिवक्ता ने बताया कि आरोपी को गिरफ्तार कर जज के सामने पेश करने के बाद ज्यूडिशल कस्टडी की मांग की जा सकती है। इसके बाद ईओडब्ल्यू को यदि कोई पूछताछ करनी होगी, तो वह जेल जाकर आरोपी से पूछताछ करेंगे।
EOW के द्वारा आरोपी को गिरफ्तार न करने को उन्होंने सीधे-सीधे कानून का उल्लंघन और आरोपी से मिली भगत होना बताया है। उन्होंने बताया कि हाल ही में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिसमें लोकायुक्तियां या ईओडब्ल्यू जैसी एजेंसियों ने आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भिजवाया है।
रोहित खटवानी के मामले में ऐसा न होने पर यह साफ नजर आ रहा है कि ईओडब्ल्यू के ऊपर दबाव है। अधिवक्ता ने यह भी कहा कि जब आरोपी को सजा ही नहीं दिलानी है, तो फिर EOW द्वारा FIR और जांच करने की कवायत ही क्यों की जाती है।
EOW के अस्तित्व पर खड़ा सवाल
पूरे मामले ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब जांच एजेंसी खुद आरोपी को दोषी सिद्ध कर चुकी है। उसकी अग्रिम जमानत खारिज हो चुकी है। फिर आखिर उसे गिरफ्तार क्यों नहीं किया जा रहा।
जांच में आरोप सिद्ध होने के बाद भी आरोपी खुलेआम घूमेगा तो EOW जैसी एजेंसी के अस्तित्व में होने का फायदा ही क्या है।
मंत्री और जनप्रतिनिधियों के साथ आरोपी की नजदीकियां, लोअर कोर्ट से अग्रिम जमानत खारिज होना और गिरफ्तारी न होना, ये सभी इस ओर इशारा करते हैं कि कहीं न कहीं सिस्टम दबाव में है।
इस पूरे दबाव का फायदा आरोपी को मिलेगा। वह पूरी जांच को प्रभावित करेगा। अब यह मामला केवल एक आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि प्रशासनिक इच्छाशक्ति और न्याय व्यवस्था की साख का मुद्दा बन चुका है।
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