तबादलों पर हाईकोर्ट सख्त; कहा, कई आदेशों के बाद भी हो रहे ट्रांसफर
समझें क्या है पूरा मामला...
- ग्राम रोजगार सहायकों के तबादलों को लेकर हाईकोर्ट में विवाद है।
- सरकार इस पद को स्थानांतरण योग्य मानती है।
- याचिकाकर्ता ने इसे गैर-स्थानांतरण योग्य पद बताया है।
- कई मामलों में तबादलों पर पहले भी रोक लगी है।
- अब कोर्ट ने विभाग से व्हाइट पेपर और हलफनामा मांगा है।
जबलपुर हाईकोर्ट में ग्राम रोजगार सहायकों के तबादलों का मामला पहुंचा है। इस मामले में अदालत ने अब सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने विभाग से तबादलों की पूरी जानकारी मांगी है। साथ ही पूरी प्रक्रिया को लेकर व्हाइट पेपर मांगा है।
मामला डब्ल्यूपी संख्या 35727/2026 से जुड़ा है। याचिका अश्विनी कुमार गुप्ता ने दाखिल की है। मध्यप्रदेश शासन और अन्य इसमें पक्षकार बनाए गए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से आर्यन उरमलिया ने पैरवी की। राज्य की ओर से श्वेता यादव अदालत में पेश हुईं।
रोजगार सहायकों के तबादले पर क्या है विवाद?
विवाद ग्राम रोजगार सहायक के पद की प्रकृति पर है। सरकार की नीति इसे स्थानांतरण योग्य पद मानती है। याचिकाकर्ता की ओर से इसका विरोध किया गया है। वकील ने इसे गैर-स्थानांतरण योग्य पद बताया है।
इसी सवाल को लेकर पहले भी याचिकाएं दाखिल हुई हैं। अलग-अलग मामलों में अदालत ने तबादलों पर रोक लगाई। कुछ मामलों में इन आदेशों को चुनौती भी दी गई। इससे तबादलों को लेकर कानूनी स्थिति उलझती गई।
अब हाईकोर्ट ने विभाग से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। अदालत जानना चाहती है कि तबादले कैसे किए जा रहे हैं। साथ ही इनके पीछे लागू नियम भी सामने रखने होंगे।
पुराने फैसलों ने तबादलों के विवाद को कैसे बढ़ाया?
सुनवाई में राज्य की ओर से डब्ल्यूए 55/2026 का हवाला दिया गया। इस मामले में आदेश 6 फरवरी 2026 को आया था।।उस आदेश में रिट अपील खारिज कर दी गई थी। राज्य ने इसी आदेश को अपने पक्ष में रखा।
इसके बाद भी कई नए मामले अदालत पहुंचे। इन मामलों में तबादला आदेशों पर रोक लगाई गई। यानी अलग मामलों में अदालत के सामने अलग स्थिति बनी। इसी वजह से अब पूरे मामले की जांच जरूरी हुई।
याचिकाकर्ता के वकील ने एक दूसरे फैसले का हवाला दिया। उन्होंने डब्ल्यूए 2279/2026 का उल्लेख किया। यह मामला सिपतलाल भलावी बनाम मध्यप्रदेश राज्य से जुड़ा है। इसमें आदेश 13 जुलाई 2026 को पारित हुआ था। उस मामले में तबादला आदेश पर रोक लगाई गई थी।
अब पंचायत विभाग से मांगा व्हाइट पेपर
जस्टिस विवेक कुमार सिंह ने मामले पर विचार जरूरी माना। अदालत ने पंचायत विभाग से विस्तृत जानकारी मांगी है। इसके लिए व्हाइट पेपर पेश करने का निर्देश दिया है। इसमें रोजगार सहायकों के तबादलों की पूरी जानकारी होगी।
अदालत ने सिर्फ सामान्य जवाब देने की बात नहीं कही। विभाग को तबादलों की प्रक्रिया भी बतानी होगी। किस आधार पर तबादले किए गए, यह भी बताना होगा। साथ ही नियमों के इस्तेमाल की जानकारी देनी होगी।
कोर्ट ने विभाग के प्रमुख सचिव को भी निर्देश दिया। उन्हें अगली सुनवाई तक हलफनामा दाखिल करना होगा। इस हलफनामे में पूरे मामले की स्थिति बतानी होगी।
14 अगस्त के तबादला आदेश पर लगी रोक
इस मामले में 14 अगस्त 2026 का आदेश चुनौती में है। हाईकोर्ट ने फिलहाल इस आदेश पर रोक लगा दी है। अदालत ने इसके असर और लागू होने को रोका है। यह रोक अगली सुनवाई तक जारी रहेगी।
इसका मतलब आदेश फिलहाल लागू नहीं किया जा सकेगा। अंतिम फैसला आने तक स्थिति बनी रहेगी। अदालत ने अभी तबादलों को पूरी तरह गलत नहीं कहा है। उसने पहले विभाग से पूरी जानकारी मांगना जरूरी माना है।
23 अक्टूबर को फिर होगी मामले की सुनवाई
हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई 23 अक्टूबर 2026 को रखी है। उस दिन पंचायत सेक्रेटरी ग्रामीण विकास विभाग को अपना हलफनामा देना होगा। व्हाइट पेपर भी अदालत के सामने रखना होगा। इसके बाद कोर्ट मामले पर आगे विचार करेगी।
अगली सुनवाई में तबादलों की प्रक्रिया अहम रहेगी। पिछले आदेशों और नए आदेशों की स्थिति भी देखी जाएगी। सरकार की नीति और याचिकाकर्ता की आपत्ति भी सामने रहेगी। इसलिए रोजगार सहायकों के लिए यह सुनवाई महत्वपूर्ण होगी।
हाईकोर्ट की सख्ती से यह संकेत मिला
इस आदेश से एक बात साफ तौर पर सामने आई है। तबादलों की प्रक्रिया को लेकर अदालत संतुष्ट नहीं है। इसीलिए विभाग से विस्तृत जानकारी मांगी गई है। व्हाइट पेपर मांगना मामले की गंभीरता दिखाता है।
हालांकि, हाईकोर्ट ने अभी अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। फिलहाल 14 अगस्त का तबादला आदेश रुका हुआ है। अब विभाग को अदालत के सामने पूरी स्थिति रखनी होगी। इसके बाद ही विवाद की अगली तस्वीर साफ होगी।
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल क्या है?
अब सवाल केवल एक तबादला आदेश का नहीं है। सवाल यह है कि तबादले किस नियम से हो रहे हैं। साथ ही पिछले कोर्ट आदेशों का पालन कैसे हुआ। इसी का जवाब विभाग को अदालत में देना होगा।
अश्विनी कुमार गुप्ता की याचिका इसी विवाद का हिस्सा है। उनकी ओर से आर्यन उरमलिया ने अदालत में पक्ष रखा। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आदेश दिया। अब विभाग की रिपोर्ट मामले में अहम भूमिका निभाएगी।
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