एमपी की नीलिमा सत्यम सहित दो भारतीय को मिला अमेरिका का प्रतिष्ठित एजीयू पुरस्कार

Sanjay Dhiman | Sept 27, 2026, 19:42 IST
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भारतीय वैज्ञानिक रॉक्सी मैथ्यू कोल्ल और आईआईटी इंदौर की नीलिमा सत्यम को एजीयू के 2026 पुरस्कारों से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान दिसंबर में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में मिलेगा।

आईआईटी इंदौर की प्रोफेसर नीलिमा सत्यम और भारतीय वैज्ञानिक रॉक्सी मैथ्यू कोल्ल को बड़ा सम्मान मिलने जा रहा है। दोनों को अमेरिकन जियोफिजिकल यूनियन (AGU – American Geophysical Union) के 2026 के पुरस्कारों के लिए चुना गया है। रॉक्सी को जलवायु संचार के क्षेत्र में योगदान के लिए सम्मानित किया जाएगा।



नीलिमा सत्यम आईआईटी इंदौर में प्रोफेसर हैं और उन्हें भूविज्ञान के क्षेत्र में शोध के लिए सम्मानित किया जाएगा। यह पुरस्कार समारोह दिसंबर में सैन फ्रांसिस्को में होगा। इस पुरस्कार के तहत विजेता को 25 हजार अमेरिकी डॉलर की राशि दी जाती है।



रॉक्सी को जलवायु पुरस्कार

जलवायु वैज्ञानिक रॉक्सी मैथ्यू कोल्ल पुणे के भारतीय मौसम विज्ञान संस्थान में काम करते हैं। उन्हें पहले भी राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार (युवा) मिल चुका है।



अब उन्हें एजीयू के पावेल एस. मोलचानोव क्लाइमेट कम्युनिकेशंस प्राइज के लिए चुना गया है। यह पुरस्कार हर साल किसी एक वैज्ञानिक को दिया जाता है।



कोल्ल ने हिंद महासागर के बढ़ते तापमान पर गहराई से काम किया है। उन्होंने मानसून में हो रहे बदलावों को भी बारीकी से दर्ज किया है।



उनके शोध में समुद्र की सतह के गर्म होने का जिक्र भी है। साथ ही चक्रवात और भारी बारिश के असर पर भी उन्होंने काम किया है।



सबसे अहम बात यह है कि उनका शोध सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है। उन्होंने दक्षिण एशिया में लोगों की आजीविका पर पड़ने वाले असर को भी दिखाया है।



नीलिमा सत्यम को देवेंद्र लाल मेडल

आईआईटी इंदौर की प्रोफेसर नीलिमा सत्यम को देवेंद्र लाल मेमोरियल मेडल के लिए चुना गया है। यह मेडल हर साल किसी युवा या मध्य करियर वैज्ञानिक को दिया जाता है।



यह सम्मान पृथ्वी विज्ञान और अंतरिक्ष विज्ञान में उत्कृष्ट शोध के लिए मिलता है। नीलिमा सत्यम भू-तकनीकी इंजीनियरिंग और भूकंपीय जोखिम पर काम करती हैं।



उन्होंने आपदा-रोधी बुनियादी ढांचे पर भी गहन शोध किया है। इसके अलावा भू-जोखिम कम करने के तरीकों पर भी उनका काम अहम माना जाता है।



मेडल के साथ उन्हें एजीयू की आजीवन सदस्यता भी मिलेगी। यह किसी भी वैज्ञानिक के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।



दो और भारतीय मूल के वैज्ञानिक सम्मानित

इसी कड़ी में भारतीय मूल के दो अमेरिकी वैज्ञानिकों को भी सम्मान मिलेगा। अब्दुल कादिर को साइंस फॉर सॉल्यूशंस अवॉर्ड दिया जाएगा।



वहीं फैसल हुसैन को एंबेसडर अवॉर्ड के लिए चुना गया है। कादिर मैरीलैंड विश्वविद्यालय में सहायक शोध प्रोफेसर के तौर पर काम करते हैं।



उन्होंने शिलांग स्थित नॉर्थ ईस्ट स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर के साथ भी काम किया है। फैसल हुसैन काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU – Banaras Hindu University) के पूर्व छात्र हैं। वे अभी सिएटल के वाशिंगटन विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं।



दिसंबर में मिलेगा सम्मान

एजीयू ने वर्ष 2026 के लिए कुल 43 पुरस्कारों की घोषणा की है। ये सभी पुरस्कार दिसंबर में सैन फ्रांसिस्को में दिए जाएंगे।



यह मौका एजीयू की वार्षिक बैठक के दौरान आएगा। इस बैठक में दुनियाभर के वैज्ञानिक शामिल होते हैं।



नीलिमा सत्यम का शानदार करियर

आईआईटी-इंदौर की प्रोफेसर डॉ. नीलिमा सत्यम देवराकोंडा मूल रूप से आंध्र प्रदेश (चित्तूर जिला) की रहने वाली हैं। उन्होंने अपनी बी.टेक (B.Tech) की डिग्री श्री वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय तिरुपति (आंध्र प्रदेश) से पूरी की है। इसके बाद उन्होंने आईआईटी दिल्ली से अपनी एमटेक और पीएचडी (Ph.D) की शिक्षा प्राप्त की। वह वर्तमान में आईआईटी इंदौर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग में इंस्टीट्यूट चेयर प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं और इंदौर (मध्य प्रदेश) में रह रही हैं।



आईआईटी इंदौर आने से पहले वे हैदराबाद के अंतर्राष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान में सहायक प्रोफेसर थीं। वहां वे भूकंप इंजीनियरिंग अनुसंधान केंद्र से जुड़ी थीं।



उन्होंने टोक्यो विश्वविद्यालय, स्टटगार्ट विश्वविद्यालय और क्यूशू विश्वविद्यालय में विजिटिंग रिसर्चर के तौर पर भी काम किया है। यह अनुभव 2013 से 2023 के बीच का है।



पेशेवर संगठनों में भी उनकी मजबूत भूमिका रही है। वे फिलहाल आईजीएस (IGS – Indian Geotechnical Society) इंदौर चैप्टर की अध्यक्ष हैं।



साथ ही वे इंडियन जियोटेक्निकल सोसाइटी की राष्ट्रीय कार्यकारी समिति की सदस्य भी हैं। उनका यह अनुभव उन्हें देश के प्रमुख वैज्ञानिकों में शुमार करता है।



AGU क्या है और कैसे काम करती है

अमेरिकन जियोफिजिकल यूनियन (American Geophysical Union - AGU) पृथ्वी और अंतरिक्ष विज्ञान को बढ़ावा देने वाली एक अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक संस्था है। इसकी स्थापना वर्ष 1919 में अमेरिका में हुई थी। इसका मुख्यालय वाशिंगटन डीसी, अमेरिका में स्थित है।



इसमें 130 से अधिक देशों के 60,000 से अधिक वैज्ञानिक, शोधकर्ता और छात्र जुड़े हुए हैं। यह संस्था पृथ्वी, वायुमंडल, महासागर, जल विज्ञान, अंतरिक्ष और ग्रह विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान कार्य करती है। यह संस्था दुनिया भर में हर साल वैज्ञानिक सम्मेलन आयोजित करती है।



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