RSS के महाकौशल प्रांत में बदलेगा संगठनात्मक ढांचा, 34 जिलों के लिए बनेगी नई व्यवस्था, कटनी की बैठक में होगा फैसला
आरएसएस के महाकौशल प्रांत में बदलाव
महाकौशल प्रांत RSS (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) का हिस्सा है। फिलहाल यहां 34 जिले आते हैं। इतने बड़े इलाके में सभी जिलों के साथ तालमेल बनाए रखना मुश्किल हो रहा है। प्रांत प्रचारक के लिए हर जिले की इकाई से लगातार संपर्क बनाए रखना भी बड़ी चुनौती है। सभी इकाइयों के बीच बेहतर तालमेल बिठाना भी आसान नहीं है।
जरा सोचिए, 34 जिलों की हर इकाई से लगातार संपर्क कैसे बना रहेगा? इसी परेशानी को देखते हुए संघ (Rashtriya Swayamsevak Sangh) अपने संगठनात्मक ढांचे में बदलाव की तैयारी कर रहा है। इस बदलाव का मकसद काम और जिम्मेदारियों को अलग-अलग स्तरों पर बांटना है। इससे जिला और तहसील स्तर तक संघ की पहुंच मजबूत करने की योजना है।
संभाग से तहसील तक तय होंगी जिम्मेदारियां
नई रचना में जिम्मेदारियां संभाग से शुरू होंगी। इसके बाद विभाग, जिला और तहसील स्तर तक काम तय किए जाएंगे। RSS Mahakaushal Prant में यही व्यवस्था लागू करने की तैयारी है।
तीन संभाग, 34 जिलों का गणित
औसतन हर संभाग में करीब 11 जिले आएंगे। अभी ये सभी 34 जिले एक ही प्रांत के अंतर्गत आते हैं। प्रस्ताव लागू हुआ तो हर संभाग का अलग संगठनात्मक ढांचा होगा। तीनों संभागों में चार-चार विभाग रखे जाएंगे। इस तरह कुल 12 विभाग बनेंगे।
इनमें कटनी विभाग सबसे नया होगा। इसके अलावा चार विभागों के ढांचे में बदलाव होगा। सतना विभाग में मैहर को शामिल किया जाएगा, जबकि पन्ना को इससे अलग किया जाएगा। पन्ना को छतरपुर विभाग में जोड़ा जाएगा। वहीं, कटनी विभाग में दमोह शामिल रहेगा। टीकमगढ़ विभाग में निवाड़ी को शामिल किया जाएगा।
रीवा संभाग में चार विभाग होंगे
रीवा संभाग में रीवा, सतना, सिंगरौली और शहडोल विभाग शामिल होंगे। सतना और मैहर को मिलाकर नया सतना विभाग बनाया जाएगा। इसे रीवा संभाग में रखा जाएगा। इससे सतना के संगठनात्मक ढांचे में बदलाव होगा। अब सतना और मैहर एक ही विभाग के अंतर्गत आएंगे।
पन्ना सतना से कटकर छतरपुर में जाएगा
दूसरी ओर पन्ना अब सतना विभाग का हिस्सा नहीं रहेगा। उसे सतना विभाग से अलग किया जाएगा। फिर पन्ना को छतरपुर विभाग में शामिल किया जाएगा। पन्ना अब छतरपुर विभाग के साथ गिना जाएगा।
सागर संभाग और कटनी विभाग
सागर संभाग में सागर, छतरपुर, टीकमगढ़ और कटनी विभाग शामिल होंगे। कटनी विभाग नया बनाया जाएगा और इसमें दमोह को भी शामिल किया जाएगा। वहीं, पन्ना को छतरपुर विभाग में जोड़ा जाएगा। इससे छतरपुर और कटनी, दोनों विभागों के दायरे में बदलाव होगा।
टीकमगढ़ और निवाड़ी मिलकर बनेंगे एक विभाग
टीकमगढ और निवाड़ी को मिलाकर एक विभाग बनाने की योजना है। यह योजना सागर संभाग की रचना का हिस्सा है। सागर और छतरपुर विभाग भी इसी संभाग में रहेंगे।
जबलपुर संभाग में कौन से विभाग?
जबलपुर संभाग में जबलपुर, मंडला, सिवनी और छिंदवाड़ा विभाग शामिल होंगे। फिलहाल इस संभाग के विभागों में किसी बदलाव की जानकारी नहीं है। प्रस्ताव के मुताबिक, रीवा और सागर संभाग के जिलों के बंटवारे में बदलाव होगा।
कटनी की बैठक में होगा फैसला
नई व्यवस्था को लेकर कटनी में 16 से 18 जनवरी तक बैठक होने की संभावना है। यह बैठक पहले नवंबर में होनी थी, लेकिन इसे आगे बढ़ा दिया गया। इस बैठक में संगठन के नए ढांचे को अंतिम रूप दिया जाएगा।
बैठक में नई व्यवस्था को मंजूरी मिलने के बाद इसे लागू करने की तैयारी होगी। इसके बाद संभाग से लेकर तहसील स्तर तक जिम्मेदारियां तय की जाएंगी। अब सबकी नजर कटनी में होने वाली इस बैठक पर टिकी है।
हालांकि असली तस्वीर बैठक के बाद ही साफ होगी। देखना होगा कि प्रस्ताव में कोई बदलाव होता है या नहीं। क्या विभागों की सीमाएं इसी तरह रहेंगी या उनमें कुछ फेरबदल होगा? फिलहाल यह पूरी व्यवस्था प्रस्तावित है। बैठक के बाद ही अंतिम सूची सामने आएगी।
यह खबर क्यों जरूरी है?
यह खबर महाकौशल प्रांत के 34 जिलों में संघ की कार्यप्रणाली से जुड़ी है। सतना, मैहर, पन्ना, कटनी और दमोह जैसे जिलों की इकाइयां नए विभागों में बंटेंगी। इसका असर जिला और तहसील स्तर के कामकाज में दिखेगा। समाज में सक्रिय किसी भी संगठन की रचना आम लोगों के लिए मायने रखती है। उसकी पहुंच गांव और कस्बे तक होती है। इसलिए प्रस्ताव और उसकी अंतिम मंजूरी, दोनों पर नजर रखना जरूरी है।
FAQ
1. आरएसएस महाकौशल प्रांत में कितने जिले हैं और उन्हें कैसे बांटा जाएगा?
प्रांत में 34 जिले हैं। प्रस्ताव के मुताबिक इन्हें जबलपुर, रीवा और सागर, तीन संभागों में बांटा जाएगा। इसका मकसद जिला और तहसील स्तर तक पहुंच मजबूत करना है।