संघ ने कहा आरक्षण पर वोट बैंक की राजनीति सही नहीं, RSS में अब प्रांत व्यवस्था खत्म, 88 संभाग बनेंगे
आरक्षण पर यह बोले दत्तात्रेय
देश में आरक्षण की व्यवस्था रहनी चाहिए या नहीं? इस सवाल पर दत्तात्रेय ने कहा कि समाज में कई लोगों के साथ भेदभाव हुआ है। ऐसे लोग सामाजिक और शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़े हैं। समाज में समानता आने तक उनके लिए आरक्षण की व्यवस्था रहनी चाहिए। लेकिन आरक्षण का लाभ सही व्यक्ति को मिलना चाहिए। ऐसा नहीं होना चाहिए कि किसी को लाभ मिले और कोई वंचित रह जाए। इसलिए जहां सुधार की जरूरत है, वहां सभी पात्र लोगों को आरक्षण मिलना चाहिए। सामाजिक दृष्टि से आरक्षण आवश्यक है। लेकिन आरक्षण पर वोट बैंक की राजनीति नहीं होनी चाहिए। आरक्षण समाज के हित के लिए है, राजनीति करने के लिए नहीं।
संघ का लगातार विस्तार, पश्चिम बंगाल में 150 गुना बढ़ीं शाखाएं
संघ के विस्तार की जानकारी देते हुए होसबाले ने शाखाओं के आंकड़े बताए। देश में दैनिक शाखाओं की संख्या बढ़कर 99 हजार 423 हो गई है। एक साल में इनकी संख्या में 12 हजार की बढ़ोतरी हुई है। अब देश में 63 हजार 208 स्थानों पर शाखाएं लगती हैं। एक साल में इन स्थानों की संख्या भी 8 हजार 156 बढ़ी है।
सालभर में कुल 65 हजार 664 हिंदू सम्मेलन आयोजित हुए। इनमें चार करोड़ 93 लाख लोग शामिल हुए। संघ कार्यकर्ताओं ने 4.63 लाख गांवों में गृह संपर्क अभियान चलाया। इस अभियान के माध्यम से 10.22 करोड़ लोगों तक पहुंच बनाई गई। दत्तात्रेय ने बताया कि पश्चिम बंगाल में शाखाओं की संख्या 150 गुना बढ़ी है। पहले वहां संघ का विरोध होता था, लेकिन अब परिस्थितियां अनुकूल हैं। पूर्वोत्तर राज्यों में भी संघ का विस्तार हो रहा है। इसी तरह केरल में भी शाखाएं संचालित हो रही हैं।
युवाओं के कार्यक्रमों में बढ़ोतरी
संघ ने बताया कि सालभर में युवाओं के लिए 57 हजार 243 कार्यक्रम आयोजित हुए। ये कार्यक्रम 35 वर्ष से कम उम्र के युवाओं के लिए थे। इनमें 31 लाख 26 हजार युवा शामिल हुए। वहीं, छह लाख 90 हजार व्यावसायिक युवाओं ने भी भाग लिया। इस तरह कुल 38 लाख से ज्यादा युवा इन कार्यक्रमों में शामिल हुए। विभिन्न आपदा राहत कार्यों में भी संघ की अहम भूमिका रही। संघ ने समाज के साथ मिलकर सेवा कार्य किए। इनमें ओडिशा, असम, चित्रकूट और लखनऊ सहित कई क्षेत्र शामिल हैं।
इन महापुरुषों के विचारों पर भी हुई चर्चा
बैठक में राष्ट्रीय चेतना के अग्रदूत राजनारायण बसु के विचारों पर भी चर्चा हुई। शुद्धि आंदोलन के नायक स्वामी श्रद्धानंद के विचारों पर भी मंथन हुआ। धर्मरक्षा के लिए प्राण अर्पित करने वाले बलिदानी संत स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के विचारों पर चर्चा हुई।
अब संघ की संरचना बदलेगी
दत्तात्रेय ने बताया कि अभी संघ में 46 प्रांत हैं। अब प्रांत व्यवस्था की जगह संभागीय व्यवस्था लागू होगी। इसके तहत देशभर में 88 संभाग बनाए जाएंगे। नवंबर-दिसंबर में इसके लिए निर्वाचन होते हैं। प्रांत स्तर की तरह अब संभाग स्तर पर पदाधिकारियों की संरचना होगी।
आने वाले दिनों में पंच परिवर्तन के क्रियान्वयन पर लगातार जोर दिया जाएगा। युवाओं को नशे के खिलाफ जागरूक करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। सरकार भी इस दिशा में काम कर रही है। संघ का उद्देश्य समाज में नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाना है।
संघ का पंजीयन जरूरी नहीं
संघ का पंजीयन नहीं कराने को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। इस पर दत्तात्रेय ने कहा कि संघ के पंजीयन का कोई मुद्दा नहीं है। हम कोई अलग संगठन नहीं हैं। हम समाज में रहकर समाज के लिए काम करते हैं। इसलिए अलग से पंजीयन कराने की जरूरत नहीं है। हम संविधान के अनुसार ही काम कर रहे हैं।
जहां सरकारों ने हमारे आयोजनों को मंजूरी नहीं दी, वहां अदालतों ने अनुमति दी। इसका मतलब है कि हम संविधान के तहत सही काम कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संघ के विस्तार के सवाल पर भी उन्होंने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि संघ देश में रहकर ही काम करने का इच्छुक है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाने की कोई वजह नहीं है। यदि कोई बुलाता है तो संघ अपने विचार रखता है।