150 करोड़ की संपत्ति वाला RTO कांस्टेबल सौरभ अब बीवी-बच्चों के सहारे मांग रहा अदालत से राहत!
News In Short
- सौरभ शर्मा ने पत्नी दिव्या तिवारी की सर्जरी और बच्चों की देखभाल का हवाला देकर हाईकोर्ट में 60 दिन की अस्थायी जमानत मांगी।
- ईडी और लोकायुक्त जांच में सौरभ पर ₹150 करोड़ से अधिक की बेनामी संपत्ति जुटाने के आरोप हैं।
- दोस्तों, पत्नी, मां और रिश्तेदारों के नाम पर कंपनियां, प्लॉट, पेट्रोल पंप, स्कूल और दुबई विला होने का दावा।
- जमानत याचिका में कहा गया कि पत्नी की FESS सर्जरी जरूरी है और बच्चों की देखभाल के लिए कोई अन्य जिम्मेदार सदस्य उपलब्ध नहीं।
- कानूनी हलकों में चर्चा तेज कि क्या “मानवीय आधार” अब आर्थिक अपराध मामलों में जमानत का बड़ा हथियार बनता जा रहा है।
मध्यप्रदेश के चर्चित RTO भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जेल में बंद सौरभ शर्मा ने फिर जबलपुर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इस बार उन्होंने अपनी पत्नी दिव्या तिवारी की बीमारी और बच्चों की देखभाल का हवाला देकर 60 दिन की अस्थायी जमानत मांगी।
सवाल उठ रहा है कि जिस व्यक्ति पर करोड़ों की संपत्ति अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के नाम पर खड़ी करने के आरोप हैं, वही अब अदालत में यह कह रहा है कि परिवार में कोई साथ नहीं है।
करोड़ों की संपत्ति वाला आरोपी अब ‘अकेला’ ?
मध्यप्रदेश के चर्चित RTO भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जेल में बंद पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा ने एक बार फिर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस बार उसकी दलील न तो जांच की खामियों पर केंद्रित है और न ही संपत्तियों के स्रोत पर, बल्कि पत्नी की बीमारी और बच्चों की देखभाल पर आधारित है।
सौरभ शर्मा ने अपनी दूसरी अस्थायी जमानत याचिका में दावा किया है कि उसकी पत्नी दिव्या तिवारी गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं। उनकी तत्काल सर्जरी जरूरी है और दो नाबालिग बच्चों की देखभाल के लिए परिवार में कोई अन्य जिम्मेदार व्यक्ति उपलब्ध नहीं है।
लेकिन यही दावा अब कई सवाल भी खड़े कर रहा है। जिस व्यक्ति पर करोड़ों की संपत्ति अपने रिश्तेदारों, दोस्तों और सहयोगियों के नाम पर खड़ी करने के आरोप हैं, वही अब अदालत में यह कह रहा है कि संकट की घड़ी में उसके परिवार के साथ खड़े होने वाला कोई नहीं है।
रिश्तेदारों और दोस्तों के नाम पर खड़ा हुआ कथित साम्राज्य
ईडी और लोकायुक्त की जांच में सामने आया था कि सौरभ शर्मा ने कथित तौर पर अपनी अवैध कमाई को छिपाने के लिए कई लोगों के नाम का इस्तेमाल किया। जांच एजेंसियों के अनुसार “अविरल बिल्डिंग एंड कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड” जैसी कंपनियों में उसके दोस्त चेतन सिंह गौर, सहयोगी शरद जायसवाल और रोहित तिवारी को डायरेक्टर बनाया गया। रोहित तिवारी को उसका साला बताया गया है।
इसके अलावा पत्नी दिव्या तिवारी, मां उमा शर्मा और अन्य रिश्तेदारों के नाम पर प्लॉट, मकान, पेट्रोल पंप, मछली पालन व्यवसाय, स्कूल प्रोजेक्ट और जमीनें होने के आरोप लगाए गए। जांच एजेंसियों के मुताबिक दुबई में करोड़ों का विला, भोपाल के आलीशान बंगले, ग्वालियर की जमीनें और इंदौर की आवासीय परियोजनाएं भी इसी नेटवर्क का हिस्सा थीं।
अब यही तथ्य अदालत में दाखिल जमानत याचिका के साथ तुलना में चर्चा का विषय बन गए हैं। सवाल यह उठ रहा है कि जब कथित तौर पर पूरा आर्थिक नेटवर्क रिश्तेदारों और करीबियों के सहारे खड़ा किया गया था, तब आज बच्चों की देखभाल और पत्नी के इलाज के लिए कोई क्यों नहीं है? कानूनी हलकों में यह चर्चा तेज है की पत्नी की बीमारी सिर्फ एक बहाना है।
पत्नी की बीमारी बना जमानत का आधार
सौरभ शर्मा ने अपनी याचिका में दावा किया है कि उसकी पत्नी दिव्या तिवारी “डिविएटेड नेज़ल सेप्टम” और क्रोनिक साइनसाइटिस जैसी समस्या से पीड़ित हैं। मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर कहा गया है कि उन्हें तत्काल “फंक्शनल एंडोस्कोपिक साइनस सर्जरी (FESS)” की आवश्यकता है। याचिका में यह भी कहा गया कि सर्जरी के बाद लंबे पोस्ट-ऑपरेटिव केयर की जरूरत होगी और ऐसे समय में पति की मौजूदगी जरूरी है।
हालांकि इस मामले में हमने कुछ ENT विशेषज्ञों से बात की तो उन्होंने बताया कि FESS सर्जरी कोई बेहद बड़ी सर्जरी नहीं होती, इस सर्जरी के बाद मरीज को आमतौर पर अगले 12 घंटे में ही डिस्चार्ज मिल जाता है और बहुत ही काम ऐसी स्थितियां होती हैं जिसमें उसे 24 घंटे अस्पताल में रहना पड़ता है।
याचिका में उसके दो नाबालिग बच्चों अवीर शर्मा 9 साल और सुवीर शर्मा 14 साल का भी उल्लेख किया गया है। अदालत से कहा गया है कि दोनों बच्चे अभी पूरी तरह माता-पिता पर निर्भर हैं और मां के अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में उनकी देखभाल करने वाला कोई अन्य जिम्मेदार सदस्य नहीं है।
यहीं से यह मामले को भावनात्मक मोड़ देने की कोशिश की गई है। सौरभ शर्मा की ओर से अदालत की मानवीय संवेदनाओं को केंद्र में रखते हुए राहत मांगी गई है।
क्या अदालत की संवेदनाएं बन रही हैं जमानत की रणनीति?
कानूनी विशेषज्ञों के बीच अब यह बहस तेज हो गई है कि क्या आर्थिक अपराधों में आरोपी अब “मानवीय आधार” को जमानत पाने के प्रभावी हथियार के रूप में इस्तेमाल करने लगे हैं। इससे पहले चर्चित सिवनी हवाला कांड में पूजा पांडे को भी इस आधार पर राहत मिली थी कि उनका तीन वर्षीय बच्चा जेल में उनके साथ रह रहा था और उसके पालन-पोषण पर असर पड़ रहा था।
अब सौरभ शर्मा मामले में भी बच्चों की देखभाल और पत्नी की बीमारी को प्रमुख आधार बनाया गया है। अदालतें स्वाभाविक रूप से मानवीय परिस्थितियों को गंभीरता से देखती हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या बड़े आर्थिक अपराधों के आरोपी अब इन्हीं भावनात्मक परिस्थितियों को कानूनी रणनीति में बदल रहे हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत को ऐसे मामलों में मानवीय संवेदनाओं और अपराध की गंभीरता दोनों के बीच संतुलन बनाना पड़ता है। खासतौर पर तब, जब जांच एजेंसियां आरोपी पर करोड़ों की अवैध संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर आरोप लगा चुकी हों।
ईडी के आरोप: सोना, नकदी और बेनामी संपत्तियों का जाल
ईडी और लोकायुक्त की कार्रवाई में जो आंकड़े सामने आए, उन्होंने पूरे प्रदेश को चौंका दिया था। जांच एजेंसियों के मुताबिक सौरभ शर्मा और उससे जुड़े परिसरों से करोड़ों रुपए नकद, 52 किलो के करीब सोना और भारी मात्रा में चांदी बरामद हुई थी। एक वाहन से ₹11.60 करोड़ नकद और लगभग ₹40 करोड़ मूल्य का सोना मिलने का दावा भी जांच एजेंसियों ने किया। आगे की जांच में उससे जुड़ी हुई कुल 150 करोड़ की संपत्ति होने का दावा किया गया है।
याचिका में हालांकि सौरभ शर्मा ने इन आरोपों को झूठा बताते हुए कहा है कि उसके खिलाफ कोई प्रत्यक्ष “मनी ट्रेल” नहीं है और जांच एजेंसियां केवल रिश्तों और बयानों के आधार पर निष्कर्ष निकाल रही हैं। उसने यह भी तर्क दिया कि अधिकांश संपत्तियां उसके नाम पर नहीं हैं और सभी संपत्तियां पहले ही कुर्क की जा चुकी हैं, इसलिए उसके बाहर आने से जांच प्रभावित नहीं होगी।
अब हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी नजरें
सौरभ शर्मा की यह दूसरी अस्थायी जमानत याचिका अब हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए अहम मानी जा रही है। अदालत को यह तय करना होगा कि पत्नी की सर्जरी, बच्चों की देखभाल और मानवीय परिस्थितियां क्या इतने गंभीर आर्थिक अपराध के आरोपों के बीच अस्थायी राहत देने के लिए पर्याप्त आधार हैं।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि क्या सचमुच सौरभ शर्मा का परिवार अकेला पड़ गया है, या फिर अदालत की संवेदनाओं को केंद्र में रखकर जमानत पाने की एक नई कानूनी रणनीति तैयार की गई है?
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