दिग्विजय की सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा पर हर्षा रिछारिया का तंज, बोलीं-चुनाव पास आते ही राम याद आ रहे
हर्षा रिछारिया ने क्या सवाल उठाए?
मॉडल से साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया उर्फ हर्षानंद गिरि ने सीधे नाम नहीं लिया। उन्होंने दिग्विजय सिंह को मध्य प्रदेश का पूर्व मुख्यमंत्री कहकर संबोधित किया। राम मंदिर की कानूनी लड़ाई का जिक्र किया। साथ ही विपक्ष पर मंदिर निर्माण का विरोध करने का आरोप लगाया।
राम मंदिर बना, तब खुशी क्यों नहीं दिखी?
हर्षा ने राम मंदिर के चंदे में कथित चोरी का जिक्र किया। उन्होंने तंज कसा कि अब भगवान राम को इंसाफ दिलाने निकल पड़े हैं। उन्होंने यात्रा की मंशा पर भी सवाल उठाए। चुनाव नजदीक आने और किसी को पद दिलाने की संभावनाओं का जिक्र किया।
पहले दिन उज्जैन में क्या हुआ?
दिग्विजय सिंह ने पत्नी अमृता सिंह के साथ चिंतामन गणेश मंदिर में दर्शन किए। बालाजी गार्डन में संत समाज और अन्य लोगों ने पार्थिव शिवलिंग बनाए। कन्या पूजन और भोजन प्रसादी के बाद करीब 1:15 बजे यात्रा शुरू हुई।
यात्रा में सबसे आगे शिव-पार्वती की झांकी थी। इसके साथ डीजे और भजन मंडली भी चली। बैंड और ढोल भी यात्रा में शामिल रहे। यात्रा शहर के विभिन्न मार्गों से होकर कानीपुरा पहुंचेगी।
उज्जैन से अयोध्या यात्रा का रूट
मध्य प्रदेश में यात्रा तराना और शाजापुर से गुजरेगी। इसके बाद सारंगपुर और खुजनेर होते हुए राजगढ़ पहुंचेगी। फिर चाचौड़ा और आरोन से होकर अशोकनगर जाएगी। चंदेरी से आगे यात्रा उत्तर प्रदेश पहुंचेगी।
उत्तर प्रदेश के पड़ावों में तालबेहट और जेरोन शामिल हैं। इसके बाद ओरछा और चिरगांव से होकर उरई पहुंचेगी। फिर कालपी और कानपुर देहात से आगे बढ़ेगी। लखनऊ देहात और बाराबंकी होते हुए अयोध्या पहुंचेगी। यात्रा का अंतिम पड़ाव राम मंदिर (Ram Mandir) होगा।
30 से 40 लाख खर्च कैसे चलेगा?
मध्य प्रदेश कांग्रेस के विधायक महेश परमार ने व्यवस्थाओं की जानकारी दी। पहले दिन कानीपुरा में ठहरने और भोजन की व्यवस्था की गई है। चाय और नाश्ते का भी इंतजाम किया गया है।
ग्रामीण पड़ावों पर रोज 20 से 30 हजार रुपए खर्च होने का अनुमान है। बड़े पड़ावों पर खर्च 50 से 60 हजार रुपए तक पहुंच सकता है। पूरी यात्रा में 30 से 40 लाख रुपए खर्च होने का अनुमान है।
खर्च पर दिग्विजय सिंह बोले- लोग खुद आगे आए
दिग्विजय सिंह ने अपनी नर्मदा परिक्रमा का उदाहरण भी दिया। तब भी लोग अपना भंडारा शामिल कराने का आग्रह करते थे। उनके मुताबिक 72 भंडारा आवेदकों ने बाद में शिकायत की थी। उन्होंने पूछा था कि उनका भंडारा स्वीकार क्यों नहीं हुआ।
रोज 15 किमी, कितने लोग जुड़ेंगे?
यात्रा में रोज करीब 15 किलोमीटर पैदल चलने की योजना है। आयोजकों के मुताबिक आगे के पड़ावों पर रोज 1,000 से 1,500 लोग जुड़ेंगे। ऐसे में रोज इतने लोगों के भोजन और चाय की व्यवस्था करनी होगी।
यात्रा के साथ एक विशेष रथ भी चलेगा। इसमें भगवान राम और लक्ष्मण की प्रतिमाएं रखी गई हैं। माता सीता और हनुमान की प्रतिमाएं भी हैं। गंगा और यमुना के जल से भरे कलश रखे जाएंगे। शिप्रा और कावेरी के जल वाले कलश भी होंगे। नर्मदा नदी के जल का कलश भी रखा जाएगा।
दिग्विजय की यात्रा का संतों का समर्थन
यात्रा में महामंडलेश्वर कंप्यूटर बाबा सहित कई संत शामिल होंगे। विधायक महेश परमार ने संतों के समर्थन की जानकारी दी। उनके मुताबिक ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने यात्रा को आशीर्वाद दिया। द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने भी समर्थन जताया।
FAQ
- सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा कब और कहां से शुरू हुई?
यात्रा 20 अक्टूबर को उज्जैन से शुरू हुई। यह करीब 950 किलोमीटर लंबी है। यात्रा को 70 दिन में अयोध्या के राम मंदिर पहुंचना है। - दिग्विजय सिंह की यात्रा का मकसद क्या है?
दिग्विजय सिंह मंदिरों के चढ़ावे और धार्मिक स्थलों की व्यवस्था में पारदर्शिता चाहते हैं। यात्रा से पहले उन्होंने पत्नी के साथ पार्थिव शिवलिंग का पूजन किया। हर्षा रिछारिया ने यात्रा की मंशा पर सवाल उठाए हैं।