हिंदू राष्ट्र के लिए साध्वी हर्षानंद का 11 दिन का एकांतवास, शुरू की मौन साधना
5 पॉइंट्स में समझें पूरी स्टोरी
- साध्वी हर्षानंद गिरि ने 11 दिन की मौन साधना शुरू की।
- साधना नर्मदा के गौरीघाट पर पूजा के साथ प्रारंभ हुई।
- उन्होंने अन्न, जूते‑चप्पल और बातचीत का त्याग किया।
- उद्देश्य शांति, युद्ध रुकना और हिंदू राष्ट्र की कामना है।
- साधना 15 जून को गौरीघाट पर समाप्त होगी।
जबलपुर नर्मदा तट पर साध्वी हर्षानंद गिरि ने 11 दिन की मौन साधना और एकांतवास शुरू किया है। इस दौरान उन्होंने अन्न, जूते और चप्पल का त्याग कर दिया है। उनका उद्देश्य देश में शांति, युद्ध रुकना और भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की कामना करना है। साधना 15 जून को पूरी होगी।
11 दिन की एकांत साधना
साध्वी हर्षानंद गिरि ने शुक्रवार से जबलपुर के गौरीघाट पर पूजा-अर्चना के साथ 11 दिन की मौन साधना शुरू की। इस अवधि में वह किसी से संवाद नहीं करेंगी और पूरी तरह एकांत में ध्यान और व्रत में लीन रहेंगी। उनका उद्देश्य आत्मिक शांति और देश के कल्याण के लिए ध्यान साधना करना है।
मौन व्रत की साधना
साध्वी ने 11 दिनों का मौन व्रत लिया है। इसके साथ ही उन्होंने अन्न और जूते चप्पल का त्याग भी किया है। इस साधना के माध्यम से उनका उद्देश्य मन को शुद्ध करना और भौतिक आवश्यकताओं से परे ध्यान साधना करना है।
साध्वी हर्षानंद ने कहा कि वर्तमान समय युद्ध और अशांति का है। देश की जनता महंगाई और आर्थिक संकट का सामना कर रही है। उन्होंने 11 दिन की साधना में देश में शांति, आर्थिक संकट से राहत और भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की प्रार्थना की।
15 जून को समापन
15 जून को 11 दिन की साधना पूर्ण होने पर साध्वी गौरीघाट पर आरती के पश्चात प्रसाद वितरण करेंगे और साधना का समापन करेंगे। इसके बाद यदि उनके उद्देश्य पूर्ण होते हैं, तो वह नर्मदा जी की पैदल परिक्रमा पर निकलेंगी।
साध्वी हर्षानंद ने कहा कि धार्मिक मार्ग पर चलने वाले व्यक्ति को कभी-कभी एकांतवास की आवश्यकता होती है। यह समय ना मीडिया, ना सोशल मीडिया और ना समाज से जुड़ा होता है। इससे मन पवित्र होता है और व्यक्ति अपने उद्देश्य पर ध्यान केंद्रित कर सकता है।
कौन हैं हर्षा रिछारिया?
हर्षा रिछारिया पेशे से सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, पूर्व मॉडल और एंकर रह चुकी हैं। वे लंबे समय तक ग्लैमर और मीडिया से जुड़ी रहीं। बाद में उन्होंने इस दुनिया से दूरी बनाकर आध्यात्मिक मार्ग अपनाया। वह खुद को सामाजिक कार्यकर्ता और 'हिंदू सनातन शेरनी' बताती हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार साध्वी हर्षा रिछारिया का जन्म 26 मार्च 1994 को झांसी जिले के मऊरानीपुर में हुआ था। बाद में उनका परिवार भोपाल, मध्य प्रदेश में बस गया। वर्तमान में हर्षा उत्तराखंड में रहती थीं।
FAQ
- साध्वी हर्षानंद ने कितने दिन का मौन व्रत लिया?
हर्षानंद ने 11 दिन का मौन व्रत और एकांतवास लिया। - साधना का उद्देश्य क्या है?
देश में शांति, युद्ध और आर्थिक संकट को दूर करना और हिंदू राष्ट्र की कामना।
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