सागर का छोटा दशरथ मांझी: परिवार की प्यास बुझाने 16 साल के GEN-Z ने खोद डाला कुआं

Sanjay Dhiman | Aug 12, 2026, 23:38 IST
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सागर जिले के 16 वर्षीय अनीश फौजदार ने बिना मजदूर या मशीन के अकेले 25 फीट गहरा कुआं खोदा। परिवार की पानी की समस्या हल करने के इस जज्बे से गांव वाले प्रभावित हुए और उसे "सागर का छोटा दशरथ मांझी" कहने लगे।

सागर जिले के अनीश फौजदार ने अकेले कुआं खोदकर मिसाल पेश की। उनकी उम्र सिर्फ 16 साल है और वे 12वीं में पढ़ते हैं। परिवार में पानी की भारी दिक्कत थी। बिना किसी मजदूर या मशीन के अनीश ने फावड़े से खुदाई शुरू की। करीब 25 फीट गहराई पर आखिरकार पानी निकल आया।



हौसले की यह कहानी शुरू कहां से हुई

सागर जिले के जैसीनगर क्षेत्र का गांव खजुरिया टगरा टोला पानी की किल्लत से जूझ रहा था। यहां के अनीश फौजदार ने यह परेशानी करीब से देखी थी। उन्होंने ठान लिया कि इस बार समाधान खुद निकालेंगे।



उन्होंने परिवार को बता दिया कि वे खुद कुआं खोदेंगे। यह सुनकर घर वालों को हैरानी हुई। किसी को यकीन नहीं था कि एक स्कूली छात्र यह काम कर पाएगा।



परिवार ने समझा मजाक

शुरुआत में परिवार ने अनीश की बात को हल्के में लिया। उन्हें लगा कि यह जोश में कहा गया वादा है। कुछ दिन बाद खुद ही यह इरादा बदल जाएगा।



लेकिन अनीश ने बात को अमल में बदल दिया। उसने फावड़ा और कुदाली उठाई और खुदाई शुरू कर दी। धीरे-धीरे जमीन के भीतर उतरता चला गया।



25 फीट तक अकेले खुदाई

इस काम में न कोई मजदूर लगा और न ही कोई मशीन। अनीश खुद मिट्टी खोदता और बाल्टी से बाहर निकालता। हर दिन थोड़ा-थोड़ा गहराई बढ़ती गई।



जैसे-जैसे कुआं गहरा होता गया, काम मुश्किल होता गया। मिट्टी सख्त होती गई और मेहनत बढ़ती गई। फिर भी अनीश ने हार नहीं मानी।



आखिरकार करीब 25 फीट की गहराई पर पानी की धारा दिखी। यह पल अनीश और उसके परिवार के लिए बड़ी राहत लेकर आया। सालों पुरानी पानी की समस्या आखिरकार खत्म हुई।



गांव ने दी नई पहचान

खबर गांव में फैलते ही लोग अनीश की तारीफ करने लगे। ग्रामीणों ने उसे प्यार से "सागर का छोटा मांझी" कहना शुरू कर दिया। यह नाम बिहार के दशरथ मांझी की याद दिलाता है, जिन्होंने अकेले पहाड़ काटकर रास्ता बनाया था।



पढ़ाई के साथ परिवार की जिम्मेदारी निभाना आसान नहीं होता। अनीश ने दोनों को साथ लेकर चलने का हौसला दिखाया।



युवाओं के लिए बड़ी सीख

अनीश की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है जो मुश्किल हालात में हिम्मत हार जाते हैं। उसने साबित किया कि उम्र छोटी हो सकती है, हौसला नहीं।



छोटे गांव की यह घटना अब सोशल मीडिया पर भी चर्चा में है। लोग इसे मेहनत और संकल्प की मिसाल बता रहे हैं।



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