सागर कैश कांड: 3.2 करोड़ कैश की लोकायुक्त जांच धीमी, एक महीने बाद भी नहीं मिला जवाब
मामला मध्यप्रदेश के सागर का है। यहां एक ऑटो ड्राइवर के घर से पुलिस को 3 करोड़ रुपए कैश मिले थे। द सूत्र ने इस घटना के लगभग एक महीने बाद मामले की पड़ताल की है।
पूरा मामला क्या है?
मामला 16 अगस्त 2026 का है। गोपालगंज थाना क्षेत्र के तिली तिगड्डा में पुलिस ने दबिश दी। दरअसल सोशल मीडिया पर पिस्तौल के साथ फोटो डालने वालों के खिलाफ सागर पुलिस कार्रवाई कर रही थी। इसी दौरान सागर पुलिस को दो सोशल मीडिया प्रोफाइल पर पिस्तौल की फोटो मिली। एक मामला मोतीनगर और दूसरा गोपालगंज का था। इसके बाद पुलिस गोपालगंज में सौरभ अहिरवार के घर पहुंची। यहां पुलिस को पिस्तौल तो नहीं मिली, लेकिन तलाशी के दौरान एक लॉक अलमारी मिली। पुलिस ने जब अलमारी खुलवाई तो उसमें करीब 3 करोड़ रुपए कैश मिले।
सौरभ के परिवार का दावा था कि सौरभ पेशे से ऑटो ड्राइवर है। यह सारा पैसा उनके रिश्तेदार रमेश अहिरवार का है। सौरभ के परिवार का कहना था कि रमेश पीडब्ल्यूडी में इंजीनियर के पद से रिटायर हुए हैं। यह सारा पैसा लगभग 8-9 महीने पहले वही रखकर गए थे। इसके बाद लोकायुक्त ने इस मामले में रिटायर्ड इंजीनियर रमेश अहिरवार और उनकी पत्नी सहोद्रा बाई समेत चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के लिए एक एसआईटी का गठन भी किया गया।
लोकायुक्त एसपी क्या बोले?
मामले में अपडेट के लिए द सूत्र ने लोकायुक्त एसपी दुर्गेश राठौर से संपर्क किया। एसपी का कहना है कि फिलहाल इस मामले की जांच जारी है। लोकायुक्त साक्ष्यों के आधार पर केस को आगे बढ़ा रही है। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी जुटाए जा रहे हैं। द सूत्र ने जब उनसे पूछा कि क्या किसी को गिरफ्तार भी किया गया है, तो उनका कहना है कि फिलहाल किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
बता दें कि दावा किया जा रहा है कि लोकायुक्त रमेश अहिरवार की नामी-बेनामी संपत्ति, वेतन-भत्ते, जमीन, मकान, बैंक खाते, निवेश और दूसरी संपत्तियों की जानकारी जुटा रही है। दावा है कि जांच के दौरान अलमारी खरीदने का एक बिल भी मिला है। इसे अहम सबूत माना जा रहा है। लोकायुक्त को लगता है कि अलमारी नकदी रखने के लिए ही खरीदी गई थी।
रमेश कर रहे इनकार
दूसरी तरफ रमेश अहिरवार सौरभ के परिवार के दावे को निराधार बता चुके हैं। उनका कहना है कि उनका इस मामले से लेना-देना नहीं है। फिलहाल लोकायुक्त अहिरवार दंपती के साथ सौरभ और उसके भाई अंकित के खिलाफ जांच कर रही है। जांच की रफ्तार भी अब सवाल खड़े कर रही है। पिछले चार साल के आंकड़े बताते हैं कि 1 हजार 379 सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामले लोकायुक्त के पास पेंडिंग हैं।
साल 2022 से अब तक लोकायुक्त ने 1 हजार 63 क्रिमिनल केस दर्ज किए हैं। इनमें से सिर्फ 393 मामलों की विवेचना पूरी हो सकी है। बाकी मामले जांच में ही हैं। द सूत्र ने जब इसकी पड़ताल की थी, तब रिटायर्ड आईपीएस शैलेस सिंह ने बताया था कि जांच प्रभावित होने की सबसे बड़ी वजह फोर्स की कमी है। जब मैदानी अमला ही पूरा नहीं होगा तो जांच आगे कैसे बढ़ेगी?