शादी के बाद रिसेप्शन न देने पर सागर में दंपती का सामाजिक बहिष्कार, कलेक्टर से इंसाफ की मांग
5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला
- मध्य प्रदेश के सागर जिले के चितौरा गांव का मामला है।
- राजेंद्र पटेल ने कल्याणी विवाह योजना के तहत विधवा से शादी की।
- भोज न कराने पर समाज के मुखिया ने बहिष्कार का फैसला सुनाया।
- दंपत्ति की बच्ची को भी गांव में अलग-थलग किया जा रहा है।
- पीड़ित दंपत्ति ने सागर कलेक्टर से लिखित शिकायत दर्ज कराई।
21वीं सदी में भी अगर कोई विधवा महिला को अपनाने की हिम्मत दिखाए और समाज उसे ही सजा दे...तो इससे बड़ी शर्म की बात क्या होगी? (म्रप में सामाजिक बहिष्कार) मध्यप्रदेश के सागर जिले में ठीक यही हुआ। एक युवक ने मुख्यमंत्री कल्याणी विवाह सहायता योजना के तहत एक विधवा महिला से विवाह कर नेक काम किया। बदले में उसे मिला सामाजिक बहिष्कार!
भोज नहीं कराया तो समाज ने किया 'एक्सपेल'
राजेंद्र पटेल ने करीब 8 महीने पहले एक विधवा महिला से शादी की, जिसकी एक छोटी बच्ची भी थी। राजेंद्र ने न सिर्फ उस महिला को, बल्कि उसकी बेटी को भी पूरे दिल से अपनाया। लेकिन गांव के दबंग तथाकथित 'समाज मुखिया' को यह रास नहीं आया।
फरमान जारी हुआ कि पहले 'कच्चा भोजन', फिर 'पक्का भोजन'...पूरे समाज को खिलाओ, तब जाकर तुम्हारी शादी को मान्यता मिलेगी। राजेंद्र ने यह दबाव मानने से इनकार किया। बस, फिर क्या था, सुना दिया गया सामाजिक बहिष्कार का फैसला।
बच्ची तक को नहीं खेलने दिया दूसरे बच्चों के साथ
यह बहिष्कार सिर्फ एक गांव तक नहीं रुका। सीमावर्ती गांवों तक फैला दिया गया। दंपती पर जुल्मों की फेहरिस्त देखिए:
- किसी भी सामाजिक या धार्मिक कार्यक्रम में न बुलाना
- पत्नी की मासूम बच्ची को अन्य बच्चों के साथ खेलने तक से रोकना
- पूरे परिवार को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना
- आसपास के गांवों में भी अलग-थलग करना
एक बच्ची का क्या कसूर? उसकी मां ने दूसरी शादी की... बस इतना?
कलेक्टर के दरवाजे तक पहुंचा मामला
हार न मानते हुए राजेंद्र और उनकी पत्नी मंगलवार को सागर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। उन्होंने पूरे मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई। दंपत्ति ने प्रशासन से मांग की है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही उन्हें एक सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल दिया जाए।
राजेंद्र का कहना है कि अब उन्हें उम्मीद सिर्फ प्रशासन से है। गांव का दबाव इतना ज्यादा है कि बिना सरकारी मदद के वो इस स्थिति से नहीं निकल सकते।
सवाल जो समाज से पूछने जरूरी हैं
सरकार विधवा विवाह को प्रोत्साहन देने के लिए कल्याणी विवाह सहायता योजना चला रही है। लेकिन उसी योजना के तहत शादी करने वाले दंपती को गांव का 'ठेकेदार' बहिष्कृत कर देता है। यह किस समाज की तस्वीर है? अब गेंद प्रशासन के पाले में है। देखना होगा कि सागर कलेक्टर (सागर जिला) इन दबंगों पर कब और कितनी सख्त कार्रवाई करते हैं, या यह शिकायत भी फाइलों में दफन हो जाएगी।
क्या है कल्याणी विवाह योजना?
मुख्यमंत्री कल्याणी विवाह सहायता योजना मध्य प्रदेश सरकार की एक पहल है। इसके तहत विधवा महिलाओं की शादी को प्रोत्साहित किया जाता है। सरकार आर्थिक सहायता देकर ऐसी महिलाओं को नई जिंदगी शुरू करने में मदद करती है। राजेंद्र ने इसी योजना का लाभ उठाकर एक सामाजिक कदम उठाया।
यह खबर क्यों जरूरी है
यह खबर कई वजहों से अहम है। पहली बात, यह मामला भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 यानी जीने के अधिकार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से सीधे जुड़ा है। सामाजिक बहिष्कार एक व्यक्ति की गरिमा और स्वतंत्रता पर हमला है। दूसरी बात, सरकार की कल्याणी विवाह सहायता योजना विधवा महिलाओं के उत्थान के लिए बनी है, लेकिन अगर योजना का लाभ लेने वालों को ही सामाजिक दंड मिले तो योजना का उद्देश्य विफल हो जाता है। तीसरी बात, एक मासूम बच्ची का सामाजिक बहिष्कार उसके मानसिक विकास पर गहरा असर डाल सकता है जो बाल अधिकारों का उल्लंघन है। यह खबर समाज और प्रशासन दोनों को आईना दिखाती है।
FAQ
- मुख्यमंत्री कल्याणी विवाह सहायता योजना क्या है?
मुख्यमंत्री कल्याणी विवाह सहायता योजना मध्य प्रदेश सरकार की एक कल्याणकारी योजना है। इसका मकसद विधवा महिलाओं को दोबारा शादी के लिए प्रोत्साहित करना और उन्हें आर्थिक मदद देना है। इस योजना के तहत सरकार शादी के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है ताकि विधवा महिलाएं सम्मान के साथ नई जिंदगी शुरू कर सकें। - सामाजिक बहिष्कार के खिलाफ भारत में क्या कानून है?
भारत में सामाजिक बहिष्कार के खिलाफ कई कानूनी प्रावधान हैं। IPC (Indian Penal Code) की धारा 504 और 506 धमकी और मानसिक प्रताड़ना पर लागू होती हैं। कई राज्यों में जाति पंचायत या सामाजिक बहिष्कार के खिलाफ अलग से कानून भी बने हैं। पीड़ित व्यक्ति पुलिस में FIR (First Information Report) दर्ज करा सकता है और जिला प्रशासन से संरक्षण मांग सकता है।
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