सागर दलित हत्याकांड : सुप्रीम कोर्ट सख्त, CBI जांच के आदेश, पूर्व गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह की बढ़ सकती हैं मुश्किलें
News in Short
- सुप्रीम कोर्ट ने सागर के दलित परिवार से जुड़े हत्याकांड और अंजना की संदिग्ध मौत की CBI से प्रारंभिक जांच कराने का आदेश दिया।
- एक साल के भीतर एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत से अदालत ने गंभीर चिंता जताई।
- अदालत ने CBI को दो महीने में जांच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।
- पीड़ित परिवार का आरोप, आरोपियों को पूर्व गृह मंत्री और स्थानीय रसूखदारों का संरक्षण मिला।
- अंजना की मौत से पहले पुलिस सुरक्षा हटाई गई और CCTV भी बंद मिले, जिससे कई सवाल खड़े हो गए।
News in Detail
मध्यप्रदेश के सागर जिले में दलित परिवार पर हुए अत्याचार और इंसाफ की लड़ाई लड़ रही युवती अंजना अहिरवार की संदिग्ध मौत के मामले में अब देश की सबसे बड़ी अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है।
सुप्रीम कोर्ट ने पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए Central Bureau of Investigation (CBI) को प्रारंभिक जांच (Preliminary Inquiry) करने के आदेश दिए हैं। इस फैसले के बाद पीड़ित परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों के चलते मध्यप्रदेश के पूर्व गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह की राजनीतिक मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं।
2019 से शुरू हुई दर्दनाक कहानी
सागर जिले के बरौदिया नौनागिर गांव में इस पूरे विवाद की शुरुआत साल 2019 में हुई। उस समय 15 वर्षीय दलित किशोरी अंजना अहिरवार के साथ गांव के कुछ रसूखदार लोगों ने छेड़छाड़ और मारपीट की थी। अंजना ने हिम्मत दिखाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन इसके बाद से ही परिवार पर केस वापस लेने और समझौता करने के लिए लगातार दबाव बनाया जाने लगा। पीड़ित परिवार का आरोप है कि शुरुआत से ही प्रभावशाली लोगों के दबाव के कारण पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और आरोपियों के खिलाफ सख्त धाराएं भी नहीं लगाईं।
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केस वापस न लेने पर भाई की बेरहमी से हत्या
अंजना के परिवार ने जब समझौते से इनकार कर दिया, तो अगस्त 2023 में स्थिति और भयावह हो गई। 24 अगस्त 2023 को अंजना के 18 वर्षीय भाई नितिन उर्फ लालू अहिरवार को बाजार में घेरकर आरोपियों ने बेरहमी से पीट-पीटकर मार डाला। बताया जाता है कि जब उसकी मां उसे बचाने के लिए पहुंची तो आरोपियों ने उन्हें भी निर्वस्त्र कर पीटा, जिससे उनका हाथ टूट गया। इसके बाद हमलावरों ने परिवार के घर में तोड़फोड़ की और उनके पालतू जानवरों तक को नहीं छोड़ा।
मुख्य गवाह की भी कर दी गई हत्या
नितिन की हत्या के बाद मामले में एक और बड़ा मोड़ आया। अंजना के चचेरे भाई राजेंद्र अहिरवार, जो इस केस के मुख्य गवाह थे, पर 25 मई 2024 को कुल्हाड़ी और लाठियों से हमला किया गया। हमले में गंभीर रूप से घायल राजेंद्र को अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। इस घटना ने पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया।
पोस्टमार्टम से लौटते समय अंजना की संदिग्ध मौत
सबसे चौंकाने वाली घटना तब हुई जब राजेंद्र का पोस्टमार्टम करवाकर लौट रही अंजना की पुलिस कस्टडी में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। पुलिस का दावा है कि वह चलती एम्बुलेंस या वाहन से गिर गई या कूद गई थी। लेकिन परिवार का आरोप है कि यह हत्या है, ताकि पूरे केस को कमजोर किया जा सके और गवाह खत्म हो जाएं।
सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस की भूमिका पर जताई चिंता
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने घटनाक्रम को बेहद गंभीर बताया। अदालत ने कहा कि एक ही परिवार के गवाहों और सदस्यों की लगातार मौतें सामान्य घटना नहीं हो सकतीं। इसी कारण अदालत ने CBI को प्रारंभिक जांच का आदेश देते हुए यह भी जांच करने को कहा है कि क्या इस पूरे मामले में पुलिस और प्रशासन की ओर से लापरवाही या मिलीभगत रही है।
पूर्व गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह पर लगे आरोप
इस पूरे मामले में पीड़ित परिवार लगातार आरोप लगाता रहा है कि मुख्य आरोपियों को पूर्व गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह और स्थानीय रसूखदारों का संरक्षण मिला हुआ था।
परिवार का दावा है कि इसी राजनीतिक दबाव के कारण शुरुआती एफआईआर में मुख्य आरोपियों के नाम तक दर्ज नहीं किए गए और पुलिस ने कई बार कार्रवाई टालने की कोशिश की।
सुरक्षा हटने और बंद CCTV ने बढ़ाए शक
अंजना की संदिग्ध मौत से ठीक दस दिन पहले पुलिस ने परिवार को दी गई सुरक्षा हटा ली थी। इसके अलावा उनके घर के बाहर लगे CCTV कैमरे भी उस समय बंद पाए गए, जिन्हें बाद में तकनीकी खराबी बताया गया। इन परिस्थितियों ने पूरे मामले को और अधिक संदिग्ध बना दिया और इसी कारण सुप्रीम कोर्ट ने स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने को जरूरी माना।
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अब CBI जांच पर टिकी देश की नजर
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब पूरे मामले की जिम्मेदारी CBI पर आ गई है। एजेंसी को दो महीने के भीतर यह पता लगाना होगा कि इस पूरे घटनाक्रम में हत्या, साजिश या प्रशासनिक लापरवाही का कोई बड़ा एंगल तो नहीं है। अगर प्रारंभिक जांच में गंभीर गड़बड़ियां सामने आती हैं, तो इस मामले में CBI की नियमित FIR दर्ज कर बड़े स्तर पर कार्रवाई भी हो सकती है। यह फैसला उन दलित परिवारों के लिए भी उम्मीद की किरण माना जा रहा है, जो प्रभावशाली लोगों के खिलाफ न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं।