मध्यावधि 2026: सागर संभाग में विधायक से खुश, सरकार से नाराज जनता

The Sootr | Jun 15, 2026, 14:58 IST
सागर संभाग
सागर संभाग: 13 जून 2026 को मध्यप्रदेश की मोहन यादव सरकार का आधा सफर पूरा हो गया। ढाई साल बीत गए। अब उल्टी गिनती शुरू है। और ठीक इसी दौरान thesootr लेकर आया है मध्यप्रदेश के इतिहास का सबसे बड़ा और विश्वसनीय सर्वे…

मध्यप्रदेश की हर विधानसभा से डेटा लेकर तैयार किए गए इस सर्वे में जानिए... सागर संभाग के लोगों के मन की बात… और हां! ये सर्वे किसी तरह की घोषणा नहीं करता सिर्फ प्राप्त आंकड़ों से परसेप्शन बताता है।



हमने पूछे सिर्फ तीन सवाल

  1. क्या आप अपने विधायक से संतुष्ट हैं?
  2. BJP और डॉ. मोहन यादव की सरकार से संतुष्ट हैं या नहीं?
  3. क्या कांग्रेस प्रदेश में active दिखती है?

तो पहली बार हर नागरिक जान सकेगा

  • उसके अपने जिले का मूड क्या है
  • उसके विधायक को जनता पास करती है या फेल
  • मोहन यादव सरकार के बारे में उसके इलाके की राय क्या है
  • कांग्रेस जनता को active दिखती है या नहीं
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मध्यावधि 2026: सागर संभाग thesootr Survey

      मध्य प्रदेश के सागर संभाग में जनता का मूड साफ नजर आ रहा है। यह संभाग 26 विधानसभा सीटों का है। इसमें 5 जिले शामिल हैं, सागर, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और पन्ना। अभी इस संभाग में बीजेपी के पास 21 सीटें हैं। कांग्रेस के पास सिर्फ 5 सीटें हैं।



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      विधायक पर भरोसा ज्यादा

      सर्वे के नतीजे चौंकाने वाले हैं। संभाग में विधायक संतुष्टि का औसत 40% है। यह सरकार संतुष्टि से साढ़े चार अंक ज्यादा है। सरकार से संतुष्ट लोगों का औसत सिर्फ 35.5% है। मतलब लोग अपने नेता और सरकार को अलग नजर से देख रहे हैं। कांग्रेस सक्रियता का औसत 35.1% रहा। तीनों आंकड़े 35 से 40 फीसदी के बीच हैं। इसका मतलब है कोई भी पक्ष भारी बढ़त में नहीं है।



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      60% वोटर असमंजस में

      सर्वे एनालिसिस के मुताबिक लगभग 60% वोटर अभी तटस्थ या नाराज दिख रहे हैं। आने वाले चुनाव में यही तबका सबसे अहम रहेगा। सर्वे में साफ कहा गया है कि ये सभी आंकड़े तथ्य हैं। इनसे निकाला गया अंदाजा सिर्फ रुझान है, चुनावी भविष्यवाणी नहीं।



      सागर जिले का हाल

      सागर जिले में 8 सीटें हैं। यहां विधायक संतुष्टि का औसत 43.8% है, जो संभाग में सबसे ज्यादा है। लेकिन सरकार संतुष्टि का औसत सिर्फ 34.5% है। बंडा सीट सबसे आगे है। यहां बीजेपी विधायक वीरेंद्र सिंह लोधी को 52.6% लोगों ने पसंद किया। रहली में गोपाल भार्गव को 49.6% समर्थन मिला। बीना सीट पर अलग तस्वीर है। यहां कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे को 45% लोगों ने पसंद किया। लेकिन सरकार से संतुष्टि सिर्फ 25.8% रही, जो सबसे कम है। इसी सीट पर कांग्रेस सक्रियता भी सबसे ज्यादा, 44.2% दर्ज हुई।



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      छतरपुर में कांटे की टक्कर

      छतरपुर जिले में 6 सीटें हैं। यहां तीनों आंकड़े बाकी जिलों से ज्यादा हैं। विधायक संतुष्टि 41.2%, सरकार संतुष्टि 37.2% और कांग्रेस सक्रियता 39.1% दर्ज हुई। बिजावर और महाराजपुर में विधायकों को 48.7% समर्थन मिला। दोनों बीजेपी से हैं। छतरपुर सदर में सरकार संतुष्टि सबसे ज्यादा, 43.1% रही। लेकिन यहां कांग्रेस सक्रियता भी 42.3% तक पहुंच गई। राजनगर सीट सबसे कमजोर निकली। यहां विधायक अरविन्द पटैरिया को सिर्फ 24.3% समर्थन मिला। यह पूरे संभाग में सबसे कम है।



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      पन्ना और दमोह की तस्वीर

      पन्ना जिले में 3 सीटें हैं। यहां विधायक संतुष्टि 38.3% और सरकार संतुष्टि 33.9% रही। पन्ना सदर में सरकार संतुष्टि सिर्फ 26.4% रही, जो बड़ी चिंता है। गुनौर(एससी, Scheduled Caste) सीट पर कांग्रेस सक्रियता 41.7% तक पहुंच गई। यह जिले में सबसे ज्यादा है।



      दमोह जिले में चार सीटें हैं। यहां अनोखी बात देखने को मिली। सरकार संतुष्टि, यानी 37.4%, विधायक संतुष्टि से ज्यादा है। यह पूरे संभाग में दुर्लभ मामला है। जबेरा सीट सबसे कमजोर है। यहां विधायक धर्मेन्द्र सिंह लोधी को सिर्फ 26.4% समर्थन मिला।



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      टीकमगढ़ सबसे पीछे

      टीकमगढ़ जिले की हालत सबसे खराब है। यहां पांच सीटें हैं। तीनों मानकों में यह जिला संभाग में सबसे नीचे है। विधायक संतुष्टि का औसत 34.9% है। सरकार संतुष्टि 33.9% और कांग्रेस सक्रियता 33.3% रही। निवाड़ी ही एक सीट है जहां विधायक को 45.3% समर्थन मिला। पृथ्वीपुर में हालत चिंताजनक है। यहां विधायक नितेंद्र बृजेंद्र सिंह राठौर को सिर्फ 26.6% समर्थन मिला। कांग्रेस सक्रियता यहां 39.4% तक पहुंच गई। टीकमगढ़ सदर सीट पर भी कांग्रेस सक्रियता 41.9% रही। लेकिन यहां सरकार संतुष्टि सिर्फ 27.4% है।



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      आगे की रणनीति क्या हो

      सर्वे का निचोड़ साफ है। सत्तापक्ष की ताकत विधायकों की छवि में है। कमजोरी सरकार की छवि में दिख रही है। कांग्रेस अभी कुछ खास सीटों तक सिमटी है। इनमें छतरपुर, पन्ना, बीना और टीकमगढ़ शामिल हैं। आने वाले समय में इन्हीं सीटों पर फोकस बढ़ सकता है। जिन सीटों पर विधायक और सरकार दोनों की संतुष्टि कम है, वहां सबसे ज्यादा काम की जरूरत है। बीना, जबेरा, राजनगर, पन्ना सदर और पृथ्वीपुर जैसी सीटें इस सूची में आती हैं।



        FAQ

        1. सवाल: सागर संभाग सर्वे में सबसे ज्यादा विधायक संतुष्टि किस सीट पर मिली?
          जवाब: बंडा सीट पर बीजेपी विधायक वीरेंद्र सिंह लोधी को सबसे ज्यादा 52.6% समर्थन मिला है। यह पूरे सागर संभाग में सबसे ऊंचा आंकड़ा है। इसके बाद रहली सीट का नंबर आता है, जहां गोपाल भार्गव को 49.6% समर्थन मिला।
        2. सवाल: सागर संभाग में सरकार से सबसे कम संतुष्ट जनता किस सीट पर है?
          जवाब: बीना (एससी) सीट पर सरकार से संतुष्टि का आंकड़ा सिर्फ 25.8% है। यह संभाग की सबसे कमजोर सीट है। दिलचस्प बात यह है कि इसी सीट पर विधायक को 45% समर्थन मिला है, यानी नाराजगी सरकार से है, विधायक से नहीं।
        3. सवाल: सागर संभाग में कांग्रेस की सक्रियता सबसे ज्यादा कहां देखी गई?
          जवाब: बीना सीट पर कांग्रेस सक्रियता 44.2% दर्ज हुई, जो संभाग में सबसे ज्यादा है। इसके बाद छतरपुर (42.3%) और टीकमगढ़ सदर (41.9%) का नंबर आता है। ये तीनों सीटें कांग्रेस के लिए मजबूत पॉकेट मानी जा रही हैं।

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