सागर शराब कांड: राजकुमारी और परिवार को हाई कोर्ट से सुरक्षा
समझें क्या है पूरा मामला...
- सागर शराब कांड में राजकुमारी कुशवाहा और परिवार हाई कोर्ट पहुंचे।
- परिवार ने पुलिस कार्रवाई से सुरक्षा की मांग की थी।
- परिवार ने रात में तलाशी और धमकाने के आरोप लगाए।
- हाई कोर्ट ने पुलिस को अनावश्यक परेशान नहीं करने कहा।
- कोर्ट ने जांच जारी रखने की पुलिस को पूरी छूट दी।
राजकुमारी कुशवाहा और परिवार ने क्यों लगाई याचिका
सागर शराब कांड में हाई कोर्ट से नया आदेश आया है।। यह आदेश राजकुमारी कुशवाहा और उनके परिवार से जुड़ा है। परिवार ने पुलिस कार्रवाई से सुरक्षा की मांग की थी।
याचिका डब्ल्यूपी क्रमांक 38680/2026 के तहत दायर हुई। इस पर 18 सितंबर को जस्टिस हिमांशु जोशी ने सुनवाई की। आदेश 19 सितंबर को दोपहर 12 बजे सामने आया। याचिका संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दायर हुई थी। परिवार ने पुलिस कार्रवाई को लेकर अपनी आशंका बताई थी।
परिवार के छह सदस्यों ने भी मांगी सुरक्षा
याचिका राजकुमारी कुशवाहा समेत सात लोगों ने दायर की। इनमें राजकुमारी के परिवार के छह सदस्य शामिल हैं। याचिका में संदीप कुशवाह, नेहा कुशवाहा, लवली कुशवाहा, दिविषा कुशवाहा, सहस्त्रजीत कुशवाहा और सर्वज्ञ कुशवाहा भी याचिकाकर्ता हैं। परिवार ने अपने खिलाफ पुलिस कार्रवाई की आशंका जताई थी।
परिवार ने पुलिस पर क्या आरोप लगाए
याचिकाकर्ताओं ने रात में घर आने का आरोप लगाया। इसके अलावा उन्होंने रात में तलाशी लेने की बात भी कही।परिवार ने परेशान करने और धमकाने का आरोप लगाया।
साथ ही परिवार द्वारा डराने की कोशिश किए जाने का भी आरोप लगाया गया। याचिका में संपत्ति को लेकर भी आशंका जताई गई। परिवार ने आगे ऐसी कार्रवाई की आशंका जताई थी। इन आरोपों पर राज्य सरकार ने जवाब के लिए समय मांगा।
FIR में सिद्धार्थ कुशवाह का नाम कैसे आया
मामले में सिद्धार्थ कुशवाह का नाम भी सामने आया है। सिद्धार्थ राजकुमारी कुशवाहा के पुत्र बताए गए हैं। बिनाका थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। यह एफआईआर क्रमांक 98/2026 बताई गई है।
एफआईआर 6 सितंबर 2026 को दर्ज हुई थी। इसमें रोशन नामक व्यक्ति की मौत का मामला है। मौत अवैध शराब के सेवन से जुड़ी बताई गई है। याचिका में सिद्धार्थ के खिलाफ आरोपों पर सवाल उठाए गए।।वकील ने कहा कि आरोपों की जांच अभी जारी है।
बांदा की दूसरी FIR का भी दिया हवाला
याचिका में बांदा थाने की दूसरी FIR का जिक्र हुआ। यह FIR अपराध क्रमांक 658/2026 बताई गई है। याचिका के अनुसार इसमें सिद्धार्थ आरोपी नहीं हैं। वकील ने पुलिस की 9 सितंबर की प्रेस विज्ञप्ति भी बताई।
वकील ने उसमें सिद्धार्थ की भूमिका स्पष्ट नहीं होने की बात कही। हालांकि इन दावों पर अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है।मामले की जांच जारी रहना इस आदेश से प्रभावित नहीं होगा।
हाई कोर्ट ने परिवार को किस तरह सुरक्षा दी
जस्टिस हिमांशु जोशी ने अंतरिम राहत का आदेश दिया। कोर्ट ने सागर एसपी को खास निर्देश दिए हैं। एसपी को परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने कहा गया। परिवार को अनावश्यक पुलिस परेशान न करे।
तलाशी कानून के तय तरीके से ही होनी चाहिए। पूछताछ भी तय कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होनी चाहिए। किसी दूसरी कार्रवाई में भी कानून का पालन जरूरी होगा।कोर्ट ने पुलिस को नियमों के भीतर काम करने कहा।
पुलिस की जांच पर हाई कोर्ट ने रोक नहीं लगाई
बता दें कि हाई कोर्ट ने जांच रोकने का कोई आदेश नहीं दिया।जांच एजेंसी अपनी जांच जारी रख सकती है। कानून के तहत जरूरी कदम भी उठाए जा सकते हैं।
हर कार्रवाई तय प्रक्रिया के अनुसार करनी होगी। कोर्ट ने आरोपियों की भूमिका पर कोई राय नहीं दी। परिवार की सुरक्षा वाला आदेश जांच में बाधा नहीं बनेगा। कोर्ट ने निष्पक्ष जांच जारी रहने की बात साफ की।
अगली सुनवाई अक्टूबर में होगी
राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने का समय मिला है। अगली सुनवाई 5 अक्टूबर से शुरू सप्ताह में होगी। तब राज्य सरकार अपना पक्ष कोर्ट में रखेगी। इसके बाद मामले में आगे की स्थिति साफ होगी। फिलहाल परिवार को पुलिस कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा मिली है।
पिछली बुलडोजर कार्रवाई पर भी मिली थी राहत
इससे पहले सिद्धार्थ और राजकुमारी ने दूसरी याचिका लगाई थी। उसमें संपत्ति पर हो रही तोड़फोड़ रोकने की मांग थी। 17 सितंबर को जस्टिस विशाल मिश्रा ने सुनवाई की थी।
कोर्ट ने अगली सुनवाई तक आगे तोड़फोड़ रोक दी थी। याचिका में चारदीवारी टूटने की बात भी कही गई थी। संपत्ति का कुछ हिस्सा गिराने का दावा भी हुआ था। वह मामला डब्ल्यूपी क्रमांक 38309/2026 से जुड़ा है। उस मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर तय हुई थी।
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