जहरीली शराब कांड में होटल सील कर प्रशासन ने लूटी वाहवाही, HC में नहीं दिखा पाए सीलिंग का आदेश
प्रशासन सीलिंग से जुड़ा आदेश भी कोर्ट में पेश नहीं कर सका। इस पर हाई कोर्ट ने होटल जलसा की सील खोलने और वहां दोबारा कारोबारी गतिविधियां शुरू करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने साफ कहा है कि गुरुवार के आदेश के अगले दिन यानी 6 नवंबर तक होटल को अनसील कर दिया जाए।
पिछली सुनवाई में ही कोर्ट ने दिया था स्पष्ट संकेत
यह मामला पृथ्वी सिंह ठाकुर बनाम मध्य प्रदेश सरकार और अन्य से जुड़ा है। इस याचिका पर 5 नवंबर को हाई कोर्ट में जस्टिस मनिंदर एस. भट्टी की कोर्ट में सुनवाई हुई। इससे पहले 30 अक्टूबर को हुई सुनवाई में हाई कोर्ट ने प्रशासन को साफ कह दिया था कि अगली सुनवाई तक होटल को सील करने का आदेश पेश करना होगा। यदि आदेश पेश नहीं किया गया, तो कोर्ट होटल मालिक को अंतरिम राहत देने पर विचार करेगा। उस समय सरकार ने कोर्ट से आदेश पेश करने के लिए और समय मांगा था।
दोबारा समय मांगा, लेकिन आदेश फिर भी नहीं दिखा सका प्रशासन
5 नवंबर को सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से पैरवी कर रहीं पैनल लॉयर अलका सिंह ने सीलिंग आदेश के संबंध में निर्देश प्राप्त करने के लिए फिर समय मांगा। वहीं याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रकाश उपाध्याय ने कोर्ट का ध्यान पिछले आदेश की ओर दिलाया। उन्होंने कहा कि प्रशासन को पर्याप्त समय दिया जा चुका है, लेकिन अब तक सीलिंग का आदेश पेश नहीं किया गया। ऐसे में याचिकाकर्ता अंतरिम राहत पाने का हकदार है।
कोर्ट ने होटल खोलने के दिए निर्देश
हाई कोर्ट ने माना कि पिछली सुनवाई में दिए गए निर्देश के बावजूद राज्य सरकार सीलिंग का आदेश पेश नहीं कर सकी है। इसलिए याचिकाकर्ता अंतरिम राहत पाने का हकदार है। कोर्ट ने प्रतिवादियों को निर्देश दिया कि 6 नवंबर तक होटल जलसा को सील मुक्त कर दिया जाए। साथ ही याचिकाकर्ता को अगली सुनवाई तक होटल में व्यावसायिक गतिविधियां जारी रखने की अनुमति दी गई है। मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी।
जहरीली शराब कांड के बाद प्रशासन ने की थी बड़ी कार्रवाई
दरअसल, सागर के बंडा-बहेरिया क्षेत्र में जहरीली शराब कांड के बाद पुलिस, आबकारी विभाग और जिला प्रशासन ने अवैध शराब नेटवर्क के खिलाफ अभियान चलाया था। इस दौरान बहेरिया स्थित होटल जलसा पर भी प्रशासन ने कार्रवाई की थी। जांच के नाम पर होटल के दस्तावेजों, लाइसेंस और परिसर की पड़ताल की गई थी। प्रशासन ने नियमों के उल्लंघन और अवैध गतिविधियों के संदेह को आधार बनाकर होटल को सील कर दिया था।
होटल जलसा के साथ दूसरे ठिकानों पर भी हुई थी कार्रवाई
जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद चलाए गए एंटी माफिया अभियान में होटल जलसा के अलावा सत्यम होटल, पाथवे रेस्टोरेंट और स्वरुचि इन जैसे प्रतिष्ठानों पर भी कार्रवाई की गई थी। कुछ स्थानों पर सीलिंग तो कुछ पर बुलडोजर कार्रवाई की गई थी। प्रशासन ने इन कार्रवाइयों को अवैध शराब के नेटवर्क पर शिकंजा कसने की बड़ी कार्रवाई के रूप में पेश किया था।
अब प्रशासन को बताना होगा, किस आदेश पर सील किया था होटल
हाई कोर्ट के इस आदेश ने होटल जलसा को सील करने की प्रशासनिक कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल कोर्ट ने सीलिंग की कार्रवाई को अंतिम रूप से अवैध घोषित नहीं किया है, बल्कि आदेश पेश नहीं होने के कारण याचिकाकर्ता को अंतरिम राहत दी है। अब प्रशासन को अगली सुनवाई में अपनी कार्रवाई का कानूनी आधार स्पष्ट करना होगा। सवाल यह भी है कि जिस कार्रवाई को लेकर प्रशासन ने सख्ती का संदेश दिया, उसका जरूरी आदेश कोर्ट के सामने समय पर क्यों नहीं रखा जा सका?