मौत के साए में भी नहीं छूट पाई लत, सागर में अब भी छलक रहे जहरीली शराब के जाम
समझें क्या है पूरा मामला...
- सागर के बांदा में जहरीली शराब से मौतें रुक नहीं रहीं।
- मौतों की खबर के बाद भी कई गांवों में शराब पीना जारी रहा।
- सोमवार को 9 और मौतों के साथ आंकड़ा 24 तक पहुंच गया।
- अस्पताल में भर्ती मरीजों की संख्या 160 के पार जा चुकी है।
- पुलिस-शराब माफिया गठजोड़ और प्रशासन के आदेश पर भी सवाल उठे हैं।
मध्य प्रदेश के सागर जिले से बड़ी खबर आ रही है। यहां जहरीली शराब ने कई परिवारों को तबाह कर दिया है। बांदा इलाके में मौतों का सिलसिला रुक नहीं रहा। हैरानी की बात यह है कि मौतों की खबर के बाद भी लोगों ने शराब पीना नहीं छोड़ा। कुछ लोग तो अस्पताल से इलाज कराकर लौटे। इसके बाद उन्होंने फिर शराब पी ली। इसका नतीजा भी बहुत बुरा निकला।
फिर क्यों बढ़ीं मौतें
डॉक्टर मरीजों की जान बचाने में जुटे थे, लेकिन गांवों में शराब की सप्लाई नहीं रुकी। कुछ मरीजों ने इलाज के बाद फिर शराब पी ली। एक डॉक्टर ने नाम न बताने की शर्त पर बताया। उन्होंने कहा कि एक मरीज को 6 सितंबर सुबह छुट्टी मिली थी। शाम को वह फिर शराब पीकर अस्पताल पहुंचा। उसकी हालत तेजी से बिगड़ी। डॉक्टर उसे बचा नहीं सके।
अस्पताल में मरीजों का हाल
बांदा सिविल अस्पताल के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ योगेंद्र खटीक ने अहम जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 6 सितंबर को 100 से ज्यादा मरीज पहुंचे। सोमवार दोपहर तक 60 से ज्यादा नए मरीज और आए। कई मरीजों ने 5 सितंबर के बाद भी शराब पी थी।
कुछ को मौतों की खबर पहले से पता थी। फिर भी उन्होंने शराब पीना बंद नहीं किया। एक अन्य डॉक्टर ने बताया कि कुछ मरीजों में लक्षण देर से दिख रहे हैं। यह हालात को और खतरनाक बना रहा है।
रविवार सुबह से सोमवार शाम तक 140 से ज्यादा मरीज अस्पताल पहुंचे। इनमें 50 से ज्यादा का इलाज अभी चल रहा है। 13 मरीज आईसीयू (Intensive Care Unit) में भर्ती हैं। सोमवार को 11 मरीजों का डायलिसिस भी करना पड़ा।
किन-किन ने गंवाई जान
सागर में कई परिवारों पर दोहरी मुसीबत आई। गुरारा खुर्द गांव के सुनील नाम के युवक की मौत हो गई। वह एक अंत्येष्टि से लौटकर शराब पी बैठा था। छापवा गांव के कैलाश ने भी पिता का अंतिम संस्कार करने के बाद शराब पी ली। दोनों की जान चली गई। छापरी गांव की श्यामाबाई अहिरवार को किसी ने मुफ्त शराब दी थी। रविवार शाम शराब पीने के बाद वह सोमवार सुबह नहीं उठ सकीं।
बामौर मेड़ा गांव के गोविंद की रविवार को इलाज के दौरान मौत हो गई। उनके बेटे रामप्रसाद को प्रशासन ने एयरलिफ्ट कराया। उन्हें भोपाल के एम्स (All India Institute of Medical Sciences) भेजा गया। लेकिन देर रात उनकी भी मौत हो गई।
एक और मामला बेहद चौंकाने वाला है। एक मरीज ने डॉक्टर को बताया कि शराब पीने के बाद वह पूरे दिन खेत में पड़ा रहा। जब उसने मौतों की मुनादी सुनी तो अस्पताल जाने निकला। रास्ते में उसे सांप ने काट लिया। तड़पते हुए उसकी जान चली गई।
पुलिस-माफिया सांठगांठ का सच
इस मामले में पुलिस और शराब कारोबारियों की मिलीभगत के सवाल भी उठे हैं। बरयाठा थाना क्षेत्र के आदान गांव के ब्रजेश महाराज ने बड़ा आरोप लगाया। उनका कहना है कि उनके घर के सामने अवैध शराब बिकती थी। वे दो महीने से शिकायत कर रहे थे। उन्होंने पुलिस चौकी से लेकर बड़े अफसरों तक बात पहुंचाई।
31 अगस्त को उन्होंने एसपी को सीसीटीवी फुटेज भी सौंपे। इन फुटेज में रात और सुबह गाड़ियों से शराब की पेटियां उतरती दिख रही हैं। एसडीओपी ने कार्रवाई का भरोसा भी दिया था। लेकिन ब्रजेश का आरोप है कि शिकायत के बाद परिवार को धमकाया गया।
जुलाई में शिकायत करने पर उन्हीं के खिलाफ मामला दर्ज हुआ। यह मामला एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज कराया गया। ब्रजेश का दावा है कि यह मामला झूठा है। सवाल यही उठता है कि सबूत होने पर भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
आदेश पर उठे सवाल
मामले में प्रशासन के एक आदेश ने भी विवाद खड़ा कर दिया। मौतों के बाद कमिश्नर, आईजी, कलेक्टर और एसपी खुद मौके पर पहुंचे थे। इसके बावजूद आबकारी आयुक्त दीपक कुमार वस्तवा ने 6 सितंबर को आदेश जारी किया। आदेश में लिखा गया कि सोशल मीडिया और अखबारों में नकली शराब से मौतों की खबरें आ रही हैं।
लोगों को हैरानी इस बात पर है कि बड़े अफसर खुद मौके पर मौजूद थे। फिर भी सीधे तथ्य क्यों नहीं लिखे गए। आदेश में यह भी साफ नहीं किया गया कि जांच किन तथ्यों पर आधारित होगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे मामले को हल्का दिखाने की कोशिश हुई।
प्रशासन की कार्रवाई शुरू
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन हरकत में आया है। देर रात बांदा एसडीओपी और एसडीएम को पद से हटा दिया गया। पुलिस ने शराब तस्करों पर भी शिकंजा कसना शुरू किया। छापेमारी के डर से तस्करों ने बची हुई शराब खेतों में फेंक दी। कहीं शराब कौड़ियों के दाम बेची गई तो कहीं मुफ्त बांट दी गई।
यही शराब पीकर सोमवार को 9 और लोगों की मौत हो गई। हालांकि प्रशासन ने अभी सभी मौतों की पुष्टि नहीं की है। पुलिस कमिश्नर जयवीर सिंह भदौरिया की अगुआई में जांच तेज हो गई है। अब तक अवैध शराब कारोबार में 14 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। पुलिस मुख्यालय ने भी सागर एसपी और डीआईजी की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
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