सहारा रिफंड क्लेम का मौका अभी बाकी, हाईकोर्ट में सरकार ने बताई बड़ी राहत
ऐसे समझें क्या है पूरा मामला
• सहारा में फंसे निवेशकों के लिए रिफंड का रास्ता अभी बंद नहीं हुआ है।
• हाई कोर्ट में केंद्र सरकार ने बताया कि क्लेम पोर्टल अभी भी खुला है।
• जिन लोगों ने दावा नहीं किया, वे अब भी आवेदन कर सकते हैं।
• क्लेम जरूरी दस्तावेजों के साथ ऑनलाइन जमा करना होगा।
• सभी दावों पर सुप्रीम कोर्ट के तय नियमों के अनुसार फैसला होगा।
सहारा की सहकारी समितियों में पैसा जमा करने वाले लाखों लोगों के लिए राहत की खबर है। अगर आपने अब तक रिफंड के लिए क्लेम नहीं किया है, तो चिंता करने की जरूरत नहीं है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में केंद्र सरकार ने साफ बताया कि सहारा रिफंड पोर्टल अभी भी चालू है। यानी पात्र निवेशक अब भी अपना दावा ऑनलाइन जमा कर सकते हैं।
सहारा निवेशकों ने दायर की थी याचिका
यह मामला मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर पीठ में सुना गया। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। अपील उन निवेशकों की ओर से दायर हुई थी, जिनकी पहले याचिका खारिज हो गई थी। वजह यह थी कि उन्होंने सहारा रिफंड पोर्टल पर अपना दावा ही जमा नहीं किया था।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा था कि क्या पोर्टल अभी भी चालू है। सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि पोर्टल अब भी खुला है। पात्र निवेशक जरूरी दस्तावेजों के साथ अपना क्लेम ऑनलाइन जमा कर सकते हैं। इसके बाद हाई कोर्ट ने कहा कि ऐसे दावों पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार विचार किया जाएगा। इसी आधार पर कोर्ट ने रिट अपील का निपटारा कर दिया।
जिन लोगों ने क्लेम नहीं किया, उनके लिए क्या मतलब है
इस आदेश का सबसे बड़ा फायदा उन निवेशकों को मिलेगा, जिन्होंने किसी कारण से पहले आवेदन नहीं किया। अब वे जरूरी दस्तावेज जुटाकर ऑनलाइन दावा कर सकते हैं। हालांकि सिर्फ आवेदन करना ही काफी नहीं होगा। हर क्लेम की जांच होगी। पहचान, जमा राशि और दस्तावेजों का मिलान किया जाएगा। सही पाए जाने पर ही रिफंड की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले क्या आदेश दिया था
इस मामले की शुरुआत सुप्रीम कोर्ट के अहम आदेश से हुई थी। केंद्र सरकार ने अदालत से सहारा-सेबी रिफंड खाते में पड़ी राशि का हिस्सा निवेशकों को लौटाने की अनुमति मांगी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने माना कि हजारों करोड़ रुपये लंबे समय से बिना उपयोग पड़े हैं। इनमें सहारा की सहकारी समितियों के जमाकर्ताओं का पैसा भी शामिल है। इसलिए वास्तविक निवेशकों को राहत मिलनी चाहिए। इसके बाद कोर्ट ने सहारा-सेबी रिफंड खाते से 5000 करोड़ रुपए केंद्रीय रजिस्ट्रार को देने की अनुमति दी। यह राशि केवल सही निवेशकों को लौटाई जाएगी।
कैसे मिलेगा रिफंड
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि भुगतान पूरी पारदर्शिता से होगा। हर निवेशक की पहचान और जमा का रिकॉर्ड जांचा जाएगा। इसके बाद पैसा सीधे बैंक खाते में भेजा जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी को सौंपी गई थी। उनके साथ वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव अग्रवाल को न्याय मित्र बनाया गया था।
किन लोगों को सबसे ज्यादा ध्यान देने की जरूरत
अगर आपने सहारा इंडिया की संबंधित सहकारी समितियों में पैसा जमा किया था और अभी तक क्लेम नहीं किया है, तो यह जानकारी आपके लिए सबसे अहम है। दावा करने से पहले अपने जमा प्रमाण, पहचान पत्र और जरूरी दस्तावेज तैयार रखें। सही जानकारी के साथ आवेदन करना जरूरी है। गलत या अधूरे दस्तावेज रिफंड में देरी कर सकते हैं।
हाईकोर्ट के आदेश का बड़ा संदेश
हाईकोर्ट ने अपने आदेश से साफ कर दिया कि केवल समय निकल जाने की वजह से हर निवेशक का अधिकार खत्म नहीं होता। अगर पोर्टल चालू है, तो पात्र निवेशकों को दावा करने का अवसर मिलना चाहिए। अब उन लोगों के लिए रास्ता खुला है, जिन्होंने पहले आवेदन नहीं किया था। ऐसे निवेशक जल्द से जल्द अपना क्लेम जमा कर सकते हैं ताकि उनका दावा नियमों के अनुसार जांचा जा सके।
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