संपदा-2 में होल्ड का खेल? लाखों रजिस्ट्रियां अटकीं, ग्वालियर-इंदौर से बढ़ीं शिकायतें

Ramanand Tiwari | Apr 30, 2026, 24:05 IST
sampada-2
मध्य प्रदेश में संपदा-2 सॉफ्टवेयर के लागू होने के बाद प्रॉपर्टी रजिस्ट्री की प्रक्रिया में होल्ड के कारण देरी हो रही है। ग्वालियर और इंदौर जैसे शहरों में सबसे ज्यादा शिकायतें सामने आई हैं, जिससे सिस्टम की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।

मध्यप्रदेश में प्रॉपर्टी रजिस्ट्री को आसान बनाने के लिए लागू संपदा-2 सॉफ्टवेयर अब चर्चा में है। बड़ी संख्या में रजिस्ट्रियों के “होल्ड” पर जाने से प्रक्रिया की गति प्रभावित हुई है। खासतौर पर ग्वालियर और इंदौर जैसे क्षेत्रों से ज्यादा शिकायतें सामने आने के बाद व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।



रजिस्ट्री में देरी की बड़ी तस्वीर

वित्त वर्ष 2025-26 में प्रदेश में 14.50 लाख से ज्यादा रजिस्ट्रियां हुईं। इनमें से 5 लाख से अधिक मामलों को किसी न किसी वजह से होल्ड पर रखा गया। 42 हजार 971 केस ऐसे रहे, जो एक दिन से ज्यादा समय तक लंबित रहे। बड़ी संख्या में फाइलें तय समय सीमा से बाहर रहीं। ये आंकड़े बताते हैं कि सिस्टम पूरी तरह सुचारु नहीं चल पा रहा है।



संपदा-2 का मकसद क्या था?

संपदा-2 को पारदर्शिता और तेजी लाने के उद्देश्य से लागू किया गया था। सरकार का दावा था कि इससे फर्जी रजिस्ट्री पर रोक लगेगी और प्रक्रिया ऑनलाइन होने से आम लोगों को राहत मिलेगी। लेकिन जमीनी स्थिति इन दावों से अलग तस्वीर दिखा रही है।



होल्ड करने के नियम क्या कहते हैं?

सॉफ्टवेयर के तहत स्पष्ट गाइडलाइन तय की गई हैं। दस्तावेज में कमी हो तो उसे आवेदक को वापस भेजना होगा। जटिल मामलों को कारण सहित जिला पंजीयक के पास भेजना अनिवार्य है। एक उप-पंजीयक सीमित संख्या में ही रजिस्ट्री होल्ड कर सकता है। नियम साफ हैं, लेकिन पालन पर सवाल उठ रहे हैं।



जमीनी हकीकत

जानकारों के मुताबिक, कई जगह तय प्रक्रिया का पालन नहीं हो रहा है। रजिस्ट्रियां सीधे अधिकारियों की आईडी पर होल्ड रखी जा रही हैं, जिससे फाइलें लंबित हो रही हैं। इसी वजह से कई जिलों से शिकायतों का सिलसिला लगातार जारी है।



ग्वालियर–इंदौर में ज्यादा शिकायतें क्यों?

रिपोर्ट्स के अनुसार, ग्वालियर और इंदौर रीजन में उप-पंजीयकों की कार्यप्रणाली को लेकर सबसे ज्यादा शिकायतें सामने आई हैं।रजिस्ट्रियों को लंबे समय तक होल्ड रखने के आरोप हैं। प्रक्रिया में अनावश्यक देरी की शिकायतें मिल रही हैं। नियमों के अनुरूप कार्रवाई न होने की बातें सामने आ रही हैं। यह ट्रेंड बताता है कि कुछ क्षेत्रों में निगरानी की जरूरत ज्यादा है।



क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

राजस्व मामलों के जानकार मानते हैं कि संपदा-2 के बाद रजिस्ट्री होल्ड करने के कारण सीमित हो गए हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में मामलों का लंबित रहना सिस्टम की मॉनिटरिंग और क्रियान्वयन पर सवाल उठाता है।



डिजिटल सिस्टम को मजबूत निगरानी की जरूरत

संपदा-2 ने प्रक्रिया को ऑनलाइन जरूर किया है, लेकिन इसके साथ जवाबदेही और मॉनिटरिंग को और मजबूत करना जरूरी है। यदि नियमों का सख्ती से पालन हो और होल्ड मामलों की नियमित समीक्षा की जाए, तो यह सिस्टम अपने मकसद तेज और पारदर्शी रजिस्ट्री को बेहतर तरीके से पूरा कर सकता है।



ये खबरें भी पढ़ें...

मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजना; निजी जमीन पर पेड़ लगाकर बनें लखपति, सरकार देगी पूरा खर्चा और बिक्री की गारंटी भी



राजगामी संपदा समिति में नई नियुक्तियां, राजनांदगांव की रियासतकालीन विरासत को मिले नए सारथी



एमपी के भोपाल में प्रोफेसर सीख रहे हैं- कैसे बचाएं अपनी बौद्धिक संपदा, विशेषज्ञों ने कहा- समय रहते कराएं पेटेंट



मध्य प्रदेश में अब जमीन के नामांतरण की प्रक्रिया होगी आसान, प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन के लिए संपदा-2.0 सॉफ्टवेयर लॉन्च





Tags:
  • मध्यप्रदेश
  • एमपी
  • इंदौर
  • ग्वालियर
  • संपदा-2.0