MP में बन रहा अनोखा सैनिक स्कूल: 40 एकड़ में ऊं आकार का कैंपस, घुड़सवारी से शूटिंग तक मिलेगी ट्रेनिंग

Anshika Singh Chauhan | Oct 12, 2026, 12:34 IST
नर्मदा किनारे 40 एकड़ में बन रहा सम्राट विक्रमादित्य सैनिक स्कूल, घुड़सवारी और शूटिंग की मिलेगी ट्रेनिंग
MP Sainik School News: मध्य प्रदेश में नर्मदा किनारे एक ऐसा सैनिक स्कूल तैयार हो रहा है, जहां बच्चे किताबों के साथ सैन्य प्रशिक्षण भी लेंगे। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका ऊं आकार का कैंपस है। यहां छठवीं से बारहवीं तक के बच्चों को पढ़ाई के साथ घुड़सवारी और शूटिंग जैसी गतिविधियों की ट्रेनिंग देने की योजना है। स्कूल में हॉस्टल समेत कई आधुनिक सुविधाएं भी होंगी।
An illustrative view of the upcoming Samrat Vikramaditya Sainik School in Budhni, Madhya Pradesh, featuring a unique Om-shaped campus, modern classrooms, hostels, horse riding facilities, and shooting training facilities across 40 acres near the Narmada River.

स्कूल की 5 बड़ी खासियत

40 एकड़ का कैंपस: बड़े परिसर में स्कूल और प्रशिक्षण की सुविधाएं होंगी।



ऊं आकार की डिजाइन: भारतीय संस्कृति से प्रेरित कैंपस तैयार किया जा रहा है।



छठवीं से सैन्य शिक्षा: कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों को प्रशिक्षण मिलेगा।



घुड़सवारी और शूटिंग: कैंपस में दोनों गतिविधियों के लिए सुविधाएं प्रस्तावित हैं।



आवासीय व्यवस्था: विद्यार्थियों के लिए हॉस्टल की सुविधा होगी।



ऊं के आकार में तैयार हो रहा सैनिक स्कूल

मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में बन रहा सम्राट विक्रमादित्य सैनिक स्कूल अपनी खास डिजाइन के कारण चर्चा में है। बुदनी के बगवाड़ा में तैयार हो रहे इस स्कूल का परिसर करीब 40 एकड़ में फैला होगा।



इसकी सबसे दिलचस्प बात यह है कि स्कूल का कैंपस ऊं के आकार में बनाया जा रहा है। भारतीय संस्कृति से जुड़े इस प्रतीक को पूरे परिसर की डिजाइन का हिस्सा बनाया गया है।



यहां एक ही जगह बच्चों की पढ़ाई और सैन्य प्रशिक्षण की व्यवस्था होगी। परिसर में स्कूल भवन के अलावा हॉस्टल और खेलकूद से जुड़ी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।



छठवीं क्लास से शुरू होगी सैन्य शिक्षा

इस स्कूल में छठवीं से बारहवीं तक के विद्यार्थी पढ़ाई कर सकेंगे। बच्चों को सामान्य स्कूली शिक्षा के साथ सैन्य प्रशिक्षण देने की तैयारी है।



खास बात यह है कि इसके लिए बच्चों को बारहवीं कक्षा तक इंतजार नहीं करना होगा। छठवीं कक्षा से ही उन्हें अनुशासन और शारीरिक प्रशिक्षण से जुड़ी गतिविधियों (Physical training activities) का अनुभव मिल सकेगा।



स्कूल में पढ़ाई के साथ बच्चों की फिटनेस और पर्सनालिटी डेवलपमेंट पर भी ध्यान दिया जाएगा। इससे आगे चलकर सेना में जाने की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को फायदा मिलेगा।



घुड़सवारी सीखने का भी मिलेगा मौका

इस स्कूल की प्रमुख सुविधाओं में हॉर्स राइडिंग यानी घुड़सवारी भी शामिल है। इसके लिए कैंपस में व्यवस्था विकसित करने की योजना है। घुड़सवारी सिर्फ एक खेल नहीं है। इससे बच्चों में संतुलन और आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद मिलेगी। साथ ही वे नई चुनौतियों का सामना करना भी सीखेंगे।



सैनिक स्कूल में इस तरह की सुविधा बच्चों को सामान्य स्कूली गतिविधियों से अलग अनुभव देगी। खासकर उन विद्यार्थियों के लिए यह उपयोगी हो सकता है जो भविष्य में सेना या दूसरे रक्षा क्षेत्रों में करियर बनाना चाहते हैं।



शूटिंग रेंज भी होगी खास आकर्षण

सम्राट विक्रमादित्य सैनिक स्कूल में शूटिंग रेंज की सुविधा भी प्रस्तावित है। यहां विद्यार्थियों को निर्धारित सुरक्षा नियमों और प्रशिक्षकों की देखरेख में शूटिंग से जुड़ा प्रशिक्षण दिया जाएगा। शूटिंग एक ऐसा खेल है जिसमें एकाग्रता और धैर्य की जरूरत होती है। इसके लिए शरीर और दिमाग के बीच अच्छा तालमेल होना भी जरूरी है।



इस सुविधा से शूटिंग में दिलचस्पी रखने वाले बच्चों को अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर मिल सकता है। हालांकि शूटिंग रेंज की क्षमता और किस उम्र के विद्यार्थियों को प्रशिक्षण मिलेगा, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।



हॉस्टल में रहकर कर सकेंगे पढ़ाई

स्कूल में हॉस्टल की व्यवस्था भी होगी। इसका फायदा उन विद्यार्थियों को मिल सकेगा जो बाहर से पढ़ने के लिए आएंगे। आवासीय सुविधा होने से बच्चों को स्कूल परिसर में रहकर पढ़ाई करने का अवसर मिलेगा। उन्हें पढ़ाई और शारीरिक प्रशिक्षण के लिए अलग-अलग स्थानों पर आने-जाने की जरूरत कम होगी।



सैनिक स्कूलों में अनुशासित दिनचर्या का खास महत्व होता है। ऐसे माहौल में बच्चों को समय पर पढ़ाई और दूसरी गतिविधियों में हिस्सा लेने की आदत विकसित करने में मदद मिल सकती है।



नर्मदा किनारे तैयार हो रहा नया शिक्षा केंद्र

बुदनी का बगवाड़ा इलाका नर्मदा नदी के पास स्थित है। इसी क्षेत्र में सम्राट विक्रमादित्य सैनिक स्कूल (Samrat Vikramaditya Sainik School) बनाया जा रहा है।



नर्मदा किनारे बन रहा यह स्कूल अपनी भौगोलिक स्थिति (Geographical location) के कारण भी चर्चा में है। एक तरफ भारतीय संस्कृति से जुड़ा कैंपस डिजाइन होगा। दूसरी तरफ बच्चों को आधुनिक शिक्षा और सैन्य प्रशिक्षण से जुड़ी सुविधाएं मिलेंगी।



इस परियोजना से बुदनी और आसपास के क्षेत्रों में शिक्षा के नए अवसर बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही सैनिक स्कूल में पढ़ने की इच्छा रखने वाले परिवारों को एक नया विकल्प मिल जाएगा।



सेना में जाने का सपना देखने वालों को फायदा

कई बच्चे कम उम्र से ही भारतीय सेना में जाने का सपना देखते हैं। ऐसे बच्चों के लिए सैनिक स्कूल उपयोगी साबित हो सकते हैं। यहां पढ़ने वाले विद्यार्थी स्कूली शिक्षा के दौरान अनुशासन और फिटनेस जैसी जरूरी आदतें विकसित कर सकते हैं। इसका फायदा उन्हें भविष्य में रक्षा सेवाओं से जुड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान मिल सकता है।



हालांकि सैनिक स्कूल में पढ़ने का मतलब सेना में सीधे भर्ती होना नहीं है। सेना में अधिकारी बनने के लिए संबंधित प्रतियोगी परीक्षाओं और चयन प्रक्रिया को पूरा करना जरूरी होता है।



FAQs:

  1. सम्राट विक्रमादित्य सैनिक स्कूल की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं?
    सम्राट विक्रमादित्य सैनिक स्कूल की मुख्य विशेषताएँ इसमें 40 एकड़ का कैंपस, ऊं के आकार की डिजाइन, कक्षा 6 से 12 तक सैन्य शिक्षा का प्रशिक्षण, घुड़सवारी और शूटिंग की सुविधाएँ, तथा विद्यार्थियों के लिए हॉस्टल की व्यवस्था शामिल हैं।
  2. इस सैनिक स्कूल में किस कक्षा से सैन्य शिक्षा शुरू होगी?
    इस सैनिक स्कूल में छठी कक्षा से सैन्य शिक्षा शुरू होगी, जिससे विद्यार्थियों को प्रारंभ से ही अनुशासन और शारीरिक प्रशिक्षण का अनुभव प्राप्त होगा।
  3. क्या इस स्कूल में आवासीय व्यवस्था है?
    हाँ, इस स्कूल में हॉस्टल की व्यवस्था होगी, जिससे बाहर से आने वाले विद्यार्थियों को स्कूल परिसर में रहकर पढ़ाई और प्रशिक्षण करने का अवसर मिलेगा।
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