मंदिरों की लूट बंद हो, BJP विधायक चिंतामणि मालवीय ने उठाई सनातन बोर्ड की मांग
समझें क्या है पूरा मामला
- चिंतामणि मालवीय ने मंदिर संपत्ति पर विस्तृत वीडियो जारी किया।
- उन्होंने मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने की मांग की।
- मंदिर प्रबंधन के लिए सनातन बोर्ड बनाने का सुझाव दिया।
- बोर्ड में सभी सामाजिक वर्गों की भागीदारी प्रस्तावित की।
- मंदिरों की आय शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च करने की बात कही।
आलोट से भाजपा विधायक डॉ. चिंतामणि मालवीय फिर चर्चा में हैं। उन्होंने हिंदू मंदिरों की संपत्ति पर विस्तृत वीडियो जारी किया है। वीडियो का शीर्षक भारतीय मंदिर संपदा: शोषण और समाधान-एक विवेचन है। इसे उन्होंने अपने सोशल मीडिया खातों पर साझा किया है।
मालवीय ने मंदिरों की जमीन और आय पर सवाल उठाए। उन्होंने मंदिरों के सरकारी प्रबंधन की व्यवस्था पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने मंदिरों के लिए सनातन बोर्ड बनाने का प्रस्ताव रखा।
यह बोर्ड मंदिरों की संपत्ति और दान की निगरानी करेगा। मालवीय के अनुसार मंदिरों का नियंत्रण हिंदू समाज को लौटाना चाहिए। उनके प्रस्ताव में पारदर्शिता और सामाजिक भागीदारी पर जोर है।
दान से संपन्न हुए मंदिर
मालवीय ने भारतीय समाज की दान परंपरा का उल्लेख किया। उन्होंने इसे सहयोग, सेवा और करुणा से जुड़ी परंपरा बताया। उनके अनुसार धार्मिक अवसरों पर दान देना भारतीय संस्कृति का हिस्सा है। पुराने समय में राजाओं ने भी मंदिरों को संपत्ति दान की।
इससे कई मंदिर धीरे-धीरे बड़े धार्मिक केंद्र बन गए। ये मंदिर सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों के केंद्र भी रहे। मालवीय ने सोमनाथ मंदिर का ऐतिहासिक उदाहरण भी दिया। उन्होंने 1026 में महमूद गजनवी के हमले का उल्लेख किया।
मंदिर की जमीन का रिकॉर्ड
भाजपा विधायक ने मंदिरों की जमीन पर भी चिंता जताई। उन्होंने सभी जमीनों का स्पष्ट रिकॉर्ड बनाने की मांग की। उनके अनुसार जमीन का मालिकाना विवरण सार्वजनिक होना चाहिए। उसके मौजूदा उपयोग की जानकारी भी दर्ज होनी चाहिए। उन्होंने मंदिर संपत्ति की नियमित निगरानी का सुझाव दिया। इससे कब्जे और गलत इस्तेमाल को रोका जा सकेगा।
मालवीय ने ओडिशा और तमिलनाडु की व्यवस्थाओं का उल्लेख किया। उन्होंने उन राज्यों जैसी स्पष्ट व्यवस्था बनाने की वकालत की। उन्होंने मॉडल का विस्तृत कानूनी प्रारूप पेश नहीं किया। इसलिए प्रस्ताव की व्यावहारिक संरचना अभी स्पष्ट नहीं है। राज्यवार मंदिर कानून और प्रबंधन व्यवस्था अलग हो सकती है। किसी राष्ट्रीय बोर्ड के लिए व्यापक कानूनी चर्चा जरूरी होगी।
सरकारी नियंत्रण पर सवाल
मालवीय ने आजादी के बाद बने मंदिर कानूनों का उल्लेख किया। उन्होंने सरकारों की बढ़ती भूमिका पर सवाल उठाया।
कई राज्यों में मंदिर प्रबंधन के लिए अलग कानून लागू हैं। कुछ मंदिर समितियों में सरकारी अधिकारियों की भूमिका भी रहती है।
मालवीय ने इस व्यवस्था को बदलने का सुझाव दिया। उनके अनुसार मंदिर प्रबंधन श्रद्धालुओं और समाज के पास होना चाहिए। उन्होंने कहा कि दान धार्मिक भावना से दिया जाता है। इसलिए इसका उपयोग संबंधित धार्मिक कार्यों में होना चाहिए।
कैसा होगा सनातन बोर्ड
मालवीय के प्रस्ताव में सनातन बोर्ड केंद्रीय भूमिका निभाएगा। यह मंदिर संपत्ति और जमीन की निगरानी कर सकता है। बोर्ड मंदिरों की आय और खर्च का रिकॉर्ड भी रखेगा। इसके जरिए संसाधनों के वितरण की व्यवस्था बनाई जा सकती है। उन्होंने मंदिरों को राज्य के सीधे नियंत्रण से मुक्त करने की बात कही।
प्रशासन हिंदू समाज के प्रतिनिधियों को सौंपने का सुझाव दिया। मालवीय ने परंपरागत पुजारी परिवारों की भूमिका सुरक्षित रखने को कहा। उन्होंने ऐसी व्यवस्थाओं के पंजीयन का सुझाव भी दिया। उनके अनुसार पूजा व्यवस्था परंपरा और शास्त्रों के अनुसार चलनी चाहिए। प्रशासन और पूजा को अलग-अलग समझना जरूरी है।
छोटे मंदिरों को मिले सहायता
मालवीय ने विश्वविद्यालय व्यवस्था जैसा मॉडल प्रस्तुत किया। इसमें बड़े मंदिर केंद्रीय संस्था जैसी भूमिका निभा सकते हैं। छोटे मंदिर बड़े मंदिरों से संस्थागत रूप से जुड़ सकते हैं। इससे उन्हें संसाधन और प्रबंधन सहायता मिल सकती है। उन्होंने जर्जर मंदिरों की पहचान कराने का सुझाव दिया। उनके संरक्षण के लिए अलग कोष बनाया जा सकता है।
सरकार का जवाब नहीं आया
मध्य प्रदेश में धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग कार्यरत है। विभाग मंदिर और धार्मिक न्यास संबंधी व्यवस्थाएं देखता है। मालवीय के ताजा प्रस्ताव पर विभाग का औपचारिक जवाब सामने नहीं आया। राज्य सरकार ने भी कोई नीति घोषित नहीं की है। इसलिए सनातन बोर्ड फिलहाल विधायक का सुझाव है। इसे सरकारी निर्णय या प्रस्तावित कानून नहीं माना जा सकता।
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