सनातन हिंदू एकता रथयात्रा के दूसरे दिन धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का राष्ट्रवाद पर जोर, श्रद्धालुओं को सात वचनों की शपथ, बुलडोजर से बरसे फूल
समझें क्या है पूरा मामला
बागेश्वर धाम से सनातन हिंदू एकता रथयात्रा (Sanatan Hindu Ekta Rath Yatra) 3.0 रविवार को शुरू हुई थी।
दूसरे दिन यात्रा पन्ना से सामूहिक हनुमान चालीसा और राष्ट्रगान के साथ रवाना हुई।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हजारों श्रद्धालुओं को सात वचनों की शपथ दिलाई।
उन्होंने कहा कि वे देश में कास्टवाद नहीं, राष्ट्रवाद चाहते हैं।
यह 500 किलोमीटर की यात्रा पांच जिलों से गुजरकर 15 अक्टूबर को खत्म होगी।
दूसरे दिन क्या हुआ
शास्त्री के साथ कई संत चल रहे हैं। इनमें अयोध्या की हनुमानगढ़ी के राजू दास महाराज और मलूकपीठ के गंगा दास महाराज हैं। हरिद्वार के मोनी महाराज और चित्रकूट धाम के राधेश्याम महाराज भी साथ हैं।
तारा गांव में यात्रा का स्वागत हुआ। लोगों ने बड़े उत्साह के साथ शास्त्री का स्वागत किया। उन्होंने हाथ उठाकर आशीर्वाद दिया और हिंदुओं से एकजुट होने की अपील की। इस दौरान भीड़ ने जात-पात की करो विदाई, हम सब हिंदू भाई-भाई के नारे लगाए।
यात्रा तारा से नाचते-गाते अमानगंज की ओर रवाना हुई। जय श्रीराम के नारे लगे। अमानगंज नगर को स्वागत के लिए दुल्हन की तरह सजाया गया है। दोपहर का विश्राम पवई में और रात का विश्राम हटा में प्रस्तावित है।
सात वचनों की शपथ दिलाई
शास्त्री ने हजारों श्रद्धालुओं को सात वचनों की शपथ दिलाई। रिपोर्ट के अनुसार ये वचन सनातन धर्म, हिंदू एकता और सामाजिक समरसता से जुड़े हैं।
शपथ के बाद रथयात्रा भक्तिमय माहौल में अगले पड़ाव के लिए रवाना हुई। शास्त्री ने कहा कि चाहे जितने विरोधी आएं, प्राण चले जाएं, तब भी धर्म नहीं छोड़ना है। यह उनका बयान है।
कास्टवाद नहीं, राष्ट्रवाद चाहते हैं
शास्त्री ने कहा कि सनातनियों की एकता से भारत मजबूत होगा। उन्होंने जातिवाद के बजाय राष्ट्रवाद को बढ़ावा देने की बात कही। पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा- कि वे देश में कास्टवाद नहीं, राष्ट्रवाद चाहते हैं।
यात्रा के दौरान शास्त्री ने कहा कि नशा मुक्ति, सनातन एकता और लव जिहाद से मुक्त बुंदेलखंड बनाना इस पदयात्रा का उद्देश्य है।
बुलडोजर से फूल बरसे
यात्रा रविवार सुबह करीब 11:30 बजे बागेश्वर धाम से निकली थी। सबसे आगे बालाजी की प्रतिमा चली, फिर शास्त्री का रथ और पीछे समर्थकों के वाहन। रिपोर्ट के अनुसार श्रद्धालुओं ने बुलडोजर और जेसीबी से फूल बरसाए।
सनातन हिंदू एकता रथयात्रा 3.0 का भव्य स्वागत। बुलडोजर से बरसाए गए फूल, पुष्पवर्षा के बीच निकली रथयात्रा।
संत की टिप्पणी पर विवाद
मध्य प्रदेश के दतिया में चल रहे पंडोखर धाम महोत्सव में बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को लेकर विवाद खड़ा हो गया। पंडोखर सरकार के पीठाधीश्वर गुरुशरण महाराज ने धीरेंद्र शास्त्री के एक बयान पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि धीरेंद्र शास्त्री जैसे लोग सनातन धर्म के रक्षक नहीं हो सकते।
गुरुशरण महाराज ने धीरेंद्र शास्त्री के पर्चा निकालने के तरीके पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि धीरेंद्र शास्त्री हाथ की सफाई से पर्चे तैयार करते हैं और लोगों को भ्रमित करते हैं। उन्होंने इसे सनातन धर्म के लिए नुकसानदायक बताया।
दरअसल, कुछ दिन पहले धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा था कि वे किसी भी संत की पोल खोल सकते हैं। उनके इसी बयान पर कई साधु-संतों ने आपत्ति जताई थी। अब पंडोखर धाम महोत्सव में गुरुशरण महाराज ने भी इस बयान का विरोध किया है। उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री के दावों और काम करने के तरीके पर सवाल उठाए हैं।
रूट मैप अगले तीन दिन तक
यात्रा 11 से 15 अक्टूबर 2026 तक है। 13 अक्टूबर को तीसरे दिन दमोह में गौरीशंकर मंदिर से शुरुआत होगी। हिंडोरिया और गढ़ाकोटा में संकल्प दिलाया जाएगा। राधिका पैलेस में दोपहर का भोजन और सागर के बालाजी मंदिर में रात का विश्राम तय है।
14 अक्टूबर को चौथे दिन यात्रा सागर के बालाजी मंदिर से शुरू होगी। कर्रापुर और शाहगढ़ की मंडी प्रांगण में संकल्प दिलाया जाएगा। बंडा में दोपहर का भोजन होगा। रात का विश्राम टीकमगढ़ के शासकीय पीजी कॉलेज में प्रस्तावित है।
15 अक्टूबर को अंतिम दिन टीकमगढ़ के पीजी कॉलेज से यात्रा शुरू होगी। जतारा में दोपहर का भोजन और पलेगा में संकल्प दिलाया जाएगा। समापन छतरपुर में हवन के साथ होगा। इसके साथ ही रूट भी बदल सकता है।
पहले भी निकाल चुके हैं सनातन हिंदू एकता यात्रा
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इससे पहले भी सनातन हिंदू एकता के लिए पदयात्रा निकाल चुके हैं। नवंबर 2024 में उन्होंने बागेश्वर धाम से ओरछा तक करीब 160 किलोमीटर की पदयात्रा निकाली थी। यह यात्रा 21 नवंबर से शुरू होकर 29 नवंबर तक चली थी।
इसके बाद 2025 में दिल्ली से वृंदावन तक यात्रा निकालने की घोषणा भी की गई थी।
अब यात्रा के अगले तीन दिनों पर नजर
सनातन हिंदू एकता रथयात्रा 3.0 के अब तीन दिन बाकी हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यात्रा का उत्साह और बढ़ने की उम्मीद है। कितने श्रद्धालु इसमें शामिल होंगे और अलग-अलग जगहों पर किस तरह स्वागत होगा, इस पर सभी की नजर रहेगी। साथ ही भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था भी अहम रहेगी।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अपनी यात्राओं के जरिए नशा मुक्ति और सामाजिक एकता का संदेश देने की बात करते रहे हैं। हालांकि उनके कुछ बयानों को लेकर विवाद और सवाल भी उठते रहे हैं। ऐसे में यात्रा के दौरान दिए जाने वाले बयानों और आयोजनों पर भी नजर बनी रहेगी।
FAQs:
- सनातन हिंदू एकता रथयात्रा कब शुरू हुई और इसका उद्देश्य क्या है?
सनातन हिंदू एकता रथयात्रा 3.0 3 अक्टूबर को बागेश्वर धाम से शुरू हुई है। इसका मुख्य उद्देश्य नशा मुक्ति, सनातन एकता और लव जिहाद से मुक्त बुंदेलखंड बनाना है। - यात्रा का उद्देश्य क्या बताया गया है?
आयोजकों और शास्त्री के अनुसार उद्देश्य सामाजिक एकता, नशा मुक्ति, हिंदू एकता और राष्ट्रवाद है। शास्त्री ने कास्टवाद की जगह राष्ट्रवाद की बात कही। यात्रा के दौरान उन्होंने लव जिहाद से मुक्त बुंदेलखंड की बात भी कही। यह उनका बयान है। - इस रथ यात्रा की रूट मैप और समापन स्थल क्या है?
यह 500 किलोमीटर की यात्रा 15 अक्टूबर को टीकमगढ़ में समापन होगा, जिसमें यह यात्रा पांच जिलों से होकर गुजरेगी।