कांग्रेस नेताओं को विलेन बनाने की मुहिम; राहुल, कमलनाथ और दिग्विजय को घेरने चल रहा संघ का जन जागरण अभियान
अरुण तिवारी, BHOPAL. प्रदेश का विधानसभा चुनाव इस बार पिछले बीस सालों का सबसे कठिन चुनाव माना जा रहा है। राजनीतिक पंडित भी अनुमान नहीं लगा पा रहे हैं कि आखिर ऊंट किस करवट बैठेगा। सियासी गठजोड़ से बनी प्रदेश की बीजेपी सरकार इस बार बड़े संघर्ष से गुजर रही है। ऐसे में एक बार फिर पार्टी को संघ का सहारा है। संघ ने प्रदेश में जन जागरण यात्रा शुरू की है। हालांकि, संघ इसको अपना राष्ट्र निर्माण अभियान बता रहा है, लेकिन बीजेपी की अंदरूनी राजनीति के जानकार मानते हैं कि इसके पीछे बड़ा राजनीतिक मकसद हो जा सकता है। क्योंकि संघ के इस जन जागरण अभियान में सीधे तौर पर कांग्रेस नेताओं पर निशाना साधा जा रहा है। संघ कमलनाथ, दिग्विजय सिंह और राहुल गांधी के कोरोना वैक्सीन, मंदिर, चंद्रयान, सनातन और संघ विरोधी बयानों को प्रचारित कर रहा है।
बीजेपी की जड़ें जमाने में संघ का बड़ा हाथ
बीजेपी को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का राजनीतिक चेहरा माना जाता है। संघ सीधे तौर पर बीजेपी के कार्यक्रमों में दखल भी नहीं देता है। संघ को बीजेपी की मातृ संस्था कहा जाता है। जानकार कहते हैं कि समाज के बीच बीजेपी की जड़ें जमाने में संघ का बड़ा हाथ होता है। खासतौर पर चुनावों के समय माता अपने राजनीतिक पुत्र की सफलता के लिए पर्दे के पीछे ही सही काम भी करती है। संघ का एक बार फिर जन जागरण अभियान शुरू हुआ है। चूंकि प्रदेश में चुनाव का मौसम है इसलिए इस अभियान को राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। संघ कहता है कि यह राष्ट्र प्रथम भारत निर्माण का अभियान है। देशकाल की परिस्थिति के हिसाब से समाज का जागरण करना जरुरी है। जानकार इसे चुनावी अभियान बता रहे हैं। हालांकि, बीजेपी ऐसा नहीं मानती।
देखते हैं इस अभियान में आखिर संघ किन मुद्दों को समाज के बीच लेकर जा रहा है...
संघ इस तरह बता रहा है मुद्दे
कमलनाथ का बयान: कमलनाथ द्वारा कहना कि कौन कहता है कि आदिवासी हिंदू हैं। वहीं दिग्विजय सिंह ने गुरु गोलवलकर के बयान को तोड़ मरोड़ कर समाज में भ्रम फैलाना और बयानबाजी करना।
- भारत की प्रतिष्ठा धूमिल करना: चंद्रयान की लैंडिंग के समय वैज्ञानिकों का अपमान, कोरोना वैक्सीन को गलत बताना।
- भ्रम का निर्माण: अंबानी, अडाणी पर बयानबाजी करना, राफेल डील पर गलत बयान देकर देश में भ्रम पैदा करना।
- सांप्रदायिक दंगे: नूह, खरगोन, दिल्ली, बंगाल में दंगे।
- देश को तोड़ने का प्रयास : जातिगत जनगणना की बात कर देश को तोड़ने की कोशिश।
- विदेश में भारत की छवि धूमिल करना: असहिष्णुता, लोकतंत्र की हत्या और प्रेस पर पाबंदी के आरोप।
- हिंदू द्वेष: सनातन विरोधी बयान, रामचरित मानस का अपमान, भगवा आतंकवाद का आरोप, राहुल गांधी का मंदिर जाने वालों का अपमान।
- विदेशी शक्तियों का हस्तक्षेप: चीन के साथ मुठभेड़ के समय चीन का पक्ष लेना, भारतीय सैनिकों का अपमान करना, चीनी राजदूत से मुलाकात करना, सर्जिकल स्ट्राइक को झूठ बताना, सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत मांगकर सेना का अपमान करना।
कांग्रेस इन सारे आरोपों को खारिज कर रही है। बहरहाल चुनाव का परिणाम बताएगा कि इन राष्ट्रीय मुद्दों का प्रदेश के चुनाव पर कितना असर पड़ता है।