जस्टिस को फोन लगाने के मामले में विधायक संजय पाठक की सुनवाई बढ़ी, अब 15 जुलाई को होगी
News in short
विधायक संजय पाठक का जस्टिस से फोन कॉल विवाद बढ़ा।
पाठक ने कहा, कॉल गलती से डायल हुआ था।
अदालत ने उन्हें व्यक्तिगत पेशी का आदेश दिया।
मामले की सुनवाई 15 जुलाई 2026 तक बढ़ी।
नए कानूनी मोड़ की संभावना, चीफ जस्टिस की सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति पर विचार।
News in detail
मध्यप्रदेश में भाजपा विधायक संजय पाठक के जस्टिस से फोन कॉल विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। दरअसल यह मामला एक सितंबर 2025 को शुरू हुआ था। जस्टिस विशाल मिश्रा ने ओपन कोर्ट में बताया कि एक विधायक ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की थी। जस्टिस मिश्रा उस समय खनन कंपनियों से जुड़े मामले की सुनवाई कर रहे थे। यह मामला संजय पाठक से जुड़ा था, जिनके परिवार पर खनन कंपनियों से संबंधित आरोप थे। जस्टिस मिश्रा ने न्यायिक निष्पक्षता को ध्यान में रखते हुए खुद को इस मामले से अलग कर लिया था।
संजय पाठक की पेशी
विधायक संजय पाठक मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में पेश हुए। उन्होंने कहा था कि जस्टिस का नंबर गलती से डायल हुआ था। कॉल तुरंत काट दिया गया था। संजय पाठक ने अगली सुनवाई में व्यक्तिगत पेशी से छूट मांगी थी। अदालत ने उनकी मांग खारिज कर दी थी। कोर्ट ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया था। गुरुवार को वे कोर्ट में उपस्थित हुए। वे करीब दो घंटे तक कोर्ट परिसर में रहे।
15 जुलाई तक बढ़ी सुनवाई
संजय पाठक के कोर्ट में उपस्थित होने के बाद मामले की सुनवाई 15 जुलाई 2026 तक के लिए बढ़ा दी गई है। अब अगली सुनवाई 15 जुलाई को दोपहर 2:30 बजे होगी। इस मामले में कोर्ट ने व्हिसलब्लोअर आशुतोष दीक्षित को भी इस मामले में कोर्ट की सहायता करने की अनुमति दी है।
फोन कॉल पर विधायक का बयान
संजय पाठक ने हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा कि जस्टिस विशाल मिश्रा का नंबर गलती से डायल हुआ था। जैसे ही एक घंटी बजी, उन्होंने कॉल काट दिया था। हालांकि कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया था कि विधायक की व्यक्तिगत उपस्थिति के बिना हलफनामे पर विचार नहीं किया जाएगा।
खनन कंपनियों से जुड़ा विवाद
यह विवाद संजय पाठक के परिवार से जुड़ी खनन कंपनियों पर कथित अवैध उत्खनन के आरोपों से जुड़ा था। इस मामले में जस्टिस मिश्रा की बेंच में सुनवाई चल रही थी। जस्टिस मिश्रा ने इस मामले में कहा था कि यह संपर्क न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। इसलिए उन्होंने उस केस से खुद को अलग कर लिया था। इसके बाद हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए संजय पाठक के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया था।
न्यायपालिका की गरिमा पर सवाल
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इस मामले को न्यायपालिका की गरिमा से जुड़ा गंभीर मामला माना। प्रथम दृष्टया इसे आपराधिक अवमानना मानते हुए संजय पाठक को नोटिस जारी किया गया। अब इस मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई 2026 को होगी, जहां और बहस की जाएगी।
मामले में नया मोड़
इस मामले में एक नया कानूनी मोड़ आ सकता है। जानकारी के अनुसार, चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा के सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश बनने की संभावना है। यदि ऐसा होता है, तो यह मामला नई बेंच के सामने सूचीबद्ध हो सकता है। इस स्थिति में मामले की सुनवाई में और समय लग सकता है, जिससे फैसले में देरी हो सकती है।
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