पूर्व कैदी पर आया जेल अफसर फिरोजा खातून का दिल, बजरंग दल ने हिंदू रीति-रिवाज से कराई शादी
नीरज सोनी @छतरपुर
कहते हैं कि प्यार न तो मजहब की दीवारें देखता है और न ही सामाजिक बंदिशें। मध्य प्रदेश के सतना से एक ऐसी ही अनूठी प्रेम कहानी सामने आई है, जिसने सबको हैरान कर दिया है।
सतना सेंट्रल जेल में पदस्थ सहायक अधीक्षक फिरोजा खातून ने एक ऐसे युवक को अपना हमसफर चुना है, जो कभी उसी जेल की सलाखों के पीछे हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा था। मंगलवार 5 मई को छतरपुर जिले के लवकुश नगर में यह विवाह पूरे हिंदू रीति-रिवाज के साथ संपन्न हुआ।
कैसे शुरू हुआ प्रेम का सफर
इस कहानी की शुरुआत सतना जेल के भीतर से हुई थी। फिरोजा खातून वहां वारंट इंचार्ज का काम संभाल रही थीं, जबकि हत्या के मामले में सजा काट रहा धर्मेंद्र उर्फ अभिलाष भी जेल के भीतर वारंट संबंधी कागजी कामकाज में मदद करता था।
सरकारी फाइलों के लेन-देन और ड्यूटी की औपचारिकताओं के बीच दोनों में बातचीत शुरू हुई। धीरे-धीरे यह जान-पहचान दोस्ती में बदली और फिर प्यार का रंग चढ़ने लगा। अभिलाष करीब 14 साल जेल में रहने के बाद, 4 साल पहले अपने अच्छे आचरण के आधार पर रिहा हुआ था।
बजरंग दल ने कराई शादी
फिरोजा के इस फैसले से उसके परिजन खुश नहीं थे। विरोध इतना था कि परिवार का कोई भी सदस्य शादी में शामिल होने नहीं पहुंचा। ऐसी चुनौतीपूर्ण स्थिति में समाज और इंसानियत का एक अलग रूप देखने को मिला।
सतना विश्व हिंदू परिषद (VHP) के जिला उपाध्यक्ष राजबहादुर मिश्रा अपनी पत्नी के साथ आगे आए और उन्होंने माता-पिता बनकर फिरोजा का कन्यादान किया। इस दौरान बजरंग दल के कार्यकर्ता भी भाई और रक्षक की भूमिका में मौजूद रहे।
2007 के चर्चित हत्याकांड में मिली थी उम्रकैद
धर्मेंद्र उर्फ अभिलाष छतरपुर के चंदला का रहने वाला है। साल 2007 में चंदला नगर परिषद के तत्कालीन उपाध्यक्ष कृष्णदत्त दीक्षित की हत्या के मामले में उसे दोषी पाया गया था। उस वक्त इस हत्याकांड की बहुत चर्चा हुई थी।
सजा मिलने के बाद अभिलाष ने जेल में अपनी गलतियों का पछतावा किया। वहीं 14 साल की लंबी सजा काटने के बाद जब वह बाहर आया, तब भी फिरोजा का प्यार उसके लिए कम नहीं हुआ और दोनों ने शादी करने का फैसला किया।
हिंदू रीति-रिवाज से हुई दोनों की शादी
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यह विवाह (दोनों ने हिंदू रीति-रिवाज से शादी की) संपन्न हुआ। एक तरफ वर्दी की गरिमा थी और दूसरी तरफ एक ऐसा इंसान जिसने अपनी सजा पूरी कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का संकल्प लिया था।
इस विवाह की खबर मिलते ही सतना जेल के अधिकारियों और कैदियों ने भी इस जोड़े को अपनी शुभकामनाएं भेजी हैं। यह शादी आज पूरे इलाके में चर्चा का विषय है क्योंकि यह नफरत के ऊपर प्रेम और प्रायश्चित की जीत का संदेश देती है।
डिप्टी जेलर फिरोजा क्या बोलीं
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