सिस्टम की लापरवाही ने ली मासूम की जान, सतना में कुपोषण से मौत पर सात कर्मचारियों को नोटिस
क्या आज के दौर में भी बच्चे कुपोषण से मर रहे हैं? ये वाकई सोचने वाली बात है। एक तरफ सरकार कुपोषण मुक्त समाज बनाने के दावे करती है। दूसरी तरफ सतना से आई यह खबर व्यवस्था पर कई सवाल खड़े करती है।
ऐसी घटनाएं बताती हैं कि योजनाएं कागजों से निकलकर गरीबों तक नहीं पहुंच रही हैं। यह मामला प्रशासन के लिए एक चिंताजनक संकेत है।
कुपोषण से चार महीने की बच्ची की मौत
सतना जिले में बुधवार 22 अप्रैल को एक चार महीने की बच्ची की कुपोषण के कारण मौत हुई थी, जबकि उसका जुड़वां भाई अब भी गंभीर हालत में है। दोनों बच्चे पिछले 15 दिनों से उल्टी, दस्त, बुखार और डायरिया से परेशान थे।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बच्चों को समय पर सही इलाज और पोषण नहीं मिला था। इसी वजह से उनकी हालत और बिगड़ती गई। इसके बावजूद बच्चों का इलाज जुगुलपुर गांव में एक झोलाछाप के पास ही चल रहा था।
मां बोली सरकारी योजना का फायदा नहीं मिला
मृत बच्ची की मां विमला ने बताया कि उन्हें सिर्फ टीकाकरण का ही लाभ मिला था। इसके अलावा कोई और सरकारी योजना का फायदा नहीं हुआ। आशा कार्यकर्ता ने भी नियमित संपर्क नहीं किया, जिससे समय पर सही सलाह और मदद नहीं मिल पाई।
शारीरिक कमजोरी से पिलाया बकरी का दूध
जांच में यह भी सामने आया कि मां की शारीरिक कमजोरी की वजह से वह बच्चों को स्तनपान नहीं करा पा रही थीं। इसके बजाय उन्हें बकरी और गाय का दूध पिलाया जा रहा था, जो इस उम्र के बच्चों के लिए बहुत खतरनाक हो सकता है।
जन्म से लेकर छह महीने तक बच्चे के लिए केवल मां का दूध ही सही पोषण का स्रोत होता है, लेकिन परिवार को सही मार्गदर्शन नहीं मिल पाया था।
सात कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस
इस मामले में स्वास्थ्य विभाग ने कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज शुक्ला ने लापरवाही पाए जाने पर सात कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस भेजकर उनसे जवाब मांगा है।
जन्म के समय ही कम था वजन
जांच रिपोर्ट के अनुसार सुप्रांशी और उसके भाई नैतिक का जन्म के समय वजन 2 किलोग्राम और 1.90 किलोग्राम था, जो सामान्य से कम था।
दोनों की हालत गंभीर थी इसलिए उन्हें रीवा रेफर किया जा रहा था, लेकिन एंबुलेंस में शिफ्ट करते समय सुप्रांशी की मौत हो गई थी।
इस मामले में महिला एवं बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त रिपोर्ट में कई गंभीर लापरवाहियां सामने आई हैं। जैसे की बच्चों की समय पर स्क्रीनिंग नहीं की गई थी।
मेडिकल ऑफिसर पर लगे आरोप
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नयागांव की आरबीएसके मेडिकल ऑफिसर डॉ. पूजा शुक्ला पर आरोप लगे हैं। उन्होंने नियमित स्क्रीनिंग नहीं की और उच्च जोखिम वाले शिशुओं की पहचान में लापरवाही बरती थी।
इसके अलावा उल्टी, दस्त, कुपोषण और डिहाइड्रेशन जैसे लक्षण होने के बावजूद सही तरीके से ट्रैकिंग और फॉलोअप नहीं किया गया था।
साथ ही परिजनों को समय पर बेहतर इलाज के लिए रेफर भी नहीं किया गया। न ही एएनएम, सीएचओ और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय की भी कमी रही थी।
इसी मामले में इन्हें नोटिस जारी किया गया
- आरबीएसके मेडिकल ऑफिसर डॉ. धनेश द्विवेदी
- सेंट्रल मेडिकल ऑफिसर डॉ. धनेन्द्र पाण्डेय
- ब्लॉक कम्युनिटी मोबिलाइजर देवमुनि पटेल
- सेक्टर सुपरवाइजर कमलेश चंद्र सिंह
- सीएचओ डॉ. पुष्पेंद्र गुप्ता
- उप स्वास्थ्य केंद्र चौबेपुर की एएनएम विद्या चक्रवर्ती
इसके अलावा सीएमएचओ ने सभी संबंधित कर्मचारियों को तय समय सीमा में जवाब देने को कहा है। विभाग ने यह भी साफ किया है कि अगर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, तो इन कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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