मैम! मुझे आपके बाल पसंद हैं, मासूम की इतनी सी बात पर कमिश्नर सविता प्रधान ने मुंडवाया सिर
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश की अफसर सविता प्रधानने बड़ा फैसला लिया है।
- उन्होंनेअपने बाल दान किए हैं।
- बच्ची की आखिरी इच्छा पूरी करने के लिएसिर मुंडवाया है।
- सविता सिंगरौली नगर निगममें आयुक्त के पद पर हैं।
- उनकी कहानी बालविवाह से अफसर बनने तक की भी है।
मध्यप्रदेश की अफसर सविता प्रधान इन दिनोंसुर्खियों में हैं। उन्होंने एक कैंसरपीड़ित बच्ची के लिए अपने बाल दान करदिए।
सिर मुंडवाने के बाद उनकी तस्वीरेंसोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। बता दें कि सविताप्रधान फिलहाल सिंगरौली नगर निगम मेंआयुक्त हैं।
बता दें कि सविता प्रधान की इन तस्वीरों को लोगबड़ी संख्या में पसंद कर रहे हैं। कमेंटसेक्शन में लोग उनके इस फैसले की तारीफकर रहे हैं।
कई लोगों का कहना है कि यह इंसानियत की सच्ची मिसाल है। एक बड़े पद पर होकर भी इतना सरल फैसला लेना सबको प्रभावित कर रहा है।
बच्ची से यूं हुई पहचान
जानकारी के अनुसार सविता प्रधान की मुलाकात उस बच्ची से फेसबुक के जरिए हुई थी। बच्ची कैंसर की अंतिम स्टेज से जूझ रही है।
बातचीत के दौरान बच्ची ने मासूमियत से कहा था, मैम मुझे आपके बाल बहुत पसंद हैं। यह बात सविता के दिल को छू गई।
दो दिन पहले सविता प्रधान ने अपने बाल कटवा दिए। इन बालों से बच्ची के लिए विग तैयार करवाई जा रही है।
सविता प्रधान का कहना है कि इस विग से बच्ची का आत्मविश्वास लौटेगा। वह चाहती हैं कि इलाज के दौरान बच्ची खुद को सामान्य महसूस करे।
मां का दर्द याद आया
सविता प्रधान बताती हैं कि वह बच्ची उनके दिल के बहुत करीब है। उनकी अपनी मां तीन बार कैंसर से जूझ चुकी हैं। इसलिए वे जानती हैं कि कीमोथेरेपी में बाल झड़ने का दर्द कैसा होता है।
सविता प्रधान का कहना है कि यह कदम उठाने के लिए किसी ने नहीं कहा। यह उनकी अंतरात्मा की आवाज थी। उन्हें बस उस बच्ची को खुश देखना था।
सुंदरता आत्मविश्वास में है
सिर मुंडवाने के बाद सविता ने इंस्टाग्राम पर चार तस्वीरें शेयर कीं। साथ में एक सशक्त संदेश भी लिखा। उनका कहना था कि सुंदरता लंबे बालों या गहनों से नहीं आती, बल्कि आत्मविश्वास से झलकती है।
सविता प्रधान ने यह भी साफ किया कि वे बिना स्कार्फ के दफ्तर जाएंगी। इसी बोल्ड लुक में वे अपना काम संभालेंगी। उन्हें इस पर कोई झिझक नहीं है।
बाल विवाह से अफसर बनने तक का सफर
बता दें कि सविता प्रधान की कहानी संघर्ष से भरी है। वे मूल रूप से नर्मदापुरम के मड़ई गांव की रहने वाली हैं। उनका जन्म एक गरीब आदिवासी परिवार में हुआ था। उनके पिता बीड़ी पत्ते तोड़ने और मजदूरी का काम करते थे।
16 साल की उम्र में शादी
महज 16 साल की उम्र में सविता की शादी कर दी गई थी। उनके पति उनसे 11 साल बड़े थे। ससुराल में उन्हें भयानक घरेलू हिंसा झेलनी पड़ी थी।
प्रताड़ना से तंग आकर वसविता अपने दो बेटों अथर्व और यजूस के साथ घर छोड़कर निकल गई थी। एक रिश्तेदार के सहारे वे रुकीं। साथ ही गुजारे के लिए उन्होंने ब्यूटी पार्लर में काम शुरू किया था।
IAS अफसर नहीं हैं सविता
अक्सर मीडिया रिपोर्ट्स में सविता प्रधान को IAS अफसर बता दिया जाता है। सविता खुद इस बात को कई बार स्पष्ट कर चुकी हैं कि वे IAS नहीं है।
एक मासूम बच्ची की इच्छा पूरी करने वाली इस अफसर का कदम आज लाखों लोगों को प्रेरणा दे रहा है। संघर्ष से सेवा तक का उनका सफर हर किसी के लिए एक सीख है।
खासकर उन महिलाओं के लिए, जो मुश्किल हालात में हिम्मत हार जाती हैं। सविता प्रधान की कहानी बताती है कि सही रास्ता चुनने से हालात बदले जा सकते हैं।
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