MP के शिक्षकों को फिलहाल राहत के आसार नहीं, क्वालिटी एजुकेशन के लिए TET जरूरी-सुप्रीम कोर्ट
समझें क्या है पूरा मामला
- सुप्रीम कोर्ट में शिक्षकों की TET अनिवार्यता मामले पर अहम सुनवाई जारी है।
- कोर्ट ने साफ कहा कि क्वालिटी एजुकेशन सुनिश्चित करने के लिए TET जरूरी है।
- 1998 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों ने TET से छूट देने की मांग की है।
- इस फैसले से मध्य प्रदेश के करीब डेढ़ लाख शिक्षकों का भविष्य प्रभावित होगा।
- TET विवाद पर कोर्ट की सुनवाई पूरी, हालांकि अंतिम फैसला आना अभी बाकी है।
मध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार 13 मई को अहम सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत की टिप्पणियों से यह संकेत मिले कि शिक्षकों को फिलहाल राहत मिलना मुश्किल नजर आ रहा है। कोर्ट ने साफ कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए TET जरूरी है और शिक्षा व्यवस्था में तय मानकों से समझौता नहीं किया जा सकता।
पुराने शिक्षकों ने मांगी थी परीक्षा से छूट
दरअसल, यह मामला उन शिक्षकों से जुड़ा है जिनकी नियुक्तियां साल 1998 से 2009 के बीच हुई थीं। उस समय TET अनिवार्य नहीं था। मध्य प्रदेश सरकार, शासकीय शिक्षक संगठनों और कई कर्मचारी संघों ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिकाएं दायर कर पुराने शिक्षकों को पात्रता परीक्षा से छूट देने की मांग की है। उनका कहना है कि ये शिक्षक सालों से सेवाएं दे रहे हैं और उनकी नियुक्तियां उस समय की मेरिट प्रक्रिया के तहत हुई थीं।
कोर्ट बोला- पहले ही मिल चुकी पर्याप्त राहत
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि साल 2017 में नियम लागू होने के बाद शिक्षकों को पांच साल की छूट पहले ही दी जा चुकी है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद यानी NCTE द्वारा बनाए गए नियम सभी राज्यों पर समान रूप से लागू होते हैं। कोर्ट ने संकेत दिए कि शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए पात्रता परीक्षा जरूरी है।
डेढ़ लाख शिक्षकों पर पड़ सकता है असर
मध्य प्रदेश में ऐसे शिक्षकों की संख्या करीब डेढ़ लाख बताई जा रही है जो बिना TET नियुक्त हुए थे। सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर 2025 के आदेश के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने इन शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा अनिवार्य करने के निर्देश जारी किए थे। आदेश में यह भी कहा गया था कि यदि कोई शिक्षक TET पास नहीं करता है तो उसकी सेवा समाप्त की जा सकती है।
फैसले के खिलाफ प्रदेशभर में हुआ विरोध
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रदेशभर में शिक्षक संगठनों ने आंदोलन और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए थे। शिक्षकों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, स्कूल शिक्षा मंत्री और जनप्रतिनिधियों के माध्यम से केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग भी की थी। इसके बाद कई संगठनों और राज्य सरकार की ओर से पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गईं।
अभी अंतिम आदेश आना बाकी
हालांकि मामले में अभी अंतिम फैसला नहीं आया है। बुधवार शाम तक 70 से अधिक याचिकाओं पर सुनवाई जारी रही। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जजों तथा वरिष्ठ अधिवक्ताओं की ओर से कई कानूनी दलीलें भी पेश की गईं। अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट के अंतिम आदेश पर टिकी हुई है।
क्या है TET?
टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट यानी TET (Teacher Eligibility Test) एक राष्ट्रीय स्तर की पात्रता परीक्षा है। इसका उद्देश्य यह तय करना होता है कि कोई अभ्यर्थी कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने के लिए योग्य है या नहीं। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद यानी NCTE ने वर्ष 2010 में इस परीक्षा को अनिवार्य किया था ताकि स्कूलों में योग्य और प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित की जा सके।
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