गजब है : SC- ST कल्याण फंड के 96 करोड़ से होगा गोशालाओं का विकास, धार्मिक लोक भी बनाए जाएंगे
एमपी गजब है! केंद्र सरकार ने पैसा तो जारी किया कि इससे SC- ST समुदाय के लोगों के हित में काम हो सकेंगे, मगर 96 करोड़ की भारी- भरकम रकम को गो- कल्याण के लिए शिफ्ट कर दिया गया। अब इस पैसे का उपयोग प्रदेश की गोशालाओं के विकास में किया जाएगा। मामला उजागर होते ही दलित और आदिवासी संगठनों की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आने लगी है।
ऐसे समझें- क्या है उप योजना
मध्य प्रदेश में क्या खेल हो गया
मध्य प्रदेश इस साल केंद्र द्वारा वित्त पोषित उप-योजना ( SUB PLAN ) के तहत अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के कल्याण के लिए नियत बजट में से 96 करोड़ का उपयोग धार्मिक स्थलों, संग्रहालयों के विकास और गौ कल्याण के लिए कर रहा है।
बता दें कि गोकल्याण कोष में पिछले साल की तुलना में लगभग 90 करोड़ रुपए की वृद्धि हुई है। जानकारी के अनुसार गो- संवर्धन और पशुपालन के लिए 252 करोड़ रुपए में से 95.76 करोड़ एससी/एसटी उप-योजना से आवंटित किए गए हैं।
इसी प्रकार छह धार्मिक स्थलों के पुनर्विकास के लिए, चालू वित्तीय वर्ष के लिए आवंटित धनराशि का लगभग आधा हिस्सा एससी/एसटी उप-योजना से है।
सरकार ने जुलाई में पेश बजट में सीहोर में श्री देवी महालोक, सागर में संत श्री रविदास महालोक, ओरछा में श्री राम राजा महालोक, चित्रकूट में श्री रामचंद्र वनवासी-महालोक और ग्वालियर में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के स्मारक के विकास के लिए 109 करोड़ रुपए की घोषणा की थी। यानी इन लोकों का निर्माण SC-ST Sub-Plan के पैसों से होगा।
कर्नाटक भी कर चुका है ऐसा
बता दें कि कर्नाटक के बाद मध्य प्रदेश दूसरा राज्य है, जिसने एससी- एसटी की योजनाओं की राशि दूसरी योजनाओं में डायवर्ट की है। कल्याण योजना के लिए उप-योजना से 14,000 करोड़ रुपए लेने के कर्नाटक के फैसले के बाद राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव को स्पष्टीकरण मांगते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया था।
विरोध भी शुरू
इस मामले में आदिवासी विभाग के एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, "धार्मिक गलियारों और संग्रहालय में दुकानें होंगी, जहां सभी वर्गों के लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। आदिवासी परंपरा को बढ़ावा देने के लिए गलियारों में कलाकृतियां बनाई जाएंगी। आवंटित बजट का उपयोग इसके लिए किया जाएगा।" हालांकि, दलित कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि एससी/एसटी उप-योजना का डायवर्जन केंद्र योजना का दुरुपयोग है।