टेंडर गड़बड़झाले के बाद RSK-DPI से छिनेगा खरीदारी का अधिकार, स्कूल शिक्षा विभाग में बड़े बदलाव की तैयारी

Sanjay Sharma | May 11, 2026, 18:44 IST
Photograph: (the sootr)
स्कूल शिक्षा विभाग के IAS अफसरों से खरीदी के अधिकार छीने जाएंगे। पाठ्यपुस्तक निगम का नाम बदलकर MP एजुकेशनल सर्विस कार्पोरेशन बनेगा। 36 हजार करोड़ के बजट से कंप्यूटर, ड्रेस, साइकिल खरीदेगा। मंत्री के निर्देश पर प्रस्ताव भेजा।

News in Short :

  • टेंडर में गड़बड़ियों के बाद व्यवस्था बदलने की तैयारी
  • अब डीपीआई और आरएसके से छिनेगा टेंडर का अधिकार
  • स्कूल शिक्षा मंत्री के निर्देश के बाद नई इकाई का होगा गठन
  • खरीदी के कामों के लिए पाठ्यपुस्तक निगम का बदलेगा स्वरूप
  • मंत्री के निर्देश पर विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा

News in Detail :

BHOPAL. मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग खरीदी के कामों को लेकर बड़ा बदलाव करने जा रहा है। विभाग के लिए टेंडर प्रक्रिया करने का अधिकार अब डीपीआई और राज्य शिक्षा केंद्र(RSK) से पूरी तरह छिन जाएगा। वहीं विभाग की इकाई पाठ्यपुस्तक निगम का स्वरूप भी बदलेगा।



अब निगम का नाम पाठ्यपुस्तक एवं एज्युकेशनल सर्विस कॉर्पोरेशन करने की तैयारी हो गई है। इसके लिए विभागीय मंत्री राव उदयप्रताप के निर्देश के बाद शासन को प्रस्ताव भी भेज दिया गया है। इकाई के नए स्वरूप को सरकार से 31 मई तक हरी झंडी मिल सकती है। वहीं सरकार की सहमति के बाद कॉर्पोरेशन के हाथ में स्कूल शिक्षा विभाग का बजट खर्च करने का अधिकार आ जाएगा।



क्यों छीने जा रहे अधिकार

स्कूल शिक्षा विभाग के लिए खरीदी का जिम्मा अब तक राज्य शिक्षा केंद्र और डीपीआई के पास है। दोनों एजेंसियां ई-प्रोक्योरमेंट के जरिए टेंडर जारी करने से लेकर खरीदी के लिए फर्मों का चयन करने का काम करती रही हैं। पिछले टेंडरों में लगातार गड़बड़ी सामने आने के साथ ही अधिकारियों पर टेंडर शर्तों में मनमाने बदलाव के आरोप भी लगते रहे हैं। बीते दिनों विभाग ने ऐसी ही अनियिमतता के चलते कई टेंडर निरस्त कर किए थे। शिक्षा विभाग पर टेंडर में हेराफेरी के दागों पर मंत्री राव उदयप्रताप सिंह ने भी खुले तौर पर नाराजगी जताई थी।



पाठ्यपुस्तक निगम संभालेगा जिम्मेदारी

स्कूल शिक्षा मंत्री के निर्देश के बाद विभाग ने टेंडर की जिम्मेदारी पाठ्यपुस्तक निगम को सौंपने का निर्णय लिया है। इसके लिए निगम के वर्तमान स्वरूप में व्यापक बदलाव किए जा रहे हैं। वहीं निगम का नाम भी बदल दिया जाएगा। अब तक भंडार क्रय नियमों के आधार पर निगम के पास केवल पुस्तकों की छपाई के लिए कागम खरीदने का ही अधिकार है। अब विभाग निगम को सभी तरह के टेंडरों के लिए अधिकृत करने जा रहा है। यानी जो काम डीपीआई और आरएसके के पास था अब वह कॉर्पोरेशन के पास होगा।



बदलेगा निगम का प्रशासनिक ढांचा

स्कूलों के लिए खरीदी की जिम्मेदारी पाठ्यपुस्तक निगम को सौंपने से पहले उसका ढांचा भी बदला जाएगा। निगम को नए नाम पाठ्यपुस्तक एवं एज्युकेशनल सर्विस कॉर्पोरेशन के रूप में नई पहचान मिलेगी। स्कूल शिक्षा विभाग का बजट 36 हजार करोड़ रुपए है। इस राशि से कॉर्पोरेशन ही खरीदी करेगा। वहीं खरीदी की प्रक्रिया की निगरानी और नियंत्रण के लिए भी नए बदलाव किए गए हैं। स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदयप्रताप सिंह के निर्देश पर एक समिति का गठन किया गया है। इसमें डीपीआई कमिश्नर, राज्य शिक्षा केंद्र के अधिकारी भी शामिल होंगे। समिति स्कूल शिक्षा मंत्री के सीधे नियंत्रण में काम करेगी।



कॉर्पोरेशन की तरह काम करेगा विभाग

स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदयप्रताप सिंह का कहना है, स्वास्थ्य विभाग के पब्लिक हेल्थ सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड की तरह ही स्कूल शिक्षा विभाग भी कॉर्पोरेशन तैयार करने जा रहा है। अभी यह काम प्रारंभिक अवस्था में है। इससे टेंडर जैसे मामलों में बार- बार की गड़बड़ी और आरोपों से निजात मिल जाएगी।



FAQ

  1. स्कूल शिक्षा विभाग में खरीदी के अधिकार किससे छीने जा रहे हैं?
    स्कूल शिक्षा विभाग के IAS अफसरों, लोक शिक्षण संचालनालय और राज्य शिक्षा केंद्र से शैक्षणिक सामग्री खरीदी के अधिकार छीने जा रहे हैं। अब कंप्यूटर, ड्रेस, साइकिल, फर्नीचर की खरीदी पाठ्यपुस्तक निगम करेगा। इसके लिए निगम का नाम बदलकर MP एजुकेशनल सर्विस कार्पोरेशन किया जाएगा।
  2. पाठ्यपुस्तक निगम के पास अभी क्या अधिकार हैं और क्या बदलाव होगा?
    अभी पाठ्यपुस्तक निगम के पास सिर्फ किताबों की छपाई के लिए कागज खरीदी का अधिकार है। नए प्रस्ताव के बाद निगम स्कूल शिक्षा की सभी शैक्षणिक सामग्री खरीदेगा। विभाग का सालाना बजट 36 हजार करोड़ है। निगम का ढांचा और नाम दोनों बदले जाएंगे।

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