सिंधिया-अंग्रे परिवार की 43 साल पुरानी कानूनी लड़ाई फिर चर्चा में, हाईकोर्ट पहुंचा मामला
अंग्रे परिवार का आरोप है कि छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा हटाने के लिए उसके घोड़े के पैर काटे गए थे। परिवार ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए प्रतिमा को उसके पुराने स्थान पर दोबारा स्थापित करने की मांग की है।
हिरण्यवन कोठी में कैसे स्थापित हुई थी प्रतिमा?
खबरों के मुताबिक, प्रतिमा प्रसिद्ध मूर्तिकार विनायक पी. करमरकर ने बनाई थी। इसे महाराष्ट्र के अलीबाग से ग्वालियर लाया गया था। इसके बाद बसंत विहार और चेतकपुरी के बीच स्थित हिरण्यवन कोठी परिसर में पत्थर के चबूतरे पर स्थापित किया गया था। अब अंग्रे परिवार चाहता है कि प्रतिमा को फिर से उसी स्थान पर लगाया जाए।
43 साल पुराना है संपत्ति विवाद
सिंधिया और अंग्रे परिवार के बीच संपत्ति विवाद करीब 43 साल से चल रहा है। 13 अगस्त 1983 को अंग्रे परिवार ने कोठी से बेदखल किए जाने का आरोप लगाया था। इसके बाद यह विवाद कानूनी प्रक्रिया में पहुंच गया। वहीं, 19 जुलाई 1985 को जिला न्यायालय ने कोठी के लिए रिसीवर नियुक्त किया। रिसीवर की नियुक्ति संपत्ति से जुड़े मामले में कोर्ट की कार्रवाई का हिस्सा थी।
इसके बाद 10 फरवरी 2005 को जिला कोर्ट ने अंग्रे पक्ष के मुकदमे में राहत दी। हालांकि, इससे विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। साल 2005 में ज्योतिरादित्य सिंधिया और अन्य पक्षों ने जिला कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दे दी। इस तरह संपत्ति को लेकर कानूनी लड़ाई आगे भी जारी रही।
अब 24 अक्टूबर 2026 को अंग्रे परिवार ने एक बार फिर हाईकोर्ट में आवेदन दिया है। परिवार ने कोठी की पुरानी स्थिति बहाल करने और प्रतिमा दोबारा लगाने की मांग की है। इससे दशकों पुराने संपत्ति विवाद का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी नजर
अंग्रे परिवार ने हाईकोर्ट में आवेदन जमा किया है। उन्होंने प्रतिमा को दोबारा स्थापित करने और संपत्ति की पुरानी स्थिति बहाल करने की मांग की है। अब इस मामले में कोर्ट की आगे की कार्रवाई अहम होगी। परिवार ने प्रतिमा हटाने और घोड़े के पैर काटे जाने के आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि कोर्ट में होना अभी स्पष्ट नहीं है।
सिंधिया परिवार से जुड़ा एक और संपत्ति विवाद कोर्ट में चल रहा
इस मामले में समझौते के जरिए विवाद सुलझाने की कोशिश हुई थी, लेकिन प्रतिमा देवी ने समझौते से जुड़े डॉक्यूमेंट पर आपत्ति जताई है। उनका दावा है कि हस्ताक्षर कराते समय उन्हें पूरी जानकारी नहीं दी गई थी। कोर्ट ने उनकी आपत्ति को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है, हालांकि इससे उनके आरोप सही साबित नहीं होते।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, यह विवाद परिवार की करीब 41 हजार करोड़ रुपए की अनुमानित संपत्ति से जुड़ा है। अब 29 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में प्रतिमा देवी अपने दावे के समर्थन में सबूत पेश करेंगी। इसके बाद मामले की आगे की कानूनी दिशा स्पष्ट हो सकेगी।
बता दें सिंधिया परिवार से जुड़ा एक और मामले कोर्ट में चल रहा है। इस विवाद में समझौते के जरिए मामला सुलझाने की कोशिश भी हुई थी। लेकिन प्रतिमा देवी की आपत्ति से मामले में नया मोड़ आया है। उन्होंने समझौते से जुड़े डॉक्यूमेंट्स पर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि हस्ताक्षर कराते समय उन्हें पूरी जानकारी नहीं दी गई थी। उन्होंने इस संबंध में कोर्ट में आवेदन दिया था।
कोर्ट ने उनकी आपत्ति को सुनवाई के लिए स्वीकार किया है। इसका अर्थ यह नहीं है कि उनके आरोप सही साबित हो गए हैं। फिलहाल कोर्ट ने उन्हें अपना पक्ष साबित करने का अवसर दिया है।
करीब 41 हजार करोड़ की संपत्ति से जुड़ा है विवाद
सिंधिया परिवार की संपत्ति का यह विवाद देशभर में चर्चा का विषय रहा है। मीडिया रिपोर्टों में परिवार की संपत्ति का अनुमान करीब 41 हजार करोड़ रुपए बताया गया है। इस विवाद में परिवार के अलग-अलग सदस्यों के अधिकारों पर सवाल उठे हैं। ग्वालियर का जय विलास पैलेस भी परिवार की प्रमुख संपत्तियों में शामिल है।
हालांकि, पूरी संपत्ति का मूल्य और उसमें किसका कितना हिस्सा है, यह अलग कानूनी सवाल हैं। कोर्ट में चल रही कार्रवाई के दौरान इन मुद्दों पर भी विचार हो सकता है। प्रतिमा देवी की आपत्ति से समझौते की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हुए हैं। उनके आरोपों की सच्चाई अब पेश किए जाने वाले सबूतों पर निर्भर करेगी।
29 अक्टूबर की सुनवाई क्यों अहम है?
29 अक्टूबर को प्रतिमा देवी को अपने आरोपों के समर्थन में साक्ष्य पेश करने होंगे। इस सुनवाई में उनके दावे को परखने का अवसर मिलेगा। कोर्ट उनके पेश किए गए सबूतों और दूसरे पक्ष के तर्कों पर विचार करेगी। संपत्ति विवाद में अब सबकी नजर 29 अक्टूबर की सुनवाई पर रहेगी। प्रतिमा देवी को अपने दावे के समर्थन में कोर्ट को संतुष्ट करना होगा। इसके बाद ही मामले की अगली कानूनी दिशा स्पष्ट हो सकेगी।
FAQs
- सिंधिया-अंग्रे परिवार के बीच विवाद किस बात को लेकर है?
यह विवाद संपत्ति से जुड़ा है। हाल ही में हिरण्यवन कोठी परिसर में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा को लेकर मामला फिर सामने आया है। - अंग्रे परिवार ने हाईकोर्ट में क्या मांग की है?
अंग्रे परिवार ने प्रतिमा और हिरण्यवन कोठी की पुरानी स्थिति बहाल करने की मांग की है। - शिवाजी महाराज की प्रतिमा को लेकर क्या आरोप लगाया गया है?
अंग्रे परिवार का आरोप है कि प्रतिमा हटाने के लिए उसके घोड़े के पैर काट दिए गए थे। इसके बाद प्रतिमा को जयविलास पैलेस ले जाया गया।