सिंधिया संपत्ति विवाद: 78 साल पुराना द कोवेनेंट तय करेगा करोड़ों की रियासत का वारिस!
समझें क्या है पूरा मामला...
- ग्वालियर के सिंधिया राजघराने की 41 हजार करोड़ रुपए की संपत्ति विवाद में है।
- 78 साल पुराना कोवेनेंट दस्तावेज कोर्ट में सबसे अहम सबूत बना है।
- ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पारिवारिक बंटवारे के लिए कोर्ट में आवेदन दिया था।
- पद्माराजे सिंधिया की बेटी प्रतिमा देवी ने अब कैविएट दाखिल की है।
- मामला ज्येष्ठाधिकार और हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के बीच कानूनी लड़ाई पर टिका है।
ग्वालियर जिला कोर्ट में सिंधिया राजघराने की संपत्ति को लेकर बड़ा कानूनी विवाद चल रहा है। यह मामला 41 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की अचल संपत्तियों से जुड़ा है। अब यह केस दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। इस पूरे विवाद में 78 साल पुराना एक दस्तावेज सबसे अहम बन गया है। इसे द कोवेनेंट यानी विलय पत्र कहा जाता है।
क्या है द कोवेनेंट दस्तावेज
यह दस्तावेज दिल्ली के नोटरी से सर्टिफाइड ट्रू कॉपी के रूप में प्रमाणित है। यह अब कोर्ट के सामने पेश हो चुका है। इसमें मध्य भारत की रियासतों के विलय की पूरी जानकारी दर्ज है। साथ ही राजाओं की निजी संपत्तियों का ब्योरा भी इसमें है।
इसमें प्रिवी पर्स यानी टैक्स फ्री वार्षिक भत्ते का भी पूरा हिसाब है। आजादी के समय रियासतों का भारत सरकार में विलय हुआ था। उस समय राजाओं को यह भत्ता तय किया गया था। सबसे ज्यादा भत्ता ग्वालियर के महाराज जेएएम सिंधिया को मिलता था।
किसे कितना भत्ता मिलता था
कोवेनेंट में अलग अलग रियासतों के राजाओं का भत्ता तय था। महाराजा जेएएम सिंधिया को 25 लाख रुपए मिलते थे। इंदौर के महाराजा यशवंतराव होल्कर को 15 लाख रुपए मिलते थे। धार के ए.आर. पवार को 2.9 लाख रुपए का भत्ता मिलता था।
देवास जूनियर रियासत को 1.8 लाख रुपए मिलते थे। देवास सीनियर रियासत को 1.45 लाख रुपए का भत्ता तय था। मठवार रियासत के राजा को सबसे कम छह हजार रुपए मिलते थे। यह पूरा ब्योरा अब कोर्ट में सबूत के तौर पर पेश हुआ है।
पारिवारिक समझौते की कोशिश
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया अभी राजघराने के मुखिया हैं। उन्होंने कोर्ट में पारिवारिक समझौते का आवेदन दिया था। यह आवेदन आपसी सहमति पर आधारित था। इसके तहत ज्योतिरादित्य, उनकी बुआ वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे के बीच बंटवारा होना था। तीनों पक्षों के बीच बातचीत चल रही थी। लेकिन अब कोर्ट में एक नई कानूनी अड़चन आ गई है।
प्रतिमा देवी ने दाखिल की कैविएट
ज्योतिरादित्य की बड़ी बुआ स्व. पद्माराजे सिंधिया थीं। उनका विवाह त्रिपुरा राजघराने में हुआ था। पद्माराजे की बेटी प्रतिमा देवी ने अब अदालत में कैविएट दाखिल कर दी है। प्रतिमा देवी की शादी नेपाल के राणा परिवार में हुई है। उनके पति डॉ. धवल शमशेर राणा हैं।
प्रतिमा देवी और उनकी बहन रमा राजे खुद को कानूनी उत्तराधिकारी बताती हैं। उनका कहना है कि प्रस्तावित समझौते से उनका अधिकार प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कोर्ट से मांग की है कि उनका पक्ष सुने बिना कोई अंतिम आदेश न हो।
दो कानूनी तर्कों पर टिकी लड़ाई
इस विवाद में दो अलग अलग कानूनी तर्क सामने आए हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया का पक्ष ज्येष्ठाधिकार यानी बड़े बेटे के अधिकार पर टिका है। उनका दावा है कि शाही परिवारों पर हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के सामान्य नियम लागू नहीं होते। धारा 5(2) के तहत खास प्रथाओं को छूट मिली हुई है। इसमें संपत्ति सिर्फ जेष्ठ उत्तराधिकारी यानी बड़े बेटे को मिलती है। 1961 में महाराजा जीवाजीराव के निधन के बाद सरकार ने भी माधवराव सिंधिया को ही एकमात्र उत्तराधिकारी माना था।
बुआओं का तर्क क्या है
दूसरी तरफ बुआओं यानी विजयाराजे पक्ष का अलग तर्क है। 1984 में राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने वसीयत और ट्रस्ट के जरिए बेटियों को हिस्सा दिया था। यह वसीयत 1989 में बालिग होने पर लागू हुई थी। उस समय ज्योतिरादित्य ने इसे कोर्ट में चुनौती दी थी।
बुआओं का कहना है कि 2001 में राजमाता के निधन के बाद बेटियां पक्षकार बन गई थीं। उनका तर्क है कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 के तहत सभी बच्चों का बराबर अधिकार बनता है।
संपत्तियों का पूरा गणित
कोवेनेंट के तहत संपत्तियां तीन हिस्सों में बंटी हैं। पहला हिस्सा सिंधिया परिवार की निजी संपत्तियों का है। इसमें ग्वालियर का जयविलास पैलेस और उससे जुड़े कई भवन शामिल हैं। शिवपुरी का माधव विलास पैलेस भी इसमें आता है।
मुंबई का समुद्र महल और उषाकिरण भी परिवार की संपत्ति है। दिल्ली, आगरा, झांसी, वाराणसी और ऊटी में भी कई संपत्तियां हैं। दूसरा हिस्सा छतरियां और मंदिर हैं। यह निजी ट्रस्टों के प्रबंधन में हैं।
इनमें ग्वालियर का छतरी परिसर और कई प्रमुख मंदिर शामिल हैं। तीसरा हिस्सा वे संपत्तियां हैं जो सरकार को सौंपी जा चुकी हैं। इनमें मोती महल पैलेस, गोरखी पैलेस और फूल बाग जैसी जगहें आती हैं।
चुनावी हलफनामों में घोषित संपत्ति
सिंधिया परिवार ने 2024 के चुनावी हलफनामों में अपनी संपत्ति भी घोषित की थी। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने करीब 424.74 करोड़ रुपए की संपत्ति बताई थी। पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने करीब 5.95 करोड़ रुपए की संपत्ति दिखाई थी।
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने करीब 4.54 करोड़ रुपए की संपत्ति घोषित की थी। हालांकि राजघराने की कुल अनुमानित 41 हजार करोड़ रुपए की संपत्ति का बड़ा हिस्सा अलग अलग धार्मिक और चैरिटेबल ट्रस्टों के पास दर्ज है।
आगे क्या होगा
अब यह मामला ग्वालियर जिला कोर्ट में अगली सुनवाई का इंतजार कर रहा है। प्रतिमा देवी की कैविएट के बाद कोर्ट को उनका पक्ष भी सुनना होगा। इससे पारिवारिक समझौते की प्रक्रिया में देरी हो सकती है। यह मामला सिर्फ पारिवारिक विवाद नहीं बल्कि कानूनी नजरिए से भी अहम है। इससे शाही परिवारों में उत्तराधिकार के नियमों पर भी असर पड़ सकता है।
FAQ
- सिंधिया राजघराने की संपत्ति विवाद में द कोवेनेंट क्या है?
द कोवेनेंट 78 साल पुराना विलय पत्र है। इसमें मध्य भारत की रियासतों के भारत में विलय का ब्योरा दर्ज है। इसमें राजाओं की निजी संपत्तियों और प्रिवी पर्स का हिसाब भी है। यह दिल्ली के नोटरी से प्रमाणित होकर अब कोर्ट में पेश हुआ है। यह दस्तावेज मौजूदा संपत्ति विवाद में सबसे अहम सबूत माना जा रहा है। - प्रतिमा देवी ने कैविएट क्यों दाखिल की है?
प्रतिमा देवी स्व. पद्माराजे सिंधिया की बेटी हैं और खुद को कानूनी उत्तराधिकारी बताती हैं। उनका कहना है कि प्रस्तावित पारिवारिक समझौते से उनका अधिकार प्रभावित हो रहा है। इसलिए उन्होंने कोर्ट से मांग की है कि उनका पक्ष सुने बिना कोई अंतिम फैसला न हो। यह कैविएट पारिवारिक बंटवारे की प्रक्रिया में नई कानूनी अड़चन बन गई है।
ये खबरें भी पढ़िए...
कौन हैं प्रतिमा देवी, जिन्होंने सिंधिया परिवार की संपत्ति सेटलमेंट में फंसाया नया पेच
सिंधिया संपत्ति विवाद: कोर्ट में 1000 पन्नों का रिकॉर्ड पेश, सुनवाई 10 अक्टूबर को
सिंधिया राजघराने का संपत्ति विवाद सुलझने की कगार पर, आज होगी सुनवाई
16 साल पुराना सिंधिया राजघराने का संपत्ति विवाद सुलझा, जिला अदालत में पेश हुआ समझौता