सिंधिया संपत्ति विवाद: फर्जीवाड़े का सबूत देने कोर्ट नहीं पहुंचीं प्रतिमा देवी, अब 18 नवंबर को होगी आरोपों पर सुनवाई

Ratan Kumar Mishra | Nov 04, 2026, 17:06 IST
प्रतिमा देवी ने संपत्ति बंटवारे के समझौते पर धोखे से हस्ताक्षर कराने का आरोप लगाया है।
Pratima Devi has alleged that she was tricked into signing a property division agreement.
सिंधिया परिवार की संपत्ति के बंटवारे का मामला ग्वालियर जिला न्यायालय में चल रहा है। इस विवाद में प्रतिमा देवी को अपने साथ कथित फर्जीवाड़े के सबूत पेश करने हैं। लेकिन बुधवार, 4 नवंबर को भी वह अदालत नहीं पहुंचीं। अब मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी। बताया जा रहा है कि प्रतिमा देवी की बेटी शिवांगिनी सिंह और दामाद प्रतीक कारकी वर्ल्ड टूर पर हैं।

इसी वजह से वह ग्वालियर नहीं आ पा रही हैं। प्रतिमा देवी आमतौर पर अपनी बेटी और दामाद के साथ ही ग्वालियर आती हैं।



प्रतिमा देवी का आरोप है कि संपत्ति बंटवारे के समझौते पर उनसे धोखे से हस्ताक्षर कराए गए थे। अदालत ने उनकी आपत्ति स्वीकार करते हुए उन्हें अपने आरोप साबित करने का मौका दिया है।



29 अक्टूबर को जज छुट्टी पर थे, 4 नवंबर को प्रतिमा देवी नहीं आईं

अदालत ने पहले प्रतिमा देवी को 29 अक्टूबर को अपने आरोपों के समर्थन में सबूत पेश करने का मौका दिया था। लेकिन उस दिन जज के अवकाश पर रहने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी थी। इसके बाद 4 नवंबर की तारीख तय की गई थी। वहीं, आज यानी बुधवार को भी प्रतिमा देवी कोर्ट नहीं पहुंचीं। इसके चलते उनकी ओर से सबूत पेश नहीं हो सके।



जानकारी के मुताबिक, प्रतिमा देवी जब भी ग्वालियर आती हैं, तो उनकी बेटी और दामाद उनके साथ रहते हैं। पिछली बार भी वह दोनों के साथ ही आई थीं। फिलहाल उनके विदेश यात्रा पर होने को प्रतिमा देवी के नहीं आने की वजह बताया जा रहा है।



प्रतिमा देवी की बेटी-दामाद विदेश यात्रा पर

प्रतिमा देवी ने समझौते पर क्या आरोप लगाए हैं?

प्रतिमा देवी ने सिंधिया परिवार की संपत्ति के बंटवारे से जुड़े समझौते पर आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि उनकी मौसियों ने उनसे धोखे से दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए थे। उनका कहना है कि हस्ताक्षर करते समय उन्हें समझौते की पूरी जानकारी नहीं दी गई थी। उन्होंने अदालत से इस मामले की जांच और सुनवाई की मांग की थी।



अदालत ने उनकी आपत्ति स्वीकार कर ली है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि उनके आरोप साबित हो गए हैं। अब उन्हें अपने दावे के समर्थन में Evidence यानी सबूत पेश करने होंगे।



ऊषा राजे, वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे पर लगाए आरोप

प्रतिमा देवी ने अपनी तीन मौसियों ऊषा राजे, वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे पर समझौते को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि संपत्ति बंटवारे के कागजों पर उनसे सही जानकारी और सहमति के बिना हस्ताक्षर कराए गए।



वहीं, दूसरे पक्ष की ओर से पहले की सुनवाई में कहा गया था कि दस्तावेजों पर हस्ताक्षर सहमति से किए गए थे। अब कोर्ट दोनों पक्षों के दावों और सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेगा।



पहले समझौते से विवाद सुलझाने की हुई थी कोशिश

सिंधिया परिवार में संपत्ति के बंटवारे को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। इस मामले को आपसी समझौते से सुलझाने की कोशिश भी की गई थी। लेकिन प्रतिमा देवी ने समझौते से जुड़े दस्तावेजों पर सवाल उठा दिए हैं। उन्होंने अदालत में आवेदन देकर कहा कि उनसे धोखे से हस्ताक्षर कराए गए थे।



अदालत ने उनकी आपत्ति पर सुनवाई की अनुमति दी है। अब प्रतिमा देवी को अपने आरोपों के समर्थन में Legal Documents और दूसरे जरूरी सबूत पेश करने होंगे।



करीब 41 हजार करोड़ की संपत्ति से जुड़ा है विवाद

सिंधिया परिवार की संपत्ति के इस विवाद की चर्चा लंबे समय से हो रही है। मीडिया रिपोर्टों में परिवार की कुल संपत्ति की अनुमानित कीमत करीब 41 हजार करोड़ रुपए बताई गई है।



इन संपत्तियों में ग्वालियर का जयविलास पैलेस भी शामिल है। इसके अलावा मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली, उत्तरप्रदेश और दूसरे राज्यों में भी परिवार से जुड़ी कई संपत्तियां बताई जाती हैं। हालांकि, संपत्तियों की वास्तविक कीमत और किस सदस्य का कितना हिस्सा है, यह कानूनी जांच और दस्तावेजों का विषय है।



सिंधिया परिवार की प्रमुख निजी संपत्तियां

ग्वालियर और मध्यप्रदेश में: जयविलास पैलेस परिसर, बंगला, कार्यालय, निशात कोठी, कमला भवन, गजरा भवन, सख्या विलास, सुसेरा कोठी, कुलेथ कोठी और टेकनपुर रिट्रीट शामिल हैं।



इसके अलावा शिवपुरी का माधव विलास पैलेस, जॉर्ज कैसल, हैप्पी विला, उज्जैन का कालियादेह पैलेस और गुना कोठी भी प्रमुख संपत्तियों में गिने जाते हैं।



दूसरे शहरों में: मुंबई का समुद्र महल, उषाकिरण, दादर की दुकान और आवास, दिल्ली की ग्वालियर हाउस कोठी, आगरा कोठी, झांसी की पाडोन कोठी, वाराणसी का सिंधिया घाट, ऊटी के बैलफोर लॉज समेत पांच बंगले और पुणे का पद्माविलास शामिल हैं।



निजी ट्रस्टों के प्रबंधन में धार्मिक संपत्तियां: ग्वालियर का छतरी परिसर, लश्कर के विट्ठल और कोटेश्वर मंदिर, शिवपुरी की माधवराव और जीजा महाराज छतरी, उज्जैन का द्वारकाधीश संस्थान और काशी का गंगा महल शामिल हैं। मथुरा, वृंदावन, अयोध्या और पुष्कर के मंदिर भी इस सूची में हैं।



सरकार को सौंपी जा चुकी हैं ये संपत्तियां

सिंधिया परिवार से जुड़ी कई संपत्तियां सरकार को भी सौंपी जा चुकी हैं।



ग्वालियर में: मोती महल पैलेस, गोरखी पैलेस, फूल बाग, जल बिहार, गेंदघर, गद्दी बैरक, सरस्वती महल, कम्फू कोठी और तिगरा कोठी शामिल हैं।



अन्य स्थानों पर: शिवपुरी का भदैया कुंड और भूरा खो, चंदेरी के रामनगर, पंचमनगर और सिंहपुर महल, श्योपुर पैलेस, आगर की जावरा कोठी और शाजापुर का लाल बंगला शामिल हैं।



18 नवंबर की सुनवाई क्यों अहम?

अब मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर को तय बताई गई है। इस दिन प्रतिमा देवी को अपने आरोपों के समर्थन में सबूत पेश करने का मौका मिलेगा। उनका दावा है कि संपत्ति बंटवारे के समझौते में उनके साथ धोखा हुआ है। दूसरी ओर, समझौते पर सहमति से हस्ताक्षर होने की बात कही गई है।



ऐसे में अब अदालत के सामने रखे जाने वाले Evidence अहम होंगे। इन्हीं के आधार पर मामले में आगे की सुनवाई और कार्रवाई की दिशा तय होगी।

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