अवैध खनन को शह देना SDO रूपेश रतन को पड़ा भारी, पहले HC की फटकार अब अवमानना नोटिस

Neel Tiwari | Aug 05, 2026, 14:05 IST
SDO रूपेश रतन
ग्वालियर के डबरा एसडीओ रहे रूपेश रतन सिंघई पर हाई कोर्ट की सख्ती बढ़ गई है। पहले कोर्ट ने उनकी रिपोर्ट को भ्रामक बताया है। अब उनके खिलाफ अवमानना का मामला दर्ज हुआ है। कोर्ट ने तीन सप्ताह में जवाब मांगा है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मामला ग्वालियर जिले में अवैध रेत और पत्थर खनन से जुड़ा है।
  • हाई कोर्ट ने कई खनन पट्टों के नवीनीकरण पर उठाए थे गंभीर सवाल।
  • कोर्ट ने एसडीओ रूपेश रतन सिंघई की रिपोर्ट को भ्रामक माना।
  • कोर्ट ने माना था कि कई जरूरी तथ्य जानबूझकर छिपाए गए।
  • अब तत्कालीन एसडीओ के खिलाफ अवमानना का मामला दर्ज कर नोटिस जारी हुआ है

एक रिपोर्ट से बढ़ी SDO डबरा की मुश्किल

ग्वालियर के डबरा में एसडीओ पदस्थ रहे रूपेश रतन सिंघई की मुश्किलें अब और बढ़ गई हैं। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पहले उनकी कार्यशैली पर कड़ी टिप्पणी की थी।



अब उसी मामले में उनके खिलाफ अवमानना का प्रकरण दर्ज हो गया है। हाई कोर्ट ने उन्हें नोटिस जारी कर तीन सप्ताह में जवाब देने का निर्देश दिया है।



मामला केवल एक अधिकारी की रिपोर्ट तक सीमित नहीं है। इसके पीछे अवैध खनन, करोड़ों रुपए की संभावित रॉयल्टी, पट्टों के नवीनीकरण और सरकारी कार्रवाई की पूरी प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई है।



हाई कोर्ट ने क्यों जताई थी नाराजगी

यह पूरा विवाद रिट याचिका क्रमांक 49598/2025 से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने एक अनुपालन रिपोर्ट पेश की थी। इस रिपोर्ट में 16 खनन पट्टाधारकों की जानकारी दी गई थी।



सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि कई मामलों में पूरी जानकारी नहीं दी गई। कुछ महत्वपूर्ण तथ्य छिपाए गए।



कई स्थानों पर अवैध खनन के पुराने मामलों का उल्लेख भी अधूरा था। कोर्ट ने कहा कि यदि न्यायालय के सामने गलत या अधूरी जानकारी रखी जाती है, तो यह बेहद गंभीर मामला है।



बचन सिंह के पट्टे ने बढ़ाए सवाल

सुनवाई में सबसे पहले बचन सिंह के मामले की चर्चा हुई। रिकॉर्ड से सामने आया कि वर्ष 2017 में उन पर स्वीकृत क्षेत्र से बाहर अवैध खनन का आरोप लगा था। उनके खिलाफ करोड़ों रुपए की रॉयल्टी और जुर्माने की कार्रवाई प्रस्तावित थी।



इसके बावजूद वर्ष 2020 में उनके खनन पट्टे का नवीनीकरण हो गया। कोर्ट ने पूछा कि बिना जरूरी औपचारिकताओं और बकाया की जांच के यह नवीनीकरण कैसे हुआ।



कोर्ट ने यह भी कहा कि एसडीओ की रिपोर्ट में पुराने पट्टे का उल्लेख नहीं किया गया। अदालत ने इसे सामान्य गलती मानने से इनकार कर दिया।



कई मामलों में नहीं किया गया मौका निरीक्षण

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अलग-अलग खनन पट्टों की जानकारी मांगी। कई मामलों में एसडीओ यह भी नहीं बता सके कि मौके पर अभी खनन चल रहा है या बंद हो चुका है।



उन्होंने स्वीकार किया कि रिपोर्ट देने से पहले कई स्थानों का निरीक्षण ही नहीं किया गया था। कोर्ट ने कहा कि इतने गंभीर मामले में बिना स्थल जांच के रिपोर्ट देना लापरवाही दिखाता है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि इससे मिलीभगत की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।



पट्टा नवीनीकरण पर उठे गंभीर सवाल

कोर्ट ने पाया कि कई पट्टाधारकों के खिलाफ वर्ष 2017 से कारण बताओ नोटिस लंबित थे। कई मामलों में करोड़ों रुपए की रॉयल्टी और जुर्माना प्रस्तावित था।



इसके बाद भी अलग-अलग वर्षों में कई खनन पट्टों का नवीनीकरण कर दिया गया। कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि लंबित कार्रवाई के बावजूद इन पट्टों को किस आधार पर आगे बढ़ाया गया।



कलेक्टर को मिली सीधी जिम्मेदारी

सुनवाई के दौरान ग्वालियर कलेक्टर भी कोर्ट में मौजूद रहीं। अदालत ने माना कि अधीनस्थ अधिकारी अपने दायित्व निभाने में विफल रहे हैं।



इसके बाद कोर्ट ने अवैध खनन रोकने की व्यक्तिगत जिम्मेदारी कलेक्टर को सौंपी। साथ ही सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने और ई-चेक पोस्ट का रिकॉर्ड पेश करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि बिना अनुमति नया सीमांकन नहीं किया जाएगा।



16 खनन पट्टों पर लगी थी रोक

हाई कोर्ट ने तत्काल प्रभाव से 16 खनन पट्टाधारकों के खनन कार्य रोकने के आदेश दिए थे। अदालत ने कहा था कि मामला केवल राजस्व का नहीं है।



यह पर्यावरण और लोगों की सुरक्षा से भी जुड़ा है। कोर्ट ने माना कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो क्षेत्र का पर्यावरण गंभीर नुकसान झेल सकता है।



अब अवमानना मामले में नया नोटिस

16 जुलाई 2026 के आदेश के बाद एसडीओ रूपेश रतन सिंघई के खिलाफ अलग से अवमानना प्रकरण दर्ज किया गया। यह मामला अवमानना याचिका क्रमांक CONC 5169/2026 के रूप में दर्ज हुआ।



इस मामले की सुनवाई जस्टिस द्वारकाधीश बंसल की एकलपीठ में हुई। कोर्ट ने एसडीओ को नोटिस जारी किया है। उन्हें तीन सप्ताह में अपना जवाब दाखिल करना होगा। अब अदालत उनके जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेगी।



आगे क्या होगा

अब इस मामले की अगली सुनवाई में कोर्ट यह देखेगा कि एसडीओ का जवाब संतोषजनक है या नहीं।।यदि अदालत को जवाब उचित नहीं लगा, तो अवमानना मामले में आगे की कार्रवाई हो सकती है।



साथ ही अवैध खनन, पट्टा नवीनीकरण और सरकारी अधिकारियों की भूमिका की जांच भी आगे बढ़ने की संभावना है।



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