सिवनी हवाला लूटकांड: निलंबित एसडीओपी पूजा पांडे को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत
शॉर्ट में समझें क्या है पूरा मामला...
- सिवनी में तीन करोड़ रुपए के हवाला लूटकांड में निलंबित एसडीओपी पूजा पांडे मुख्य आरोपी हैं।
- सुप्रीम कोर्ट ने उनके दो साल के बच्चे को आधार मानकर जमानत दी।
- अधिकांश सह-आरोपियों को जबलपुर हाईकोर्ट से पहले ही जमानत मिल चुकी है।
- ट्रायल कोर्ट में मुकदमा पहले की तरह चलता रहेगा।
SDOP पूजा पांडे को सुप्रीम कोर्ट से राहत
मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के चर्चित हवाला लूटकांड में एक अहम मोड़ आया है। इस मामले की मुख्य आरोपी एसडीओपी (निलंबित) पूजा पांडे को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है। देश के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अदालत ने यह फैसला सुनाया है।
सुप्रीम कोर्ट के सामने पूजा पांडे की तरफ से दलील दी गई कि उनका दो साल का बच्चा जेल में उनके साथ रह रहा है। इसी आधार पर कोर्ट ने उन्हें जमानत देना उचित माना है। हालांकि, ट्रायल कोर्ट (Trial Court) में मुकदमा पहले की तरह जारी रहेगा।
क्या है सिवनी हवाला लूटकांड?
यह मामला सिवनी जिले के खैरीटेक क्षेत्र में हुई कथित हवाला रकम की लूट से जुड़ा है। आरोप है कि इस वारदात को पुलिस की वर्दी और सरकारी हथियारों का इस्तेमाल कर पूरी तरह योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया था। करीब तीन करोड़ रुपए की हवाला रकम लूटी गई थी।
जब यह मामला सामने आया तो पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया था। यह खबर पूरे प्रदेश में सनसनी फैलाने वाली बन गई क्योंकि इसमें खुद पुलिसकर्मी आरोपी थे।
उच्चस्तरीय जांच में कई गिरफ्तारियां हुईं
घटना सामने आने के बाद राज्य स्तर पर विशेष जांच टीम (SIT - Special Investigation Team) गठित की गई थी। इस टीम ने कई पुलिसकर्मियों से पूछताछ की थी। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी जुटाए गए थे। मामले में एसडीओपी पूजा पांडे सहित कई पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया गया था।
इस केस ने पुलिस विभाग की छवि पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जो विभाग कानून की रखवाली करता है, उसी के कुछ अफसरों पर इस तरह का आरोप लगना पूरे तंत्र के लिए शर्मनाक था।
अधिकांश आरोपियों को जमानत मिल चुकी है
इस मामले में पूजा पांडे अकेली आरोपी नहीं थीं। उनके साथ कई पुलिसकर्मी भी आरोपी बनाए गए थे। इनमें से अधिकांश को जबलपुर हाईकोर्ट से पहले ही जमानत मिल चुकी है। इसके अलावा दो आरोपियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर (FIR) भी अदालत ने निरस्त कर दी है।
वहीं, मुख्य आरोपी एसडीओपी पूजा पांडे और एसआई (SI - Sub Inspector) अर्पित भैरम को अब तक निचली अदालतों से कोई राहत नहीं मिली थी। इसी वजह से पूजा पांडे ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी।
बच्चे को माना बड़ा आधार
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इसमें एक मानवीय पहलू को प्राथमिकता दी गई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि याचिकाकर्ता महिला है, एकल मां है और उसका दो साल का मासूम बच्चा जेल में उसी के साथ रह रहा है। यह स्थिति बच्चे के बुनियादी अधिकारों और हितों के लिहाज से ठीक नहीं थी।
यह जमानत सिर्फ मां के लिए नहीं बल्कि उस बच्चे के हित में भी दी गई, जिसकी उम्र में जेल की सलाखें नहीं होनी चाहिए।
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