MP में GST ट्रिब्यूनल का गुपचुप बदला प्रस्ताव, 3 साल पहले इंदौर था, 2 माह पहले भोपाल का भेजा, अब राजधानी का जारी हो गया नोटिफिकेशन
संजय गुप्ता, INDORE. भारत सरकार ने जीएसटी ट्रिब्यूनल गठित करने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इसके तहत 31 ट्रिबन्यूल बेंच गठित होंगी जो देश के 46 शहरों से संचालित होंगी (यानि बेंच भले ही एक होगी लेकिन वह चिन्हित दूसरे शहर में सेटअप रखेगी और वहां भी नियमित अंतराल में सुनवाई करेगी)। इस नोटिफिकेशन में इंदौर को झटका लगा है। मप्र के लिए एक ही बेंच भोपाल में दी गई है और यह केवल इसी शहर से ही संचालित होगी, इंदौर को चिन्हित भी नहीं किया गया है, यानि इंदौर में इसका सैटअप स्थापित नहीं होगा। इस पूरे मामले में भोपाल स्तर पर खेल हो गया है।
साल 2020-21 के दौरान मप्र शासन ने जीएसटी काउंसिल में इंदौर का प्रस्ताव भेजा था और मिनिट्स में भी इंदौर का नाम आ गया था। लेकिन दो-तीन माह पहले जब ट्रिब्यूनल के गठन, काम आदि को लेकर नोटिफिकेशन सामने आए, इसके बाद भोपाल स्तर से नया प्रस्ताव गया और इसमें इंदौर की जगह भोपाल का नाम प्रस्तावित कर दिया गया। जिसके बाद 14 सितंबर को भारत सरकार के नोटिफिकेशन में भोपाल का नाम आ गया।
प्रमुख सचिव दीपाली रस्तोगी बोली, पहले के प्रस्ताव की जानकारी नहीं
वही विभाग की प्रमुख सचिव दीपाली रस्तोगी ने द सूत्र से कहा कि ट्रिब्यूनल गठित होता, उसका स्वरूप क्या होगा, इसके लिए एक्ट में संशोधन तो अभी ही काउंसिल ने जारी किया है, दो माह ही हुए हैं। इसके बाद उन्होंने प्रस्ताव मांगा था, जो भोपाल का गया था, पहले क्या हुआ मुझे इसकी जानकारी नहीं है। भोपाल का अब यह अतिरिक्त प्रस्ताव गया या किसी अन्य शहर का पहले गया, इसकी जानकारी मुझे नहीं है।
इंदौर के लिए लंबे समय से हो रही थी मांग
ट्रिब्यूनल इंदौर में स्थापित करने के लिए लंबे समय से मांग हो रही थी और हवाला दिया जा रहा था कि यहां ही स्टेट जीएसटी का मुख्यालय है, व्यावसायिक राजधानी है, इंकमटैक्स ट्रिब्यूनल भी यहीं है, लेकिन इन मांगो को दरकिनार कर भोपाल में स्थापित करने का नोटिफिकेशन हो गया। बताया जाता है कि काउंसिल ने भी कहा था कि हमारी ट्रिब्यूनल गठन के लिए प्राथमिकता होगी कि जहां पर हाईकोर्ट है, वहां ही बनाया जाए, लेकिन नोटिफिकेशन के बाद जानकार भी चौंक गए कि भोपाल में तो हाईकोर्ट भी नहीं है।
कांग्रेस की राज्य सरकारें दो-दो लेने में रही कामयाब
केंद्र और राज्य में बीजेपी सरकार यानि डबल ईंजन की सरकार के चलते माना जा रहा था कि इंदौर की मांग मान ली जाएगी। सांसद शंकर लालवानी ने भी वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण से मिलकर पक्ष रखा था लेकिन बात नहीं बनी। उधर कांग्रेस सरकार वाले राज्य राजस्थान (जयपुर व जोधपुर में), कर्नाटक दो-दो बेंच (बैंगलुरू में ही) लेने में सफल रहे, साथ ही छत्तीसगढ़ जैसे छोटे राज्य में बेंच भले ही एक गठित करने का नोटिफिकेशन है लेकिन इसके लिए रायपुर औऱ् बिलासपुर दोनों शहर ही नोटिफाइ किए हैं, यानि एक जगह बेंच होगी और दूसरे शहर में भी इसका सेटअप बनेगा, जहां नियमित अंतराल पर अलग से केस लगेंगे और सुनवाई होगी। पीएम नरेंद्र मोदी की जन्मस्थली प्रदेश गुजरात को भी दो बेंच मिली है और अहमदाबाद, सूरत के साथ राजकोट तीन शहरों से संचालित होंगी। इसमें केंद्रशासित राज्य दमन, दीव और दादरा व नागर हवेली को भी शामिल किया गया है।
सबसे ज्यादा बेंच यूपी, महाराष्ट्र में बनी
यूपी और महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 3-3 बेंच गठित हुई है। यूपी में सर्वाधिक जनसंख्या वाले राज्य के चलते और महाराष्ट्र सर्वाधिक अर्थव्यवस्था वाला राज्य होने के लिए चलते यह जरूरी था। यूपी में यह बेंच पांच शहरों लखनऊ, वाराणसी, गाजियाबाद, आगरा और प्रयाराज से संचालित होंगी तो महाराष्ट्र में मुबंई, पुणे, ठाणे, नागपुर, औरंगाबाद और गोवा के पणजी को भी इसमें शामिल किया गया है।
ट्रिब्यूनल का काम सेकंड अपील सुनना होगा
इंकमटैक्स ट्रिब्यूनल की तरह ही जीएसटी ट्रिब्यूनल होगा। जीएसटी को लेकर किसी भी लॉ प्वाइंट और टैक्स डिमांड को लेकर व्यापारी की पहली अपील तो विभाग (सेंट्रल या स्टेट जीएसटी व्यापारी जहां भी रजिस्टर्ड है) वहां होगी, फिर दूसरी अपील ट्रिब्यूल में होगा, जहां विभाग या कारोबारी कोई भी पहली अपील के फैसले के खिलाफ जा सकेगा। हालांकि कहा जा रहा है कि ट्रिब्यूनल का काम अधिकांश तौर पर ऑनलाइन ही होगा। इसलिए ज्यादा भागादौड़ी नहीं होगी लेकिन यदि ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही प्रक्रिया हुई तो इंदौर को सबसे ज्यादा समस्या आएगी, क्योंकि अधिकांश कारोबारी मामले, इंदौर से ही जुड़े हुए हैं।